Haryana News: हरियाणा की नायब सरकार ने शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था के हित में एक बेहद अहम और सराहनीय कदम उठाया है। सरकार ने शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से पूरी तरह मुक्त करने की दिशा में ठोस कार्ययोजना तैयार करनी शुरू कर दी है। इसके तहत मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने विभिन्न विभागों से ऐसे कर्मचारियों का ब्योरा और डाटा तलब किया है, जिन्हें स्कूलों में शिक्षकों की जगह गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए तैनात किया जा सके। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षक अपनी ऊर्जा केवल पढ़ाई और छात्रों के भविष्य को संवारने में लगाएं, न कि प्रशासनिक या अन्य गैर-शैक्षणिक कामों में।
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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का कड़ा संज्ञान

लंबे समय से यह शिकायत मिल रही थी कि शिक्षकों से पढ़ाई के अलावा अन्य कई प्रकार के गैर-शैक्षणिक कार्य करवाए जाते हैं, जिससे स्कूलों में पठन-पाठन का माहौल प्रभावित होता है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस गंभीर समस्या पर कड़ा संज्ञान लिया है। सरकार का मानना है कि शिक्षकों की गैर-शैक्षणिक कार्यों में बार-बार ड्यूटी लगाने से न केवल स्कूलों की रोजाना की पढ़ाई बाधित होती है, बल्कि इसका सीधा और नकारात्मक असर विद्यार्थियों के परीक्षा परिणामों पर भी पड़ता है। इन तमाम चिंताओं को दूर करने के लिए ही मुख्यमंत्री कार्यालय ने अब विभागों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।
वैकल्पिक कर्मचारियों की होगी पहचान
मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देशों के बाद मुख्य सचिव कार्यालय के सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों को एक औपचारिक पत्र भेजा है। इस पत्र के माध्यम से विभागों से दो प्रमुख बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी मांगी गई है।
पहला, विभागों से उन कर्मचारी श्रेणियों की सूची मांगी गई है जिनकी कोई स्पष्ट या पूर्णकालिक निश्चित ड्यूटी नहीं होती है, या जिनकी वर्तमान तैनाती उन्हें अतिरिक्त बहुउद्देशीय कार्यों की अनुमति देती है। दूसरा, ऐसे कर्मचारियों का ब्योरा मांगा गया है जिन्हें स्कूलों या अन्य संस्थानों में गैर-शैक्षणिक और बहुउद्देशीय कार्यों के लिए आंशिक या पूर्ण रूप से उपलब्ध कराया जा सके। इन कर्मचारियों के मिलने से शिक्षण स्टाफ पर से अतिरिक्त दबाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होगी उच्च स्तरीय बैठक

इस पूरी योजना को अमलीजामा पहनाने और सही विकल्प तलाशने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है। इस महत्वपूर्ण बैठक में सभी प्रशासनिक सचिव और विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष उपस्थित रहेंगे। विभागों से प्राप्त कर्मचारियों की उपलब्धता और उनकी तैनाती की समीक्षा करने के बाद, मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा यह अंतिम निर्णय लिया जाएगा कि किन विभागों के अतिरिक्त कर्मियों को स्कूलों या अन्य कार्यालयों में गैर-शैक्षणिक कार्यों का जिम्मा सौंपा जाए। सरकार के इस कदम से राज्य की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार आने की उम्मीद है।
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