Jammu-Kashmir Kal ka Mausam: बारिश बनी आफत! Jammu-Kashmir में बिगड़े हालात, छतों पर सामान रखने को मजबूर लोग

जम्मू-कश्मीर में मूसलाधार बारिश के चलते निचले इलाके जलमग्न हो गए हैं और तवी व चिनाब जैसी प्रमुख नदियां उफान पर हैं।

Jammu-Kashmir Kal ka Mausam

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 22, 2026

Jammu-Kashmir Kal ka Mausam: जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। जम्मू के निचले इलाकों में जहां जलभराव की गंभीर स्थिति पैदा हो गई है, वहीं कश्मीर घाटी में भी हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। कई नदी-नाले उफान पर हैं और पानी रिहायशी इलाकों व घरों के भीतर तक प्रवेश कर चुका है। भारी बारिश और बाढ़ के डर से सहमे लोग एहतियातन अपने घरों का कीमती सामान और खाने-पीने की चीजें छतों या ऊपरी मंजिलों पर शिफ्ट करने को मजबूर हैं।

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नदियों का बढ़ता जलस्तर और सुंदरबनी में भूस्खलन

लगातार हो रही बारिश के कारण राज्य की प्रमुख जल प्रणालियों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ रहा है:

तवी और चिनाब उफान पर: जम्मू की जीवनदायिनी मानी जाने वाली तवी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जबकि चिनाब नदी भी खतरे के निशान के बिल्कुल करीब पहुंच चुकी है।

भूस्खलन और बादल फटना: सुंदरबनी इलाके में भारी बारिश के चलते भूस्खलन (लैंडस्लाइड) हुआ है, जिससे यातायात बाधित हुआ है। इसके अलावा, बांडीपुर के गुरेज सहित कुछ ऊपरी पहाड़ी इलाकों में बादल फटने (Cloudburst) की घटनाएं सामने आई हैं, जिसके बाद अचानक आई बाढ़ ने रिहायशी बस्तियों को जलमग्न कर दिया है।

झेलम की स्थिति: राहत की बात यह है कि सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार, झेलम नदी का जलस्तर फिलहाल संगम, राममुंशीबाग और अशम तीनों ही प्रमुख केंद्रों पर खतरे के निशान से काफी नीचे है। प्रशासन ने शहर में फिलहाल बाढ़ के किसी भी तात्कालिक खतरे से इनकार किया है, लेकिन लोगों को पूरी तरह सतर्क रहने की हिदायत दी है।

छतों पर रात गुजारने को मजबूर लोग

जम्मू के मंगू चक गांव में तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने पिछले साल की भयानक बाढ़ (जब 6 फीट तक पानी भर गया था) की यादें ताजा कर दी हैं। ग्रामीण इस बार कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते और अपने परिवार व राशन के साथ छतों पर रात बिता रहे हैं। वहीं, श्रीनगर के हारवन इलाके में दाछीगाम नाला खतरे के निशान को पार कर गया है, जिससे तटीय इलाकों के लोग सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। डल झील के आसपास के इलाकों जैसे हबक, नसीमबाग और गुललाब बाग में भी लोग सामान सुरक्षित करने में जुटे हैं।

पिछले 24 घंटों में दर्ज की गई प्रमुख बारिश (मिमी में):

कठुआ: 153 मिमी | कठुआ बर्मल: 143 मिमी

सांबा: 133 मिमी | जम्मू: 62 मिमी

गुलमर्ग: 55 मिमी | कटरा: 58.5 मिमी

पुंछ: 51 मिमी | राजौरी: 44 मिमी

मौसम का पूर्वानुमान

मौसम विभाग (IMD) से प्राप्त ताजा जानकारी के अनुसार, जम्मू क्षेत्र में 23 जुलाई को भी बारिश का यह दौर जारी रहने की संभावना है, जिससे वहां की प्रशासनिक मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हालांकि, कश्मीर घाटी में बुधवार देर रात से बारिश की तीव्रता में कमी आने की उम्मीद है।

श्रीनगर मौसम केंद्र के निदेशक डॉ. मुख्तार अहमद ने बताया कि वीरवार, 24 जुलाई से मौसम में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा। प्रशासन ने किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित कर दिए हैं। फिर भी, पहाड़ी ढलानों और नदी-नालों के किनारे बसे नागरिकों को अगले 24 घंटों तक विशेष सावधानी और सतर्कता बरतने की अपील की गई है।

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