Giridhari Yadav JDU : जेडीयू सांसद गिरिधारी यादव पर गिरेगी गाज, बेटे के लिए आरजेडी का प्रचार करने पर बढ़ी मुश्किलें

बांका से जेडीयू सांसद गिरिधारी यादव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पार्टी ने आधिकारिक तौर पर उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की है। आरोप है कि उन्होंने चुनाव में एनडीए के खिलाफ जाकर अपने बेटे का साथ दिया। क्या गिरिधारी यादव अपनी सदस्यता बचा पाएंगे?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 18, 2026

Giridhari Yadav JDU :  बिहार की राजनीति में एक बार फिर अनुशासन और निष्ठा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बांका से जेडीयू सांसद गिरिधारी यादव की मुश्किलें आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं, क्योंकि उनकी अपनी ही पार्टी, जनता दल यूनाइटेड (JDU), ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने सांसद पर 2025 के विधानसभा चुनावों के दौरान ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया है। यह मामला तब और गरमा गया जब जेडीयू ने आधिकारिक तौर पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की। सत्ता के गलियारों में यह चर्चा का विषय है कि कैसे एक कद्दावर नेता अपनी ही पार्टी के निशाने पर आ गया।

लोकसभा अध्यक्ष का नोटिस: जेडीयू नेता दिलेश्वर कामत की शिकायत पर एक्शन

इस पूरे विवाद के बीच संवैधानिक प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जेडीयू सांसद गिरिधारी यादव को एक कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह कार्रवाई जेडीयू संसदीय दल के नेता दिलेश्वर कामत द्वारा 25 मार्च को लोकसभा सचिवालय में दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर की गई है। कामत ने अध्यक्ष से मुलाकात कर एक विस्तृत याचिका सौंपी थी, जिसमें सांसद पर पार्टी की नीतियों के खिलाफ जाकर काम करने के पुख्ता सबूत पेश किए गए थे। अब गिरिधारी यादव को सदन के समक्ष अपनी सफाई पेश करनी होगी।

बेटे के प्रति मोह पड़ा भारी: आरजेडी उम्मीदवार के पक्ष में किया प्रचार

विवाद की मुख्य जड़ गिरिधारी यादव के बेटे चाणक्य प्रकाश रंजन से जुड़ी है। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में चाणक्य ने आरजेडी (RJD) के टिकट पर बेलहर सीट से चुनाव लड़ा था। आरोप है कि गिरिधारी यादव ने पार्टी मर्यादा को ताक पर रखते हुए जेडीयू के आधिकारिक उम्मीदवार मनोज यादव के खिलाफ अपने बेटे के लिए जमकर प्रचार किया। दिलेश्वर कामत ने स्पष्ट किया कि यद्यपि चाणक्य प्रकाश रंजन भारी मतों से चुनाव हार गए, लेकिन पार्टी के एक वर्तमान सांसद द्वारा प्रतिद्वंद्वी दल के प्रत्याशी (चाणक्य) का समर्थन करना क्षमा योग्य नहीं है।

गिरिधारी यादव का राजनीतिक सफरनामा और बांका पर मजबूत पकड़

गिरिधारी यादव बिहार की राजनीति के एक पुराने खिलाड़ी रहे हैं। 2010 से जेडीयू का हिस्सा रहे यादव का राजनीतिक रिकॉर्ड काफी प्रभावशाली है। उन्होंने 1996 से अब तक बांका लोकसभा सीट का पांच बार प्रतिनिधित्व किया है। दिलचस्प बात यह है कि उनकी जीत का सिलसिला अलग-अलग दलों के साथ रहा है—पहली बार जनता दल, 2004 में आरजेडी और 2019 के बाद लगातार तीन बार जेडीयू के टिकट पर। बेलहर विधानसभा सीट से भी वे 2010 और 2015 में जेडीयू के विधायक रह चुके हैं। इतने लंबे अनुभव के बावजूद, पारिवारिक रिश्तों और दलीय निष्ठा के बीच का टकराव उनकी सदस्यता पर खतरा बन गया है।

सबूतों के साथ घेराबंदी: जेडीयू ने कहा “अनुशासन सर्वोपरि”

जेडीयू नेतृत्व इस मामले में कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं दिख रहा है। दिलेश्वर कामत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि गिरिधारी यादव के खिलाफ याचिका पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर ही दायर की गई है। उनके पास ऐसे पर्याप्त वीडियो और साक्ष्य मौजूद हैं जो यह साबित करते हैं कि सांसद ने सक्रिय रूप से विपक्षी उम्मीदवार की मदद की। पार्टी का कहना है कि चाहे कोई कितना भी बड़ा नेता क्यों न हो, पार्टी के हितों के खिलाफ काम करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। अब सबकी नजरें लोकसभा अध्यक्ष के अगले कदम और गिरिधारी यादव के जवाब पर टिकी हैं।

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