Karnataka News: कर्नाटक कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य सिद्दारमैया के एक बयान ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। डिप्टी सीएम के केवल एक पद को लेकर उनकी टिप्पणी को पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। सिद्दारमैया के बयान का वीडियो बुधवार को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद उनके राजनीतिक रुख और भविष्य की भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं।
दरअसल, मंगलवार को आंतरिक आरक्षण के मुद्दे पर आयोजित एक सेमिनार में सिद्दारमैया ने मौजूदा डिप्टी सीएम जी. परमेश्वर का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सरकार के गठन के समय चार से पांच डिप्टी सीएम बनाए जाने का प्रस्ताव सामने आया था, लेकिन अंत में केवल परमेश्वर को यह जिम्मेदारी दी गई।
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दलित मुख्यमंत्री के मुद्दे पर हुई तीखी बातचीत
सेमिनार के दौरान कर्नाटक में अब तक किसी अनुसूचित जाति के नेता के मुख्यमंत्री न बनने का सवाल भी उठाया गया। एक श्रोता ने सिद्दारमैया से इस विषय पर आंदोलन शुरू करने की अपील की। इस पर सिद्दारमैया ने पहले पूछा कि क्या उन्हें इस मुद्दे की पूरी जानकारी है और सुझाव दिया कि आंदोलन की शुरुआत खुद श्रोताओं को करनी चाहिए।
जब वहां मौजूद लोगों ने उनसे ही आंदोलन का नेतृत्व करने की मांग की, तो सिद्दारमैया ने कहा कि वह अकेले ऐसा नहीं कर सकते। बातचीत आगे बढ़ी तो एक श्रोता ने दावा किया कि कांग्रेस में सिद्दारमैया की स्थिति इतनी मजबूत है कि वह पार्टी हाईकमान की तरह प्रभाव रखते हैं और उन्हें पहल करनी चाहिए।
परमेश्वर को डिप्टी सीएम बनाने का सवाल क्यों अहम?
सिद्दारमैया ने इस बात को खारिज करते हुए कहा कि लोग केवल बातें कर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने मौजूद लोगों के सामने एक अहम सवाल रखा—जी. परमेश्वर को डिप्टी मुख्यमंत्री का पद किसने दिलाया?
गौरतलब है कि जी. परमेश्वर कर्नाटक कांग्रेस के प्रमुख दलित नेताओं में गिने जाते हैं। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में उनका नाम सामने आने के बावजूद उन्हें यह जिम्मेदारी नहीं मिली थी। हालांकि, उन्होंने पार्टी हाईकमान के फैसले को स्वीकार करने की बात कही थी।
चार-पांच डिप्टी सीएम के प्रस्ताव का किया जिक्र
सिद्दारमैया के सवाल पर श्रोताओं ने जवाब दिया कि परमेश्वर को डिप्टी सीएम बनाने में उनकी भूमिका थी। इसके बाद उन्होंने याद दिलाया कि शुरुआत में चार से पांच डिप्टी मुख्यमंत्री बनाने की योजना पर विचार किया गया था। उन्होंने सवाल किया कि आखिर केवल परमेश्वर को डिप्टी सीएम बनाने पर जोर किसने दिया था। श्रोताओं ने फिर इसका श्रेय सिद्दारमैया को ही दिया। इस पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं। यही बातचीत अब कर्नाटक की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गई है।
क्या फिर सक्रिय होंगे सिद्दारमैया?
सिद्दारमैया के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद वह अपेक्षाकृत लो-प्रोफाइल राजनीतिक भूमिका में दिखाई दिए हैं। ऐसे में सेमिनार में उनकी बेबाक टिप्पणियों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वह एक बार फिर राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी कर रहे हैं।
उनके बयान को कांग्रेस के भीतर सत्ता और सामाजिक समीकरणों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। खासकर दलित, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता आने वाले दिनों में बढ़ सकती है।
बेटे को मिली अहम जिम्मेदारी भी चर्चा में
इस बीच सिद्दारमैया के बेटे यतींद्र सिद्दारमैया को मंत्रिमंडल में शहरी विकास विभाग की जिम्मेदारी सौंपे जाने का मुद्दा भी राजनीतिक चर्चा में है। पार्टी से जुड़े सूत्रों का मानना है कि सिद्दारमैया सामाजिक-राजनीतिक मंचों के जरिए अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित समुदायों के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर सकते हैं।
अगर ऐसा होता है तो इसका असर कर्नाटक कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति पर पड़ सकता है और मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के लिए भी राजनीतिक समीकरण कुछ असहज हो सकते हैं। फिलहाल, एक बयान ने कर्नाटक कांग्रेस में कई पुराने सवालों और नई सियासी संभावनाओं को फिर से हवा दे दी है।
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