Karachi Blast: सहरी के वक्त गैस रिसाव से ढही इमारत, 9 मासूमों समेत 16 की मौत से हड़कंप!

कराची के लियाकताबाद में जब लोग सहरी की तैयारी कर रहे थे, तभी एक जोरदार धमाके ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया। गैस रिसाव से तीन मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। मलबे के नीचे दबे मासूमों की सिसकियां और अपनों को खोने का गम क्या यह सिर्फ हादसा है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 19, 2026

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Karachi Blast: पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। रमजान के मुकद्दस महीने के पहले ही दिन कराची में हुए एक भीषण धमाके ने खुशियों के माहौल को मातम में बदल दिया। संदिग्ध गैस रिसाव के कारण हुए इस हादसे में अब तक 16 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हैं। यह हादसा कराची की जर्जर बुनियादी व्यवस्था और सुरक्षा मानकों की कमी पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।

अलसुबह धमाके से गूंजा कराची: सहरी के वक्त हुआ हादसा

पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा गुरुवार की सुबह करीब 4:30 बजे पेश आया। कराची के पुराने सोल्जर बाजार इलाके में स्थित एक बहुमंजिला आवासीय इमारत की पहली मंजिल धमाके का केंद्र थी। जिस वक्त यह विस्फोट हुआ, उस समय इलाके के अधिकांश लोग रमजान के पहले रोजे की तैयारी यानी ‘सहरी’ के लिए जगे हुए थे। अचानक हुए इस तेज धमाके की आवाज दूर-दूर तक सुनी गई, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। शुरुआती जांच में पुलिस ने धमाके का मुख्य कारण गैस रिसाव (Gas Leakage) को बताया है।

मासूमों पर टूटा कहर: मृतकों में 2 से 17 साल के 9 बच्चे शामिल

इस हादसे की सबसे दुखद बात यह है कि जान गंवाने वालों में मासूम बच्चों की संख्या सबसे अधिक है। रेस्क्यू टीम ने अब तक मलबे से 14 शव बरामद किए हैं, जिनमें से 9 बच्चे हैं। इन मृत बच्चों की उम्र महज 2 साल से लेकर 17 साल के बीच बताई जा रही है। धमाका इतना शक्तिशाली था कि इमारत का एक हिस्सा पूरी तरह ढह गया, जिसके नीचे कई लोग दब गए। अस्पताल में भर्ती 14 घायलों में भी 7 बच्चे शामिल हैं, जिनमें से कुछ की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। फायर सर्विस और राहत दल अभी भी मलबे में दबे संभावित जीवित बचे लोगों की तलाश कर रहे हैं।

कराची में गैस संकट और सिलेंडरों का जानलेवा इस्तेमाल

कराची जैसे महानगर में इस तरह के हादसे पहली बार नहीं हो रहे हैं। पाकिस्तान का यह आर्थिक केंद्र लंबे समय से गैस की भारी किल्लत से जूझ रहा है। पाइपलाइन से आने वाली गैस की अनियमित आपूर्ति के कारण, विशेष रूप से कम आय वाले और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में लोग एलपीजी (LPG) सिलेंडरों पर निर्भर हैं। सुरक्षा मानकों की अनदेखी और पुराने सिलेंडरों का उपयोग इन रिहायशी इमारतों को ‘टाइम बम’ बना देता है। सोल्जर बाजार की घटना भी इसी बदइंतजामी का नतीजा मानी जा रही है, जहाँ बंद कमरों में गैस भरने से हुए मामूली घर्षण ने तबाही मचा दी।

हालिया हादसों का सिलसिला: सुरक्षा पर उठते बड़े सवाल

कराची में हाल के दिनों में हादसों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। पिछले महीने ही शहर के व्यस्त सदर इलाके में स्थित गुल शॉपिंग प्लाजा के बेसमेंट में भीषण आग लग गई थी। उस अग्निकांड ने भी करीब 79 लोगों की बलि ले ली थी और करोड़ों की संपत्ति खाक हो गई थी। बार-बार होने वाले इन हादसों के बावजूद प्रशासन की नींद नहीं खुल रही है। जर्जर इमारतें और अवैध गैस रिफिलिंग सेंटर आज भी शहर के हर कोने में मौजूद हैं, जो कभी भी बड़ी त्रासदी का सबब बन सकते हैं।

प्रशासन की कार्रवाई और भविष्य की चुनौती

फिलहाल पुलिस ने इलाके को सील कर दिया है और बम निरोधक दस्ते (Bomb Disposal Squad) को भी बुलाया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि धमाके के पीछे कोई अन्य साजिश तो नहीं थी। हालांकि, शुरुआती साक्ष्य गैस रिसाव की ओर ही इशारा कर रहे हैं। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की बात तो की है, लेकिन सवाल वही है कि क्या पाकिस्तान की सरकार अपने नागरिकों को सुरक्षित आवास और बुनियादी गैस सुविधा उपलब्ध कराने में सक्षम होगी? रमजान के पहले दिन हुए इस हादसे ने कराची के हर घर में उदासी भर दी है।

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