Kapil Sibal News: देश में बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों में हुए हालिया इजाफे को लेकर राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि “वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार आज ‘अच्छे दिन’ आ गए हैं।” उन्होंने डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की गिरती कीमत और पेट्रोलियम पदार्थों के बढ़ते दामों का हवाला देते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों की कड़ी आलोचना की। सिब्बल ने कहा कि जनता 12 साल से जिन सुनहरे दिनों का इंतजार कर रही थी, क्या वे यही दिन हैं? उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है कि क्या सरकार चुनाव खत्म होने का इंतजार कर रही थी।
सिब्बल ने अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर उठाए सवाल
आपको बता दे कि, कपिल सिब्बल ने सरकार को घेरते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल से पहले रुपया डॉलर के मुकाबले 58 पर होता था, जो अब ऐतिहासिक रूप से गिरकर 95 के स्तर तक पहुंच गया है। उन्होंने बढ़ती दरों की सूची गिनाते हुए कहा कि पेट्रोल, डीजल, दूध और सीएनजी की कीमतें आसमान छू रही हैं। सिब्बल के अनुसार, मध्यम वर्ग और गरीब जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है और सरकार ‘अच्छे दिन’ के अपने पुराने वादे को निभाने में विफल रही है।
चुनावी शोर और तेल संकट
कपिल सिब्बल ने अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री से सवाल पूछा कि जब सरकार को आने वाले आर्थिक संकट और तेल की कमी का अंदाजा था, तो चुनाव के दौरान इस पर चर्चा क्यों नहीं हुई? उन्होंने कहा कि 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान तनाव के बाद होर्मुज से तेल की आपूर्ति बाधित है और हमारे पास पर्याप्त स्टॉक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय केवल ‘ताम-झाम’ चलता रहा और प्रधानमंत्री ने आर्थिक स्थिति में संभावित गिरावट पर चुप्पी साधे रखी, ताकि मतदान पर कोई असर न पड़े।
पीएम की सिक्योरिटी और कटौती के दावों पर कटाक्ष
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री द्वारा सुरक्षा और काफिले में की गई कटौती की बात पर भी सवाल उठाए। सिब्बल ने कहा कि यदि चुनाव परिणाम आने के बाद दो गाड़ियां कम करने से बचत होती है, तो इसका मतलब है कि उनकी जरूरत पहले भी नहीं थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा पूरी तरह से होनी चाहिए क्योंकि वह देश के पीएम हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर फिजूलखर्ची और फिर अचानक कटौती करना केवल दिखावा है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि सरकार बयान तो बड़े देती है, लेकिन देश के भविष्य और सुरक्षा तंत्र पर गंभीरता से विचार नहीं करती।
आरएसएस और पाकिस्तान पर बयान
आरएसएस नेता दत्तात्रेय होसबोले द्वारा पाकिस्तान से बातचीत जारी रखने के सुझाव पर सिब्बल ने तंज कसते हुए कहा कि अब उन्हें भी सच बोलने की छूट मिल गई है। उन्होंने कहा, “अगर मैंने पाकिस्तान से बात करने की सलाह दी होती, तो मुझे एंटी-नेशनल या प्रो-पाकिस्तानी घोषित कर दिया जाता और कहा जाता कि पाकिस्तान चले जाओ।” सिब्बल ने कहा कि चूंकि होसबोले साहब आरएसएस में नंबर दो की हैसियत रखते हैं और सरकार उन्हीं के इशारों पर चलती है, इसलिए अब उनकी बात ‘सही’ मानी जाएगी। उन्होंने व्यंग्य किया कि अब विपक्ष भी शांति की बात कर सकता है क्योंकि आरएसएस से उन्हें यह ‘अनुमति’ मिल गई है।










