Jamia Student Union Election: जामिया में दो दशक बाद होंगे छात्रसंघ चुनाव, छात्रों के प्रदर्शन के बाद आदेश जारी

जामिया मिलिया इस्लामिया में करीब 20 साल बाद छात्रसंघ चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने का आदेश दिया। लेकिन संविधान की मंजूरी, छात्रों की बाकी मांगें और आंदोलन का भविष्य अब भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।

जामिया में दो दशक बाद होंगे छात्रसंघ चुनाव

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अक्टूबर 26, 2026

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Jamia Student Union Election: दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में करीब दो दशकों के बाद छात्रसंघ चुनाव कराने का रास्ता साफ हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया। आदेश के मुताबिक, छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलने की तारीख से 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। इस घोषणा को छात्र आंदोलन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से छात्र निर्वाचित छात्रसंघ को दोबारा बहाल करने की मांग कर रहे थे।

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छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन का फैसला

आपको बता दें कि, जामिया में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से विरोध प्रदर्शन चल रहा था। कुछ छात्र अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर भी बैठे थे। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना था कि विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्रसंघ की व्यवस्था दोबारा शुरू की जानी चाहिए, ताकि छात्र अपने प्रतिनिधियों का चुनाव कर सकें। विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों और उनके प्रतिनिधियों की ओर से सौंपे गए मांगपत्र पर विचार करने के बाद चुनाव कराने का निर्णय लिया।

2006 में भंग किया गया था छात्रसंघ

2006 में भंग किया गया था छात्रसंघ
2006 में भंग किया गया था छात्रसंघ

विश्वविद्यालय प्रशासन ने वर्ष 2006 में छात्रसंघ को भंग कर दिया था। इसके बाद से निर्वाचित छात्रसंघ की बहाली का मुद्दा समय-समय पर उठता रहा। अब प्रशासन के नए आदेश से छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, चुनाव कराने के लिए पहले छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलना आवश्यक होगा। इसके बाद निर्धारित 15 दिनों के भीतर चुनाव संपन्न कराने का प्रावधान किया गया है।

सुरक्षा कर्मियों के आचरण की जांच के लिए समिति

बताते चलें कि, विश्वविद्यालय के कुलसचिव मोहम्मद महताब आलम रिजवी की ओर से जारी आदेश में विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कर्मियों के आचरण की जांच के लिए समिति गठित करने का भी प्रावधान है। इस फैसले को प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों पर प्रशासन की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। समिति का उद्देश्य विरोध प्रदर्शन की अवधि के दौरान सुरक्षा कर्मियों के व्यवहार से जुड़े मामलों की जांच करना होगा।

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प्रदर्शनकारी छात्रों ने सार्वजनिक माफी पर जताई सहमति

विश्वविद्यालय के आदेश के अनुसार, आंदोलन के दौरान प्रशासन के खिलाफ दिए गए कथित मानहानिकारक बयानों, की गई कार्रवाइयों और सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट को लेकर प्रदर्शनकारी छात्रों ने सार्वजनिक माफी मांगने पर सहमति जताई है। इसके तहत एक संवाददाता सम्मेलन में माफी मांगने की बात कही गई है। यह सहमति प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच हुए संवाद के बाद सामने आई।

NSUI ने सोशल मीडिया पर मांगी माफी

जामिया मिलिया इस्लामिया की NSUI इकाई ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट साझा कर माफी मांगी। संगठन ने अपने संदेश में कहा कि जश्न मनाने के लिए माफी मांगना जरूरी समझा गया, क्योंकि प्रशासन की रणनीति के बीच ऐसा करना उचित नहीं था। साथ ही संगठन ने स्पष्ट किया कि उसकी ओर से विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा और तीनों मांगें पूरी होने तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।

छात्रसंघ चुनाव को लेकर आगे क्या होगा?

विश्वविद्यालय प्रशासन की घोषणा के बाद अब छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया और संविधान को मंजूरी मिलने की तारीख पर नजर रहेगी। चुनाव की घोषणा छात्रों की लंबे समय से चली आ रही मांग के लिहाज से महत्वपूर्ण है। हालांकि, प्रदर्शन पूरी तरह समाप्त होगा या नहीं, यह छात्रों की बाकी मांगों और प्रशासन के साथ आगे होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगा। फिलहाल, चुनाव कराने के आदेश से जामिया में छात्र राजनीति की वापसी की उम्मीद बढ़ गई है।

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