Sunil Gavaskar on BCCI : गावस्कर ने BCCI फिटनेस सिस्टम पर उठाए सवाल, ट्रेनिंग प्रोग्राम में बताई बड़ी कमी

टीम इंडिया में लगातार सामने आ रही चोटों के बीच सुनील गावस्कर ने BCCI की फिटनेस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मौजूदा ट्रेनिंग और फिटनेस तरीके में संभावित कमी की ओर इशारा किया। हालांकि गावस्कर ने Centre of Excellence के फिजियो को सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया। आखिर उन्होंने किस बदलाव की जरूरत बताई, जानिए पूरी कहानी।

Sunil Gavaskar on BCCI

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 17, 2026

Sunil Gavaskar on BCCI : भारतीय क्रिकेट टीम इन दिनों खिलाड़ियों की लगातार बढ़ रही चोटों से जूझ रही है। जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पांड्या, वॉशिंगटन सुंदर, साई सुदर्शन, नितीश रेड्डी और हर्षित राणा जैसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी अलग-अलग कारणों से मैदान से बाहर हैं। लगातार चोटों के कारण टीम की प्लेइंग इलेवन में बदलाव करना पड़ रहा है और इसका असर टीम के प्रदर्शन पर भी दिखाई दे रहा है। ऐसे समय में पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने खिलाड़ियों की फिटनेस और ट्रेनिंग व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

गावस्कर ने BCCI के ट्रेनिंग सिस्टम पर उठाए सवाल

सुनील गावस्कर ने अपने एक कॉलम में भारतीय क्रिकेट की मौजूदा फिटनेस व्यवस्था पर चर्चा करते हुए कहा कि बार-बार एक जैसी चोटों का सामने आना चिंता का विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस यानी CoE के फिजियो को हर चोट के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। गावस्कर के मुताबिक समस्या केवल चोट लगने के बाद होने वाली रिकवरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ खिलाड़ियों के ट्रेनिंग प्रोग्राम में भी हो सकती है।

हैमस्ट्रिंग चोटों की बढ़ती संख्या पर चिंता

गावस्कर ने बताया कि जसप्रीत बुमराह की समस्या घुटने से संबंधित है, लेकिन भारतीय टीम के कई अन्य खिलाड़ी हैमस्ट्रिंग की चोटों से जूझ रहे हैं। उनका मानना है कि जब एक ही प्रकार की चोट बार-बार खिलाड़ियों को परेशान करे, तो ट्रेनिंग सिस्टम की समीक्षा करना जरूरी हो जाता है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी देश के लिए खेलते समय चोटिल हो रहे हैं और इसके लिए केवल बेंगलुरु के CoE को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा।

CoE सिर्फ रिहैब सेंटर नहीं

हाल ही में वीवीएस लक्ष्मण और BCCI सचिव देवजीत सैकिया भी यह बात कह चुके हैं कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की भूमिका केवल खिलाड़ियों के चोट से उबरने तक सीमित नहीं है। गावस्कर ने भी इस विचार का समर्थन किया। उनके मुताबिक खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर समस्या कहीं अधिक व्यापक है और इसके लिए ट्रेनिंग की पूरी प्रक्रिया पर नजर डालने की जरूरत है। चोट से बचाव के लिए शुरुआती स्तर पर ही सही तैयारी जरूरी है।

नेट्स में गेंदबाजों के वर्कलोड पर सवाल

गावस्कर ने वर्कलोड मैनेजमेंट और बायोमैकेनिक्स के नाम पर नेट्स में गेंदबाजों पर लगाई जाने वाली कुछ पाबंदियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर गेंदबाजों को अभ्यास के दौरान सीमित संख्या में गेंद डालने की अनुमति दी जाएगी, तो मैच की वास्तविक परिस्थितियों के लिए वे कैसे तैयार होंगे। उनके मुताबिक यदि किसी गेंदबाज को चार ओवर का स्पेल डालना है, तो अभ्यास में भी उसे मैच जैसी परिस्थितियों का सामना करने की आदत होनी चाहिए।

मैच फिटनेस को प्राथमिकता देने की जरूरत

1983 विश्व कप विजेता गावस्कर ने जिम आधारित फिटनेस के बजाय मैच फिटनेस पर ज्यादा जोर देने की बात कही। उनका कहना है कि केवल भारी वजन उठाना या फिटनेस टेस्ट पास करना पर्याप्त नहीं है। क्रिकेट में खिलाड़ी को लंबे समय तक मैदान पर फील्डिंग करने, बल्लेबाजी और गेंदबाजी की शारीरिक मांगों को पूरा करने के लिए तैयार रहना पड़ता है। इसलिए फिटनेस का वास्तविक मतलब मैच के लिए पूरी तरह तैयार होना होना चाहिए।

लगातार चोटों से टीम कॉम्बिनेशन प्रभावित

गावस्कर की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारतीय टीम का संयोजन लगातार चोटों के कारण प्रभावित हो रहा है। कप्तान शुभमन गिल भी इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में हार के बाद खिलाड़ियों की चोटों को लेकर चिंता जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि लगातार चोटों के कारण टीम का कॉम्बिनेशन प्रभावित हो रहा है। आगामी बड़े टूर्नामेंट में लगातार कई मुकाबले खेलने होते हैं, ऐसे में खिलाड़ियों की फिटनेस बेहद महत्वपूर्ण होगी।

ट्रेनिंग कल्चर में बदलाव की मांग

गावस्कर के बयान के बाद भारतीय क्रिकेट में चर्चा केवल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की भूमिका तक सीमित नहीं रही है। अब सवाल पूरे ट्रेनिंग कल्चर और खिलाड़ियों की तैयारी के तरीके पर उठ रहे हैं। यदि चोटों का सिलसिला जारी रहता है, तो BCCI और टीम प्रबंधन को फिटनेस, वर्कलोड, अभ्यास और मैच तैयारी के मौजूदा मॉडल की समीक्षा करनी पड़ सकती है। भारतीय टीम के लिए आने वाले मुकाबलों में खिलाड़ियों की फिटनेस सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है।

Read More  :  हरियाणा में 400 स्पेशल पुलिस ऑफिसरों की नियुक्ति, लिखित-शारीरिक परीक्षा के बिना होगा चयन