Ekadashi October 2026: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का अत्यंत खास और पवित्र स्थान है। हर माह में दो बार एकादशी तिथि आती है—एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। साल 2026 के अक्टूबर महीने में भी दो प्रमुख एकादशी व्रत पड़ने जा रहे हैं। महीने की शुरुआत में आश्विन कृष्ण पक्ष की इंदिरा एकादशी और महीने के उत्तरार्ध में आश्विन शुक्ल पक्ष की पापांकुशा एकादशी आएगी। इन दोनों ही व्रतों का अपना-अपना विशेष धार्मिक महत्व है, जो भगवान विष्णु की कृपा के साथ-साथ जीवन के कष्टों को दूर करने वाला माना गया है।
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1. इंदिरा एकादशी तिथि, मुहूर्त और महत्व

पंचांग की गणना के अनुसार, अक्टूबर 2026 की पहली एकादशी यानी इंदिरा एकादशी 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार के दिन रखी जाएगी।
शुभ मुहूर्त: पंचांग के मुताबिक, इंदिरा एकादशी तिथि की शुरुआत 6 अक्टूबर को रात 2:07 बजे से होगी और इसका समापन 7 अक्टूबर को रात 12:34 बजे होगा। उदया तिथि और व्रत के नियमों के अनुसार 6 अक्टूबर को यह व्रत रखा जाएगा।
विशेष महत्व: इंदिरा एकादशी का सीधा संबंध पितरों की शांति, उद्धार और मोक्ष की कामना से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा की जाए और अपने पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान व दान-पुण्य किया जाए, तो पितरों को बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। यह व्रत पितृ पक्ष के समय के आसपास पड़ने के कारण और भी अधिक फलदायी माना जाता है।
2. पापांकुशा एकादशी तिथि, मुहूर्त और महत्व
अक्टूबर माह की दूसरी महत्वपूर्ण एकादशी पापांकुशा एकादशी होगी। यह व्रत 22 अक्टूबर 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा।
शुभ मुहूर्त: पंचांग के अनुसार, पापांकुशा एकादशी तिथि 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 बजे आरंभ होगी और इसका समापन अगले दिन 22 अक्टूबर को दोपहर 2:47 बजे होगा।
विशेष महत्व: पापांकुशा एकादशी आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में आती है। इस व्रत को भगवान विष्णु की असीम कृपा, सांसारिक पापों से मुक्ति, आत्मशुद्धि और संयम का प्रतीक माना गया है। इस दिन जो सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना करते हैं, उन्हें जाने-अनजाने किए गए पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
एकादशी व्रत पर करने योग्य कार्य और विशेष नियम

एकादशी के दिन व्रत रखने वाले भक्तों को कुछ खास नियमों का पालन करना चाहिए ताकि व्रत का पूर्ण पुण्य फल प्राप्त हो सके:
पूजा-आराधना: इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें। भगवान को पीले वस्त्र, पीले फूल, मौसमी फल और विशेष रूप से ‘तुलसी दल’ अर्पित करें, क्योंकि तुलसी के बिना विष्णु जी की पूजा अधूरी मानी जाती है।
मंत्र जाप और पाठ: इस पवित्र दिन पर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का निरंतर जाप करें। इसके अलावा, श्री विष्णु सहस्रनाम या भगवान विष्णु से जुड़े अन्य धार्मिक स्तोत्रों का पाठ करना अत्यंत लाभकारी होता है।
दान-पुण्य: अपनी आर्थिक क्षमता और सामर्थ्य के अनुसार इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी सामग्री का दान अवश्य करना चाहिए।
व्रत के जरूरी नियम: एकादशी के व्रत में चावल, गेहूं और किसी भी प्रकार के अन्न का सेवन वर्जित माना जाता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार फलाहार या सात्विक आहार लेते हैं। इस दौरान मन में सात्विक विचार रखें, किसी के प्रति द्वेष न रखें और पूरी तरह संयम व अनुशासन का पालन करें।
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