
Health Tips: बच्चों का चिप्स, बिस्कुट, कुकीज, फ्रेंच फ्राइज और बर्गर जैसे खाद्य पदार्थों की तरफ आकर्षित होना आम बात है। कई माता-पिता भी कभी-कभार इन चीजों को बच्चों के स्नैक्स का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन एक नई रिसर्च ने अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अध्ययन के मुताबिक, इस तरह के खाद्य पदार्थों के प्रति बच्चों के दिमाग की प्रतिक्रिया और आगे चलकर उनके शरीर में बढ़ने वाली चर्बी के बीच संबंध देखा गया है। यानी जंक फूड का असर केवल वजन तक सीमित नहीं हो सकता।
नई स्टडी में 46 बच्चों पर किया गया अध्ययन
इस महीने JAMA Network Open में प्रकाशित रिपोर्ट में 46 ऐसे बच्चों को शामिल किया गया, जिनका वजन अध्ययन की शुरुआत में सामान्य और स्वस्थ श्रेणी में था। शोधकर्ताओं ने बच्चों की रोजाना की डाइट में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की मात्रा और खाने से जुड़ी तस्वीरें देखने पर उनके दिमाग की प्रतिक्रिया का अध्ययन किया। इसमें कुकीज और फ्रेंच फ्राइज जैसे स्वादिष्ट खाद्य पदार्थों की तस्वीरें दिखाई गईं। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन बच्चों की डाइट में प्रोसेस्ड फूड की मात्रा अधिक थी, उनके दिमाग के कुछ हिस्सों में ज्यादा सक्रियता नजर आई।
खाने की तस्वीरें देखकर ज्यादा सक्रिय हुआ रिवॉर्ड सिस्टम
रिसर्च में सामने आया कि अधिक अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाने वाले बच्चों में दिमाग का रिवॉर्ड, मोटिवेशन और आदतों से जुड़ा हिस्सा खाने की तस्वीरें देखकर ज्यादा सक्रिय हुआ। दिमाग का रिवॉर्ड सिस्टम किसी पसंदीदा चीज से मिलने वाले आनंद और उसे दोबारा पाने की इच्छा से जुड़ा होता है। ऐसे में शोधकर्ताओं ने इस प्रतिक्रिया को बच्चों के खानपान और वजन में बदलाव के बीच एक संभावित कड़ी के रूप में देखा। हालांकि, केवल इस प्रतिक्रिया के आधार पर किसी बच्चे के व्यवहार या खानपान की आदतों को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
अगले एक साल में BMI और बॉडी फैट में बढ़ोतरी
अध्ययन के अनुसार, जिन बच्चों के दिमाग में खाने की तस्वीरों को देखकर ज्यादा सक्रियता दर्ज की गई, उनमें अगले एक साल के दौरान BMI और शरीर की चर्बी में अपेक्षाकृत अधिक बढ़ोतरी देखी गई। इसके साथ ही उनकी कमर के आकार में भी वृद्धि दर्ज की गई। ये नतीजे बचपन में बढ़ते मोटापे को समझने के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि, अध्ययन में शामिल बच्चों की संख्या सीमित थी, इसलिए इसके निष्कर्षों को सभी बच्चों पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।

क्या जंक फूड बच्चों में खाने की आदत को प्रभावित करता है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार स्वादिष्ट और अधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ खाने से बच्चों में बार-बार खाने की आदत यानी हैबिचुअल ईटिंग को बढ़ावा मिल सकता है। जब कोई बच्चा बार-बार ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करता है, तो खाने से मिलने वाला आनंद उसकी पसंद और व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इस रिसर्च से यह साबित नहीं हुआ है कि बच्चे जंक फूड के आदी हो जाते हैं या इन खाद्य पदार्थों के कारण उनके दिमाग में सीधे बदलाव होता है।
मोटापे के लिए सिर्फ चीनी को जिम्मेदार नहीं मान सकते

रिसर्च में यह भी संकेत मिला कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के प्रभाव के पीछे केवल चीनी जिम्मेदार नहीं है। कई पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में फैट और कार्बोहाइड्रेट का ऐसा संयोजन होता है, जो दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम को सक्रिय कर सकता है। शोधकर्ताओं ने जब ऐडेड शुगर की मात्रा को ध्यान में रखकर विश्लेषण किया, तो प्रोसेस्ड फूड और दिमाग की प्रतिक्रिया के बीच संबंध कुछ कमजोर हुआ। इससे पता चलता है कि इस प्रक्रिया में कई कारक भूमिका निभा सकते हैं।
बच्चों की डाइट पर ध्यान देना क्यों जरूरी?

इस अध्ययन के नतीजे माता-पिता को बच्चों के खानपान पर ध्यान देने का संकेत देते हैं। बच्चों की रोजाना की डाइट में फल, सब्जियां, दालें और पौष्टिक घर का बना भोजन शामिल करना बेहतर विकल्प हो सकता है। चिप्स, कुकीज और दूसरे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन सीमित रखना उपयोगी है। साथ ही, बच्चों को शारीरिक गतिविधियों और संतुलित दिनचर्या के लिए प्रोत्साहित करना भी जरूरी है। ध्यान रहे कि यह अध्ययन एक संभावित संबंध बताता है, जंक फूड को मोटापे का एकमात्र कारण साबित नहीं करता।
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