Kannauj News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और Gen-Z के प्रदर्शन के बाद अब देश के अलग-अलग हिस्सों से विद्यार्थियों के विरोध की खबरें सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां छोटे बच्चों ने अपने स्कूल के इंचार्ज प्रधानाध्यापक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। बच्चों ने स्कूल परिसर में नारेबाजी करते हुए प्रधानाध्यापक के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।
कंपोजिट विद्यालय गुगरापुर में बच्चों का विरोध
मामला कन्नौज के कंपोजिट विद्यालय गुगरापुर का बताया जा रहा है। यहां पढ़ने वाले बच्चों ने कथित तौर पर इंचार्ज प्रधानाध्यापक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बच्चों ने स्कूल का बहिष्कार किया और परिसर के बाहर एकजुट होकर नारे लगाए। विरोध के दौरान कई बच्चे अपने परिजनों के साथ भी मौजूद रहे। मामले की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी इसकी चर्चा तेज हो गई।
बच्चों ने किया स्कूल का बहिष्कार
विरोध प्रदर्शन के दौरान स्कूली बच्चों और उनके परिजनों ने स्कूल का बहिष्कार करने का फैसला किया। आक्रोशित लोगों ने प्रधानाध्यापक की गाड़ी का घेराव भी किया। प्रदर्शन में शामिल बच्चों और उनके परिवारों ने प्रधानाध्यापक की कार्यशैली को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि स्कूल में बच्चों के साथ कथित तौर पर भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जाता है और उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जाता।
प्रधानाध्यापक पर अभद्रता के आरोप
बच्चों और उनके परिजनों ने इंचार्ज प्रधानाध्यापक पर विद्यार्थियों के साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, बच्चों को स्कूल में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आरोपों में बच्चों के साथ कथित मारपीट और अनुचित व्यवहार की बातें भी शामिल हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
हरे पेड़ कटवाने का भी आरोप
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने प्रधानाध्यापक पर स्कूल परिसर में लगे हरे पेड़ों को कटवाने का आरोप भी लगाया। बच्चों और अभिभावकों का कहना है कि स्कूल परिसर में मौजूद पेड़ों को हटाए जाने से उन्हें भी परेशानी हुई। इस मुद्दे को लेकर भी प्रदर्शनकारियों में नाराजगी दिखाई दी। उनका आरोप है कि स्कूल के वातावरण और सुविधाओं से जुड़े मामलों में उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
शिक्षकों में भी नाराजगी की बात
इस पूरे विवाद में केवल विद्यार्थी और अभिभावक ही नहीं, बल्कि स्कूल के कुछ शिक्षकों के भी प्रधानाध्यापक के खिलाफ होने का दावा किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, स्कूल के अंदर प्रधानाध्यापक की कार्यशैली को लेकर पहले से असंतोष था। हालांकि, शिक्षकों की ओर से लगाए गए आरोपों और उनकी संख्या को लेकर आधिकारिक स्थिति अभी सामने नहीं आई है।
जातिवाद को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप
प्रदर्शन कर रहे बच्चों और उनके परिजनों ने प्रधानाध्यापक पर स्कूल में जातिवाद को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि विद्यार्थियों के साथ समान व्यवहार नहीं किया जाता। इसके अलावा प्रधानाध्यापक पर बच्चों के साथ मारपीट करने के भी आरोप लगाए गए। ये आरोप बेहद गंभीर हैं, इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किया जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्कूल में पढ़ते हैं करीब 200 बच्चे
जानकारी के मुताबिक, गुगरापुर के कंपोजिट विद्यालय में करीब 200 बच्चे पढ़ते हैं। ऐसे में प्रधानाध्यापक के खिलाफ सामने आए आरोपों ने स्कूल की व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदर्शन में शामिल बच्चों ने पुलिस की मौजूदगी में भी अपनी शिकायतें और आरोप अधिकारियों के सामने रखे। बच्चों ने कथित दुर्व्यवहार और भेदभाव से जुड़ी अपनी बात विस्तार से बताई।
पुलिस की मौजूदगी में बच्चों ने रखी बात
प्रधानाध्यापक के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस की मौजूदगी भी रही। बच्चों और उनके परिजनों ने पुलिस के सामने प्रधानाध्यापक पर कई तरह के आरोप लगाए। अब पूरे मामले में शिकायतों की जांच और आरोपों की सत्यता सामने आना बाकी है। प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और स्कूल में वास्तव में किन परिस्थितियों में विवाद पैदा हुआ।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
कन्नौज के इस स्कूल विवाद ने बच्चों की सुरक्षा, स्कूल प्रशासन के व्यवहार और विद्यार्थियों के साथ समानता के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। फिलहाल बच्चों और अभिभावकों के आरोपों के आधार पर स्थिति सामने आई है। संबंधित अधिकारियों की जांच के बाद ही कार्रवाई को लेकर तस्वीर साफ होगी। इस घटना ने यह भी सवाल खड़ा किया है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की शिकायतों और उनकी सुरक्षा से जुड़े मामलों की निगरानी कितनी प्रभावी है।
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