
Chhota Rajan Acquitted : गैंगस्टर छोटा राजन को करीब 17 साल पुराने फायरिंग मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। मुंबई की सीबीआई की विशेष अदालत ने वर्ष 2009 में पुणे के शिवसेना नेता अजय भोसले पर हुई गोलीबारी के मामले में छोटा राजन समेत पांच आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने सभी आरोपियों को हत्या की कोशिश, आपराधिक साजिश और आर्म्स एक्ट से जुड़े आरोपों से मुक्त कर दिया। इस मामले में छोटा राजन के अलावा पुणे के बिल्डर सुरेंद्रकुमार अग्रवाल, मोहम्मद खान, विजय तांबट और राजेश यादव आरोपी थे। हालांकि, अदालत के फैसले की विस्तृत वजह बताने वाला आदेश अभी सामने नहीं आया है।
अजय भोसले की कार पर हुई थी फायरिंग
यह पूरा मामला 11 अक्टूबर 2009 का है। उस दिन पुणे में शिवसेना नेता अजय भोसले की कार को निशाना बनाकर गोलीबारी की गई थी। आरोप लगाया गया था कि छोटा राजन के दो साथियों ने इस वारदात को अंजाम दिया था। गोलीबारी में अजय भोसले सुरक्षित बच गए थे, लेकिन उनके ड्राइवर को गोली लगने से चोट आई थी। घटना के बाद पुणे के बंड गार्डन पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस ने की, जिसके बाद इसकी जिम्मेदारी महाराष्ट्र सीआईडी को सौंप दी गई।
2015 में सीबीआई ने अपने हाथ में ली थी जांच
छोटा राजन को वर्ष 2015 में इंडोनेशिया के बाली से भारत लाए जाने के बाद इस मामले की जांच सीबीआई ने अपने हाथ में ले ली थी। जांच एजेंसी ने इस मामले में संपत्ति विवाद को गोलीबारी की वजह बताया था। सरकारी पक्ष के मुताबिक, पुणे के बिल्डर सुरेंद्रकुमार अग्रवाल का एक प्रॉपर्टी विवाद चल रहा था। आरोप था कि विवाद में अपना हिस्सा हासिल करने और मामला सुलझाने के लिए उन्होंने विजय तांबट से संपर्क किया था।

प्रॉपर्टी विवाद और फोन पर धमकी देने का था आरोप
जांच एजेंसियों का दावा था कि विजय तांबट के छोटा राजन से संबंध थे। आरोप लगाया गया कि राजन ने संपत्ति विवाद को लेकर आरके अग्रवाल को फोन पर धमकी दी थी। सरकारी वकील ने अदालत में यह भी दावा किया था कि मार्च से मई 2009 के बीच अजय भोसले को छोटा राजन की ओर से 50 से अधिक फोन किए गए थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, राजन को संदेह था कि भोसले संपत्ति विवाद में समझौता कराने के रास्ते में बाधा बन रहे हैं। इसी वजह से उन पर हमले की साजिश रची गई थी।
तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुआ छोटा राजन
करीब 70 वर्षीय छोटा राजन ने सुरक्षा कारणों से तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत की सुनवाई में हिस्सा लिया। उसे पिछले साल इस मामले में जमानत भी मिल गई थी। हालांकि, इस मामले में बरी होने के बावजूद उसकी जेल से रिहाई नहीं होगी। दरअसल, छोटा राजन वर्ष 2011 में पत्रकार ज्योतिर्मय डे यानी जे डे की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया है और उम्रकैद की सजा काट रहा है।
बचाव पक्ष ने साजिश के आरोपों को बताया था बेबुनियाद
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने छोटा राजन के खिलाफ पेश किए गए सबूतों पर सवाल उठाए थे। वकीलों का तर्क था कि फायरिंग की कोशिश या आपराधिक साजिश में उसकी भूमिका साबित करने के लिए कोई ठोस प्रमाण मौजूद नहीं है। आखिरकार सीबीआई की विशेष अदालत ने पांचों आरोपियों को बरी कर दिया। अब इस फैसले के विस्तृत आदेश का इंतजार है, जिससे स्पष्ट होगा कि अदालत ने किन आधारों पर आरोपियों को संदेह का लाभ दिया।










