Janmashtami 2026: 4 सितंबर या 5 सितंबर, कब मनाएं जन्माष्टमी? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

कृष्ण जन्माष्टमी 2026 की तारीख को लेकर लोगों में कंफ्यूजन है। इस साल गृहस्थ परंपरा के अनुसार जन्माष्टमी 4 सितंबर को और वैष्णव संप्रदाय के लोग 5 सितंबर को पर्व मनाएंगे। जानें अष्टमी तिथि, निशीथ पूजा का शुभ मुहूर्त, रोहिणी नक्षत्र, व्रत, माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी और लड्डू गोपाल के श्रृंगार से जुड़ी खास बातें।

Janmashtami 2026

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अगस्त 31, 2026

Janmashtami 2026: हिंदू धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में बेहद श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने अधर्म का नाश और धर्म की स्थापना करने के लिए श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था। हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी मनाई जाती है।

इस साल कब मनाई जाएगी जन्माष्टमी?

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, कृष्ण जन्माष्टमी 2026 की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है। इस साल भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा। गृहस्थ परंपरा के अनुसार जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी, जबकि वैष्णव संप्रदाय के अनुयायी 5 सितंबर को यह पर्व मनाएंगे। वहीं, दही-हांडी का उत्सव भी 5 सितंबर को मनाया जाएगा।

कब शुरू और कब खत्म होगी अष्टमी?

पंचांग के अनुसार, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात 2 बजकर 25 मिनट पर शुरू होगी और 5 सितंबर की रात 12 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी। जन्माष्टमी के लिए निशीथ काल को विशेष महत्व दिया जाता है, क्योंकि धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था।

जानें पूजा का शुभ समय

कृष्ण जन्माष्टमी 2026 पूजा मुहूर्त की बात करें तो निशीथ काल में पूजा करना विशेष माना जाता है। इस वर्ष निशीथ पूजा का समय 4 सितंबर की रात 11 बजकर 57 मिनट से 5 सितंबर की रात 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इसी दौरान भक्त भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक, श्रृंगार, पूजा और आरती कर सकते हैं।

जन्माष्टमी 2026 पर रोहिणी नक्षत्र का क्या है समय?

जन्माष्टमी के अवसर पर रोहिणी नक्षत्र का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार रोहिणी नक्षत्र 4 सितंबर को अर्धरात्रि 12 बजकर 29 मिनट से शुरू होगा और रात 11 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। भक्त इस दौरान भी भगवान श्रीकृष्ण की आराधना और मंत्र जाप कर सकते हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी पर लगाएं माखन-मिश्री और पंचामृत का भोग

बताते चले कि, जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को भोग लगाने की भी विशेष परंपरा है। भक्त भगवान को माखन-मिश्री, पंचामृत, फल और अन्य सात्विक खाद्य पदार्थ अर्पित कर सकते हैं। घर के मंदिर को फूलों और सजावटी वस्तुओं से सजाकर भगवान श्रीकृष्ण को नए वस्त्र पहनाए जाते हैं। तुलसी दल को भी भगवान कृष्ण की पूजा में विशेष महत्व दिया जाता है।

लड्डू गोपाल का करें खास श्रृंगार, सजाएं झूला

जिन घरों में लड्डू गोपाल विराजमान हैं, वहां जन्माष्टमी के दिन विशेष श्रृंगार किया जा सकता है। भगवान को नए वस्त्र, मुकुट, बांसुरी, आभूषण और फूलों की माला पहनाई जाती है। इसके बाद फूलों से सजे झूले में लड्डू गोपाल को विराजमान कराया जाता है। कई घरों में पंचामृत से स्नान कराने की परंपरा भी निभाई जाती है।

आधी रात को करें श्रीकृष्ण की विशेष आराधना

निशीथ काल में श्रीकृष्ण पूजा जन्माष्टमी की सबसे खास परंपराओं में से एक है। इस दौरान भक्त भगवान की पूजा-अर्चना, आरती और मंत्र जाप करते हैं। श्रद्धालु ‘ॐ क्लीं कृष्णाय नमः’ मंत्र का जाप भी कर सकते हैं। भगवान को झूला झुलाकर अपनी मनोकामनाएं उनके सामने रखने की भी परंपरा है।

जन्माष्टमी पर पढ़ें श्रीमद्भगवद्गीता, मिलेगा जीवन का संदेश

कृष्ण जन्माष्टमी केवल उत्सव का पर्व नहीं बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं को याद करने का भी अवसर है। इस दिन श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ किया जा सकता है। गीता में भगवान कृष्ण ने कर्म, कर्तव्य और धर्म के महत्व का संदेश दिया है। उनके जीवन से प्रेम, मित्रता, सत्य और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा मिलती है।

अपनी क्षमता के अनुसार रखें व्रत

जन्माष्टमी का व्रत भी भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। कई श्रद्धालु निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग फल, दूध या सात्विक आहार लेकर उपवास करते हैं। मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद पूजा और आरती के साथ व्रत खोलने की परंपरा है। स्वास्थ्य और क्षमता को ध्यान में रखते हुए ही व्रत का तरीका चुनना उचित है।

धनिया पंजीरी का भोग क्यों है खास?

जन्माष्टमी पर धनिया पंजीरी का भोग लगाने की भी परंपरा है। इसे साबुत धनिया पीसकर तैयार किया जाता है और इसमें बूरा या मिश्री के साथ ड्राई फ्रूट्स मिलाए जा सकते हैं। स्वाद के अनुसार इसमें देसी घी भी डाला जाता है। भगवान को भोग लगाने के बाद पंजीरी को प्रसाद के रूप में परिवार और श्रद्धालुओं में बांटा जाता है।

कृष्ण मंदिरों में मनाया जाएगा जन्मोत्सव

कृष्ण जन्माष्टमी 2026 पर देशभर के मंदिरों में विशेष सजावट, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजा और आरती होगी। भक्त मंदिरों में पहुंचकर भगवान के दर्शन करेंगे और जन्मोत्सव में शामिल होंगे।

मथुरा-वृंदावन में कृष्ण भक्ति का दिखेगा खास रंग

जन्माष्टमी पर अगर संभव हो तो भक्त मथुरा और वृंदावन के कृष्ण मंदिरों में दर्शन कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मथुरा भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि और वृंदावन उनकी बाल लीलाओं से जुड़ी पवित्र भूमि है। इस दिन कृष्ण भक्ति में समय बिताने और भगवान का स्मरण करने को श्रद्धा, सकारात्मकता और मानसिक शांति से जोड़ा जाता है।