Uttarakhand News: केदारनाथ में दिवाली पर क्या हुआ खास, 20 क्विंटल फूलों से क्यों सजा बाबा का दरबार?

दिवाली पर केदारनाथ धाम को 20 क्विंटल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है। इस बीच बाबा केदार के रक्षक भैरवनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो गए हैं। अब 11 नवंबर को बाबा केदारनाथ के कपाट बंद होंगे। आखिर इस धार्मिक प्रक्रिया में क्या है खास?

केदारनाथ में दिवाली पर क्या हुआ खास

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

नवम्बर 7, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

Uttarakhand News: उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में दीपावली का पर्व बेहद भव्य तरीके से मनाया जा रहा है। दिवाली के पावन अवसर पर बाबा केदारनाथ के मंदिर और पूरे परिसर को करीब 18 से 20 क्विंटल रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया है। फूलों की आकर्षक सजावट से केदारनाथ धाम की खूबसूरती देखते ही बन रही है। मंदिर परिसर में की गई भव्य सजावट श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। पर्व के मौके पर बाबा केदार के दरबार को विशेष रूप से सजाकर दीपावली की खुशियां मनाई जा रही हैं।

Uttarakhand News: उत्तराखंड में पत्रकारों की बल्ले-बल्ले, सीएम धामी ने

20 क्विंटल फूलों से की गई मंदिर परिसर की सजावट

दीपावली के अवसर पर केदारनाथ मंदिर को अलग-अलग रंगों के फूलों से सजाया गया है। मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर आसपास के परिसर तक फूलों की सुंदर सजावट की गई है। इस भव्य सजावट ने धाम की आध्यात्मिक और धार्मिक छटा को और आकर्षक बना दिया है। बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के बीच भी मंदिर की यह सजावट चर्चा का विषय बनी हुई है। पर्व के अवसर पर मंदिर परिसर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिल रहा है।

भैरवनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद

दीपावली के अवसर पर केदारनाथ धाम में एक महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा का भी निर्वहन किया गया। बाबा केदारनाथ धाम के क्षेत्रपाल और रक्षक माने जाने वाले भगवान भुकुंड भैरवनाथ मंदिर के कपाट विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सदस्य डॉ. विनीत चंद्र पोस्ती ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार भैरवनाथ मंदिर के कपाट बंद करने की प्रक्रिया पूरी की गई है।

धार्मिक परंपराओं के अनुसार संपन्न हुआ कपाट बंद करने का कार्यक्रम

धार्मिक परंपराओं के अनुसार संपन्न हुआ कपाट बंद करने का कार्यक्रम
धार्मिक परंपराओं के अनुसार संपन्न हुआ कपाट बंद करने का कार्यक्रम

भैरवनाथ मंदिर के कपाट बंद किए जाने के दौरान स्थानीय हक-हकूकधारी, तीर्थ पुरोहित और मंदिर समिति के सदस्य मौजूद रहे। इसके अलावा पुलिस तथा प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी भी इस धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुए। सभी की मौजूदगी में निर्धारित धार्मिक परंपराओं और विधि-विधान के अनुसार कपाट बंद करने की प्रक्रिया संपन्न हुई। केदारनाथ धाम में भैरवनाथ को क्षेत्र का रक्षक माना जाता है। इसलिए शीतकाल में उनकी पूजा और मंदिर के कपाट बंद होने की परंपरा का विशेष धार्मिक महत्व है।

11 नवंबर को बंद होंगे बाबा केदारनाथ के कपाट

भैरवनाथ मंदिर के कपाट बंद होने के साथ ही बाबा केदारनाथ धाम के मुख्य मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद करने की धार्मिक प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार, आगामी 11 नवंबर को विधि-विधान और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ बाबा केदारनाथ के कपाट बंद किए जाएंगे। इसके बाद धाम में शीतकालीन प्रवास की परंपराओं का पालन किया जाएगा।

शीतकालीन प्रवास की तैयारियां शुरू

हिमालय क्षेत्र में सर्दियों के दौरान मौसम बेहद कठिन हो जाता है। बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के कारण केदारनाथ धाम में नियमित गतिविधियां सीमित हो जाती हैं। इसी वजह से हर वर्ष धार्मिक परंपराओं के अनुसार मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए जाते हैं। इस बार भी कपाट बंद होने से पहले जरूरी धार्मिक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। दीपावली पर बाबा केदार का भव्य श्रृंगार और भैरवनाथ मंदिर के कपाट बंद होना केदारनाथ धाम की धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अब श्रद्धालुओं की निगाहें 11 नवंबर को होने वाले बाबा केदारनाथ के कपाट बंद होने के कार्यक्रम पर टिकी हैं।

2