UP Election 2027: पासी-रैदास से लेकर नए वोटर बेस तक, क्या है पूरा चुनावी गणित?

बालामऊ विधानसभा सीट 2027 में पासी और रैदास मतदाताओं के साथ नए वोटर बेस को लेकर चर्चा में है। आरक्षित सीट पर जातीय समीकरण, प्रत्याशी की पहचान, स्थानीय मुद्दे और पिछले चुनावों के रुझान अहम भूमिका निभा सकते हैं। जानिए बालामऊ के सामाजिक समीकरण, प्रमुख मतदाता समूह और 2027 के संभावित चुनावी मुद्दों का पूरा गणित।

UP Election 2027

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

सितम्बर 17, 2026

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ सूबे की सियासत में हलचल तेज होने लगी है। देश के सबसे बड़े राजनीतिक राज्य में चुनाव सिर्फ सीटों की गिनती का खेल नहीं रहा, बल्कि जातीय समीकरण, सामाजिक गोलबंदी, क्षेत्रीय प्रभाव और बदलते वोटिंग पैटर्न इसकी दिशा तय करते रहे हैं। नब्बे के दशक के मंडल-कमंडल से लेकर आज की चुनावी राजनीति तक उत्तर प्रदेश में पारंपरिक वोटबैंकों के साथ नए सामाजिक समीकरणों ने भी अपनी जगह बनाई है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हर सीट के स्थानीय समीकरण, पिछले चुनावों के आंकड़े और मतदाताओं के बदलते रुझान को समझना सियासी तस्वीर को पढ़ने के लिए अहम हो जाता है।

बालामऊ में BJP का लगातार दो बार कब्जा

बताते चले कि, हरदोई जिले की बालामऊ विधानसभा सीट नंबर 160 उत्तर प्रदेश की उन आरक्षित सीटों में है, जहां जातीय सामाजिक संरचना, प्रत्याशी की पहचान और स्थानीय मुद्दे चुनावी गणित को प्रभावित करते हैं। सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और यह मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। मौजूदा विधायक भाजपा के रामपाल वर्मा हैं, जिन्होंने 2017 और 2022 में लगातार जीत दर्ज की। 2022 में उन्होंने 26,244 वोट के अंतर से चुनाव जीता था।

बालामऊ में जातीय समीकरण

2027 की ओर बढ़ते हुए बालामऊ में सबसे अधिक चर्चा पासी और रैदास मतदाताओं की होती है। पुराने संकेतात्मक चुनावी आकलनों में पासी मतदाताओं की संख्या करीब 81 हजार और रैदास की करीब 60 हजार बताई गई थी। इनके अलावा मुस्लिम, क्षत्रिय, ब्राह्मण, यादव, धोबी, पाल और दूसरे OBC-SC समूह भी सीट के सामाजिक समीकरण का हिस्सा हैं।

हालांकि, एक जरूरी सावधानी यह है कि ये वर्तमान आधिकारिक जाति-वार मतदाता आंकड़े नहीं हैं। निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची में आम तौर पर मतदाताओं की जाति के आधार पर मौजूदा संख्या प्रकाशित नहीं होती। इसलिए इन आंकड़ों को राजनीतिक विश्लेषण के पुराने संकेत के रूप में देखना चाहिए, न कि 2027 के निश्चित वोट बैंक के रूप में।

बालामऊ विधानसभा: एक नजर में पूरा चुनावी प्रोफाइल

विवरणजानकारी
विधानसभाबालामऊ
विधानसभा संख्या160
जिलाहरदोई
आरक्षणअनुसूचित जाति
लोकसभा क्षेत्रमिश्रिख (SC)
मौजूदा विधायकरामपाल वर्मा
मौजूदा विधायक की पार्टीभाजपा
2022 में BJP वोट81,994
2022 में BJP जीत का अंतर26,244
2022 में कुल निर्वाचक3,47,218
2026 अंतिम मतदाता3,10,685
SIR से पहले प्रकाशित आधार3,58,970
SIR के बाद कमी48,285
2024 लोकसभा में BJP बढ़त6,979 वोट

2026 की अंतिम मतदाता सूची में बालामऊ में 3,10,685 मतदाता दर्ज हैं। इससे पहले प्रकाशित आधार 3,58,970 था। इस तरह 48,285 मतदाताओं की कमी दर्ज हुई। हरदोई की अंतिम SIR सूची में बालामऊ के पुरुष मतदाता 1,70,501, महिला मतदाता 1,40,184 और तृतीय लिंग मतदाता शून्य दर्ज किए गए हैं।

2026 की वोटर लिस्ट ने बदला बालामऊ का चुनावी गणित

2027 चुनाव से पहले बालामऊ के आंकड़ों में सबसे बड़ा बदलाव मतदाता सूची में दिखाई देता है।

SIR से पहले बालामऊ विधानसभा में 3,58,970 मतदाता थे। अंतिम 2026 सूची में यह संख्या घटकर 3,10,685 रह गई। यानी कुल 48,285 मतदाताओं की कमी हुई, जो लगभग 13.45 प्रतिशत बैठती है।

बालामऊ वोटर बेससंख्या
SIR से पहले3,58,970
2026 अंतिम सूची3,10,685
कुल कमी48,285
अनुमानित प्रतिशत कमी13.45%
2022 विधानसभा निर्वाचक3,47,218

यह बदलाव चुनावी विश्लेषण के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2022 के बूथ और मतदाता आधार को 2027 में हूबहू लागू नहीं किया जा सकता। हालांकि, यह भी जरूरी है कि मतदाताओं की कुल संख्या में कमी को किसी खास जाति या समुदाय की कमी मान लेना उचित नहीं होगा। उपलब्ध आंकड़े कुल मतदाता सूची से जुड़े हैं, जाति-वार कटौती से नहीं।

बालामऊ का पुराना जातीय समीकरण: पासी सबसे बड़ा अनुमानित समूह

पुराने संकेतात्मक विधानसभा-स्तरीय आकलन में पासी मतदाता करीब 81 हजार बताए गए थे। इसके बाद रैदास मतदाताओं का अनुमान करीब 60 हजार था। इसके अलावा मुस्लिम करीब 29 हजार, क्षत्रिय करीब 27 हजार, ब्राह्मण करीब 20 हजार, यादव करीब 19 हजार, धोबी करीब 10 हजार और पाल करीब 8 हजार बताए गए थे।

पासी वोट और रामपाल वर्मा का स्थानीय राजनीतिक आधार

बालामऊ के मौजूदा विधायक रामपाल वर्मा की सामाजिक पहचान अनुसूचित जाति-पासी के रूप में दर्ज है। 2017 और 2022 में उन्होंने BJP के टिकट पर लगातार जीत दर्ज की। 2017 में उन्हें 74,917 वोट मिले थे, जबकि 2022 में उनका वोट बढ़कर 81,994 हो गया।

यह आंकड़ा यह बताता है कि रामपाल वर्मा का चुनावी समर्थन केवल किसी एक समुदाय के पुराने अनुमान से नहीं समझा जा सकता। विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार को अलग-अलग सामाजिक समूहों और स्थानीय मतदाताओं से वोट मिलते हैं।

इसलिए 2027 के विश्लेषण में पासी मतदाता महत्वपूर्ण जरूर हैं, लेकिन उन्हें सीधे BJP के निश्चित वोट के रूप में देखना उचित नहीं होगा।

रैदास वोट: SC आरक्षित सीट पर दूसरा बड़ा सामाजिक समीकरण

पुराने अनुमान में रैदास मतदाताओं की संख्या करीब 60 हजार बताई गई थी। यदि इस अनुमान को चुनावी संदर्भ में देखा जाए तो अनुसूचित जाति के भीतर सामाजिक समर्थन का वितरण बालामऊ के नतीजों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

2017 में BSP की नीलू सत्यार्थी को 52,029 वोट मिले थे। 2022 में BSP के तिलक चंद्र को 42,551 वोट मिले।

इससे इतना जरूर स्पष्ट होता है कि BSP का वोट आधार 2022 में भी महत्वपूर्ण था, भले ही पार्टी BJP और SP से पीछे रही।

2012 से 2022 तक बालामऊ विधानसभा का चुनावी इतिहास

2012: सिर्फ 173 वोट से SP ने जीती थी सीट

बालामऊ के मौजूदा विधानसभा स्वरूप में 2012 का चुनाव बेहद करीबी रहा था। SP के अनिल वर्मा को 67,800 वोट मिले, जबकि BSP के रामपाल वर्मा को 67,627 वोट मिले।

दोनों के बीच अंतर सिर्फ 173 वोट था। SP ने करीब 38.24 प्रतिशत और BSP ने करीब 38.14 प्रतिशत वोट हासिल किए।

बालामऊ विधानसभा चुनाव 2012

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
अनिल वर्माSP67,80038.24%
रामपाल वर्माBSP67,62738.14%
सुरेंद्र कुमारNCP13,7207.74%
राम आश्रय प्रसादकांग्रेस12,0766.81%
राज किशोर वर्माBJP2,7251.54%

जीत का अंतर: 173 वोट

2017: BJP के रामपाल वर्मा ने बदला राजनीतिक समीकरण

2017 में बालामऊ में तस्वीर बदल गई। BJP के रामपाल वर्मा ने 74,917 वोट हासिल किए और BSP की नीलू सत्यार्थी को 52,029 वोट मिले। SP की सुशीला सरोज 43,507 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।

BJP ने 22,888 वोट के अंतर से चुनाव जीता।

बालामऊ विधानसभा चुनाव 2017

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
रामपाल वर्माBJP74,91740.28%
नीलू सत्यार्थीBSP52,02927.97%
सुशीला सरोजSP43,50723.39%
सुरेंद्र कुमारJAM7,7344.16%
NOTA2,0051.08%

BJP की जीत का अंतर: 22,888 वोट।

2022: BJP ने जीत का अंतर और बढ़ाया

2022 में रामपाल वर्मा ने BJP के टिकट पर दूसरी लगातार जीत दर्ज की। उन्हें 81,994 वोट मिले, जबकि SP के रामबली वर्मा को 55,750 और BSP के तिलक चंद्र को 42,551 वोट मिले।

BJP की जीत का अंतर बढ़कर 26,244 वोट हो गया।

बालामऊ विधानसभा चुनाव 2022

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
रामपाल वर्माBJP81,99442.84%
रामबली वर्माSP55,75029.13%
तिलक चंद्रBSP42,55122.23%
सुरेंद्र कुमारकांग्रेस4,1122.15%
NOTA2,0471.07%
पीयूष प्रेमीAAP1,5840.83%

BJP की जीत: 26,244 वोट।

तीन चुनावों में बालामऊ की तस्वीर

चुनाव वर्षविजेतापार्टीविजेता वोटजीत का अंतर
2012अनिल वर्माSP67,800173
2017रामपाल वर्माBJP74,91722,888
2022रामपाल वर्माBJP81,99426,244

यह तालिका बालामऊ में 2012 के बेहद करीबी मुकाबले से 2017 और 2022 में BJP की अपेक्षाकृत बड़ी बढ़त तक का बदलाव दिखाती है।

2017 से 2022 के बीच BJP, SP और BSP का वोट बदलाव

पार्टी2017 वोट2022 वोटबदलाव
BJP74,91781,994+7,077
SP43,50755,750+12,243
BSP52,02942,551-9,478

यह बदलाव 2027 के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि BJP और SP दोनों के वोट बढ़े, जबकि BSP का वोट घटा।

2024 लोकसभा चुनाव: बालामऊ में BJP और SP के बीच घटा अंतर

  • मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र के बालामऊ विधानसभा खंड में 2024 के लोकसभा चुनाव में BJP के अशोक कुमार रावत को 86,408 वोट मिले।
  • SP की संगीता राजवंशी को 79,429 वोट मिले।
  • BSP के बीआर अहिरवार को 19,660 वोट मिले।
  • इस तरह BJP और SP के बीच अंतर 6,979 वोट रहा।

बालामऊ विधानसभा खंड में 2024 लोकसभा परिणाम

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
अशोक कुमार रावतBJP86,40845.37%
संगीता राजवंशीSP79,42941.70%
बीआर अहिरवारBSP19,66010.32%
BJP की बढ़त6,9793.67 प्रतिशत अंक

यहां सावधानी जरूरी है: लोकसभा और विधानसभा चुनावों के उम्मीदवार, मुद्दे और मतदान व्यवहार अलग हो सकते हैं। इसलिए 2024 के आंकड़ों को 2027 विधानसभा चुनाव का सीधा अनुमान नहीं माना जा सकता। फिर भी यह बालामऊ के हालिया राजनीतिक रुझान को समझने के लिए उपयोगी संदर्भ है।

2019 बनाम 2024: लोकसभा में भी बदला बालामऊ का अंतर

BJP की बढ़त 12,679 से घटकर 6,979 हुई

2019 के लोकसभा चुनाव में बालामऊ विधानसभा खंड में BJP को 95,463 वोट और BSP को 82,784 वोट मिले थे। BJP की बढ़त 12,679 वोट थी।

2024 में BJP को 86,408 और SP को 79,429 वोट मिले। अंतर घटकर 6,979 रह गया।

लोकसभा चुनावBJP वोटमुख्य विपक्षविपक्षी वोटBJP की बढ़त
201995,463BSP82,78412,679
202486,408SP79,4296,979

2027 में BJP के सामने क्या सामाजिक समीकरण होंगे?

2027 के लिए BJP का संभावित सामाजिक गणित केवल पासी वोट तक सीमित नहीं देखा जा सकता।पार्टी के सामने पुराने अनुमानित पासी आधार के साथ रैदास और दूसरे SC समूहों, ब्राह्मण-क्षत्रिय सवर्ण मतदाताओं तथा गैर-यादव OBC मतदाताओं का समर्थन बनाए रखने का सवाल रहेगा।रामपाल वर्मा की लगातार दो विधानसभा जीत उनके स्थानीय राजनीतिक आधार को महत्वपूर्ण बनाती है, लेकिन 2027 में उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दे और मतदाताओं की नई सूची भी भूमिका निभाएगी।

SP के सामने दलित विस्तार की चुनौती

SP के लिए 2027 का समीकरण भी बहुस्तरीय होगा। पुराने अनुमान में यादव करीब 19 हजार और मुस्लिम करीब 29 हजार बताए गए थे। इन दोनों समूहों के साथ यदि SP दलित और गैर-यादव OBC मतदाताओं का बड़ा हिस्सा जोड़ पाती है, तभी 2022 की तुलना में अपने आधार को और विस्तार देने की स्थिति बन सकती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में बालामऊ खंड में SP को 79,429 वोट मिले थे। यह आंकड़ा 2022 विधानसभा चुनाव के 55,750 वोट से अधिक है, लेकिन दोनों चुनावों की प्रकृति अलग होने के कारण इसे सीधे विधानसभा वोट में बदलना उचित नहीं होगा।

बालामऊ में स्थानीय मुद्दे भी बदल सकते हैं चुनावी तस्वीर

रेलवे, सड़क, स्वास्थ्य, पशुपालन और कृषि के सवाल

बालामऊ की राजनीति सिर्फ जातीय समीकरण तक सीमित नहीं है। ग्रामीण इलाकों में सड़क, बिजली, सिंचाई, खाद-बीज, छुट्टा पशु, स्वास्थ्य सुविधाएं और बाजार तक पहुंच जैसे मुद्दे भी मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। बालामऊ जंक्शन और रेलवे सुविधाओं को लेकर भी स्थानीय स्तर पर मांगें सामने आती रही हैं। स्टेशन पर दिव्यांग यात्रियों की सुविधा, पेयजल और निर्माण कार्यों से जुड़े सवाल भी उठाए गए हैं।इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति और पशु चिकित्सालय जैसी सुविधाएं कृषि-पशुपालन आधारित परिवारों के लिए सीधे महत्व रखती हैं।इन मुद्दों पर मतदाताओं की प्रतिक्रिया किसी भी दल के जातीय गणित को प्रभावित कर सकती है।

किसान वोट और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सवाल

जातीय पहचान के साथ आर्थिक मुद्दे भी रहेंगे महत्वपूर्ण

बालामऊ का बड़ा हिस्सा ग्रामीण है। ऐसे में किसानों और पशुपालकों से जुड़े मुद्दे चुनावी चर्चा में बने रह सकते हैं।

प्रमुख सवालों में—

  • सिंचाई की सुविधा
  • बिजली आपूर्ति
  • खाद और बीज की उपलब्धता
  • फसल की लागत
  • बाजार तक पहुंच
  • छुट्टा पशुओं की समस्या
  • ग्रामीण सड़कें
  • पशु चिकित्सा
  • सरकारी योजनाओं का लाभ

शामिल हो सकते हैं।

जातीय पहचान और आर्थिक मुद्दे एक-दूसरे के समानांतर काम कर सकते हैं। इसलिए केवल जातीय संख्या देखकर चुनावी परिणाम का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

2027 से पहले बालामऊ की पांच बड़ी चुनावी चुनौतियां

मुद्दा2027 में महत्व
पासी वोटसबसे बड़ा पुराना संकेतात्मक सामाजिक आधार
रैदास वोटबड़ा SC समूह और सामाजिक ध्रुवीकरण की संभावना
2026 नई मतदाता सूचीकुल वोटर बेस में 48,285 की कमी
BSP का प्रदर्शनदलित वोट के बंटवारे पर असर
स्थानीय मुद्देरेलवे, स्वास्थ्य, कृषि, सड़क और पशुपालन

बालामऊ का 2027 चुनावी गणित: आंकड़े क्या कहते हैं?

बालामऊ के पिछले चुनावों को एक साथ देखने पर तस्वीर में कई स्तर दिखाई देते हैं।

2012: SP ने सिर्फ 173 वोट से जीत दर्ज की।

2017: BJP ने रामपाल वर्मा के साथ 22,888 वोट की बढ़त बनाई।

2022: BJP की जीत का अंतर बढ़कर 26,244 वोट हुआ।

2024: लोकसभा चुनाव में बालामऊ विधानसभा खंड में BJP की बढ़त घटकर 6,979 वोट रह गई।

2026: अंतिम मतदाता सूची में कुल मतदाता 3,10,685 रह गए, जो SIR से पहले के प्रकाशित 3,58,970 के मुकाबले 48,285 कम हैं।

बालामऊ चुनावी ट्रेंड एक नजर में

वर्षचुनावBJPSPBSPप्रमुख तथ्य
2012विधानसभा2,72567,80067,627SP की जीत सिर्फ 173 वोट से
2017विधानसभा74,91743,50752,029BJP की जीत 22,888 से
2022विधानसभा81,99455,75042,551BJP की जीत 26,244 से
2024लोकसभा खंड86,40879,42919,660BJP की बढ़त 6,979

बालामऊ में जातीय गणित के साथ नया वोटर बेस भी अहम

आपको बता दे कि, बालामऊ विधानसभा का 2027 चुनावी विश्लेषण केवल पासी, रैदास, मुस्लिम या यादव वोट की संख्या से पूरा नहीं होता। पुराने संकेतात्मक आंकड़ों में पासी और रैदास बड़े सामाजिक समूह दिखाई देते हैं। 2012 में 173 वोट की करीबी जीत यह बताती है कि सीट पर छोटे-छोटे वोट समूह भी परिणाम में भूमिका निभा सकते हैं। 2017 और 2022 में BJP ने रामपाल वर्मा के नेतृत्व में लगातार दो जीत दर्ज कीं और 2022 में अंतर 26,244 वोट तक पहुंचा।

वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में BJP और SP के बीच बालामऊ विधानसभा खंड का अंतर घटकर 6,979 वोट रहा। यह विधानसभा चुनाव का सीधा पूर्वानुमान नहीं है, लेकिन हालिया राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को समझने के लिए महत्वपूर्ण आंकड़ा है।

इसके साथ 2026 की नई मतदाता सूची ने बालामऊ का कुल वोटर बेस भी बदल दिया है। 3,58,970 से घटकर 3,10,685 मतदाता रहना यानी 48,285 की कमी, 2027 के बूथ स्तर के चुनावी विश्लेषण को नए सिरे से करने की जरूरत दिखाती है।

इसलिए 2027 में बालामऊ की चुनावी तस्वीर को समझने के लिए पांच चीजों पर नजर रखना जरूरी होगा—पासी वोट का रुझान, रैदास और अन्य SC समूहों का बंटवारा, मुस्लिम-यादव वोट का रुख, BSP का प्रदर्शन और 2026 की नई मतदाता सूची के बाद बदला बूथवार गणित।