JPSC News:  JPSC में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, तीन सदस्यों ने CID पूछताछ से पहले दिया इस्तीफा

JPSC में एक बड़े प्रशासनिक बदलाव ने हलचल बढ़ा दी है। आयोग के तीन सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया है और यह घटनाक्रम CID की पूछताछ से पहले सामने आया। आखिर तीनों सदस्यों ने एक साथ इस्तीफा क्यों दिया, क्या इसका जांच से संबंध है और आयोग के कामकाज पर क्या असर पड़ेगा?

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Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 9, 2026

JPSC News:  रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़ी कथित परीक्षा अनियमितताओं के विवाद के बीच सोमवार को बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया। सीआईडी की ओर से पूछताछ के लिए बुलाए जाने के बाद आयोग के तीन सदस्यों अजीता भट्टाचार्य, जमील अहमद और अनिमा हांसदा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। तीनों सदस्यों ने अपना त्यागपत्र राज्यपाल को भेज दिया है। एक साथ तीन सदस्यों के इस्तीफे को आयोग के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

परीक्षा विवाद के बीच बढ़ी हलचल

JPSC में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले कई दिनों से छात्र आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा और बैकलॉग भर्तियों में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं के कारण अभ्यर्थियों के हित प्रभावित हुए हैं। इसी बीच आयोग के सदस्यों के इस्तीफे ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

सरकार और छात्रों के बीच हुई बातचीत

इससे पहले JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड सरकार के मंत्रियों के साथ बैठक की थी। बातचीत के बाद मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सरकार के फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर 14वीं JPSC और 2023-25 की बैकलॉग भर्तियों से जुड़ी कथित अनियमितताओं को अलग-अलग स्तर पर जांचने का निर्णय लिया गया है।

आपराधिक मामलों की जांच करेगी CID

सरकार के अनुसार, मामले से जुड़े आपराधिक पहलुओं की जांच झारखंड सीआईडी करेगी। वहीं, वित्तीय अनियमितताओं और अवैध लेन-देन से संबंधित पहलुओं की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय यानी ED से कार्रवाई का अनुरोध किया जाएगा। सरकार का कहना है कि जांच के जरिए कथित गड़बड़ियों की वास्तविक स्थिति सामने लाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की कोशिश की जाएगी।

90 दिनों में चार्जशीट का प्रस्ताव

मंत्री ने बताया कि जांच प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का लक्ष्य है कि आरोपियों के खिलाफ 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की जाए। इससे छात्रों को जल्द न्याय मिलने की उम्मीद जताई गई है। सरकार ने यह भी कहा कि परीक्षा व्यवस्था में भविष्य की गड़बड़ियों को रोकने के लिए संस्थागत सुधार जरूरी हैं।

विशेषज्ञों की समिति करेगी परीक्षा सुधार

परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए IIT-ISM, IIM रांची और XLRI जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों की समिति बनाने की बात कही गई है। यह समिति भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया का अध्ययन कर जरूरी सुधारों के सुझाव देगी। सरकार का मानना है कि तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों के जरिए भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया जा सकता है।

CGL परीक्षा रद्द करने पर सरकार असहमत

बातचीत के दौरान छात्र प्रतिनिधियों ने CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग भी रखी। हालांकि सरकार ने इस मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। मंत्री के अनुसार, परीक्षा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत आयोजित हुई थी। ऐसे में सरकार का कहना है कि वह अपने स्तर पर अदालत के निर्देशों के तहत आयोजित परीक्षा को रद्द नहीं कर सकती।

निगरानी समिति के प्रस्ताव को छात्रों ने ठुकराया

छात्रों में जांच को लेकर विश्वास कायम करने के लिए सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में निगरानी समिति गठित करने का प्रस्ताव भी रखा। इस समिति का उद्देश्य CID की जांच प्रक्रिया पर नजर रखना होता। हालांकि, छात्र प्रतिनिधियों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। छात्रों की मुख्य मांगों में स्वतंत्र और प्रभावी जांच को लेकर स्पष्ट भरोसा शामिल है।

सरकार ने 98 प्रतिशत मांगें मानने का दावा किया

मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि बातचीत के दौरान सरकार लगभग 98 प्रतिशत बिंदुओं पर सहमत हुई है। उनके मुताबिक, मुख्य असहमति CGL परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर बनी हुई है। सरकार का तर्क है कि न्यायालय के निर्देशों के तहत आयोजित परीक्षा को वह स्वयं रद्द नहीं कर सकती। बाकी मुद्दों पर सरकार ने छात्रों की चिंताओं को दूर करने के लिए कई कदम प्रस्तावित किए हैं।

आंदोलन खत्म कराने की कोशिश जारी

सरकार का कहना है कि छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। दूसरी ओर, JPSC के तीन सदस्यों के इस्तीफे से विवाद और गहरा गया है। अब सीआईडी और संभावित ED जांच के साथ आयोग की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में है। छात्रों की मांगों और सरकार के फैसलों के बीच आगे की बातचीत महत्वपूर्ण होगी।

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