Haryana News: अस्पताल या रेफरल सेंटर? झज्जर में एम्बुलेंस सेवा दम तोड़ने पर मानवाधिकार आयोग सख्त

झज्जर के सरकारी अस्पतालों में रेफरल सिस्टम और एम्बुलेंस सेवाओं पर गंभीर सवाल उठे हैं, क्या मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजने का कोई बड़ा खेल चल रहा है, क्या स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से लोगों की जान खतरे में है, मानवाधिकार आयोग की जांच से क्या बड़े खुलासे होंगे

अस्पताल या रेफरल सेंटर?

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

मई 5, 2026

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Haryana News: हरियाणा के झज्जर जिले में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी कथित अनियमितताओं और लापरवाही के मामलों पर हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। आयोग ने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए राज्य के स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट तलब की है। इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी पहलुओं पर तथ्यात्मक जानकारी प्रस्तुत करें।

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मरीजों के अनावश्यक रेफरल पर उठे सवाल

आयोग के समक्ष पहुंची शिकायतों में यह आरोप लगाया गया है कि जिला अस्पताल झज्जर और उप-मंडल अस्पताल बहादुरगढ़ में उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं के बावजूद बड़ी संख्या में मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजा जा रहा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ये रेफरल कई बार संदिग्ध परिस्थितियों में किए जा रहे हैं, जिससे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

एम्बुलेंस सेवाओं की खराब स्थिति

मामले में एम्बुलेंस सेवाओं की स्थिति को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। शिकायत में दावा किया गया है कि जिले में मौजूद कई एम्बुलेंस या तो खराब हालत में हैं या उनके पास वैध फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं है। इस वजह से आपातकालीन मरीजों को समय पर उचित परिवहन सुविधा नहीं मिल पा रही है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।

बेरी उप-मंडल अस्पताल की स्थिति पर चिंता

इसके अलावा उप-मंडल अस्पताल बेरी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि अस्पताल में जरूरी दवाइयों, उपकरणों और बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी हुई है। साथ ही, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी की लंबे समय से अनुपस्थिति और मरीजों की शिकायतों के प्रति कथित उदासीन रवैये का मुद्दा भी सामने आया है।

स्वास्थ्य अधिकारों के उल्लंघन की आशंका

मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि यदि लगाए गए आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह न केवल सरकारी स्वास्थ्य नियमों और मानकों का उल्लंघन होगा, बल्कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों का भी हनन माना जाएगा। आयोग ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य का अधिकार, जीवन के अधिकार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर मानी जाएगी।

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विभागीय अधिकारियों को निर्देश

इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य), महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं और सिविल सर्जन झज्जर को निर्देश जारी किए हैं। उन्हें अस्पतालों में मरीजों के रेफरल की प्रक्रिया, एम्बुलेंस की स्थिति, चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता और संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति जैसे सभी बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है।

समय सीमा और अगली सुनवाई

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले, यानी 20 अगस्त 2026 से एक सप्ताह पूर्व, आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जानी अनिवार्य होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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