Kamal Death Case: दिल्ली के जनकपुरी इलाके में एक दर्दनाक हादसे ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि राजधानी की व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क पर बने एक गहरे गड्ढे में गिरने से निजी बैंक में कार्यरत युवक कमल की मौत हो गई। यह गड्ढा दिल्ली जल बोर्ड द्वारा खुदवाया गया था, लेकिन सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए थे। अब इस घटना पर सियासी प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।
राहुल गांधी का तीखा हमला
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस हादसे को लेकर दिल्ली सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा “हिंदुस्तान में फैली लालच और लापरवाही की महामारी आज फिर एक युवा की जान ले गई। एक बेटा, एक सपना, मां-बाप की पूरी दुनिया सब कुछ एक झटके में उजाड़ दिया गया। यह हादसा नहीं, हत्या है, और हत्यारी है जवाबदेही से भागती सत्ता। असली कातिल सड़क नहीं, गैरजिम्मेदार सत्ता है। क्योंकि यहां न इस्तीफा होता है, न सजा मिलती है, न किसी की अंतरात्मा जागती है। इंदौर का जहरीला पानी, नोएडा में युवराज की जान लेने वाली सड़क, गिरते पुल, टकराती ट्रेनें, दम घोंटता प्रदूषण… कोई जवाबदेही नहीं है, और जब तक जवाबदेही नहीं होगी, तब तक कोई न कोई लालच की महामारी का अगला शिकार बनता रहेगा।”
भारत सरकार के जल शक्ति और पर्यटन मंत्रालय द्वारा दिया गया है यह अवार्ड
“असली कातिल सड़क नहीं, सत्ता है” – राहुल गांधी
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में कहा कि असली दोष सड़क या गड्ढा नहीं, बल्कि वह सत्ता है जो जिम्मेदारी लेने से बचती है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे मामलों में न कोई इस्तीफा देता है, न किसी को सजा मिलती है और न ही किसी की अंतरात्मा जागती है। उन्होंने इंदौर में जहरीले पानी, नोएडा में सड़क हादसों, गिरते पुलों, ट्रेन दुर्घटनाओं और बढ़ते प्रदूषण का जिक्र करते हुए कहा कि हर जगह एक ही समस्या है, जवाबदेही का अभाव। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक कोई न कोई नागरिक इस लापरवाही का शिकार बनता रहेगा।
क्या है पूरा मामला
मृतक कमल गुरुवार रात करीब 10 बजे बाइक से अपने घर लौट रहा था। वह रोहिणी स्थित एक निजी बैंक की शाखा में काम करता था। जनकपुरी के पास सड़क पर बने एक गहरे और खुले गड्ढे में उसकी बाइक गिर गई, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। परिवार का कहना है कि अगर सड़क पर उचित बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत या रोशनी की व्यवस्था होती, तो यह हादसा टाला जा सकता था। उनका आरोप है कि प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण एक होनहार युवक की जान चली गई।
परिवार का आरोप
कमल के भाई ने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने सिर्फ आखिरी लोकेशन बताई, लेकिन मौके पर खोजबीन में कोई मदद नहीं की। परिवार खुद अपने स्तर पर कमल को ढूंढता रहा, लेकिन समय रहते उसे नहीं बचाया जा सका। भाई ने यह भी कहा कि कमल कोई लापरवाह व्यक्ति नहीं था और न ही वह जानबूझकर गड्ढे में बाइक गिरा सकता था। यह पूरी तरह प्रशासनिक लापरवाही का मामला है।
सिस्टम पर उठते सवाल
इस घटना ने एक बार फिर शहरी बुनियादी ढांचे, प्रशासनिक जवाबदेही और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि क्या इस मामले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या यह भी अन्य हादसों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।










