Kailash Mansarovar Yatra 2026: कैलाश मानसरोवर यात्रा हुई महंगी, जानें अब कितनी ढीली होगी जेब?

अगर आप इस साल कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने की योजना बना रहे हैं, तो यह यात्रा अब पहले से महंगी हो गई है। डॉलर की बढ़ती कीमत और सुविधाओं के खर्च में बदलाव के कारण श्रद्धालुओं को करीब 20% ज्यादा भुगतान करना होगा।

Kailash Mansarovar Yatra 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 6, 2026

Kailash Mansarovar Yatra 2026: इस साल कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को पिछले वर्ष की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ेगा। अधिकारियों के अनुसार, अब प्रति यात्री कुल खर्च 2.09 लाख रुपये हो गया है, जबकि पिछले साल यह 1.74 लाख रुपये था। यानी लगभग 20% की बढ़ोतरी हुई है।

इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह डॉलर की कीमतों में उछाल है। विदेश मंत्रालय द्वारा तिब्बत क्षेत्र के लिए लिया जाने वाला शुल्क डॉलर में चुकाया जाता है, जिसमें वीजा, मेडिकल चेकअप और अन्य जरूरी खर्च शामिल होते हैं। डॉलर महंगा होने से चीन (तिब्बत) वाले हिस्से का खर्च सीधे बढ़ गया है। इसके अलावा भारतीय क्षेत्र में भी महंगाई और सुविधाओं के विस्तार के कारण दरों में बदलाव किया गया है।

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कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) का शुल्क

भारतीय क्षेत्र में यात्रियों के ठहरने, खाने-पीने और गाइड की सुविधा देने की जिम्मेदारी कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) संभालता है। निगम ने इस बार अपने शुल्कों में करीब 8,000 रुपये की बढ़ोतरी की है। अब भारतीय क्षेत्र में प्रति यात्री शुल्क 65,000 रुपये तय किया गया है। निगम के महाप्रबंधक विजय नाथ शुक्ला ने पुष्टि की है कि नए रेट फाइनल कर दिए गए हैं और यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन भी शुरू हो चुके हैं।

यात्रा की शुरुआत और व्यवस्था

इस साल कैलाश मानसरोवर यात्रा 4 जुलाई 2026 से शुरू होगी। योजना के अनुसार, कुल 10 जत्थे भेजे जाएंगे और हर जत्थे में 50 तीर्थयात्री शामिल होंगे। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद यह यात्रा बंद कर दी गई थी। 1981 में इसे दोबारा शुरू किया गया। कोविड महामारी के दौरान यात्रा फिर से बाधित हुई, लेकिन 2025 में इसे बहाल किया गया।

धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील का विशेष महत्व है। माना जाता है कि कैलाश पर्वत भगवान शिव का निवास स्थान है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि पर्वत की परिक्रमा और मानसरोवर झील में स्नान करने से जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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