Jamia Student Protest: जामिया में छात्र आंदोलन ने पकड़ा जोर, प्रशासन से तीन मांगों पर जवाब तलब

जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव की बहाली और अन्य मांगों को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। 14 दिनों से जारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और 100-150 से अधिक छात्रों के लगातार धरने से कैंपस में तनाव का माहौल बना हुआ है।

Jamia Student Protest

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अक्टूबर 25, 2026

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Jamia Student Protest: जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ (Student Union) चुनाव कराने और अन्य मांगों को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शन अब उग्र रूप लेता जा रहा है। पिछले 14 दिनों से छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। वर्तमान में धरने पर 100 से 150 से अधिक छात्र-छात्राएं एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। आंदोलन के चलते कैंपस का माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है।

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छात्रों की तीन प्रमुख मांगें

Jamia Student Protest
जामिया में छात्र आंदोलन ने पकड़ा जोर

प्रदर्शनकारी छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के सामने स्पष्ट रूप से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं, छात्र संघ चुनाव (Student Union Election) की तारीखों और समयसीमा का अविलंब औपचारिक ऐलान किया जाए। यूनिवर्सिटी के मुख्य प्रॉक्टर और सिक्योरिटी एडवाइजर को उनके पद से हटाया जाए, जिन पर छात्रों के साथ अभद्र भाषा और दुर्व्यवहार का आरोप है। प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर की गई सभी अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाइयों को तुरंत निरस्त किया जाए।

ऑनलाइन मोड में पढ़ाई और सुरक्षा कर्मियों से टकराव

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जामिया में छात्र आंदोलन ने पकड़ा जोर

24 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों और यूनिवर्सिटी के सुरक्षा कर्मियों के बीच तीखी झड़प और टकराव देखने को मिला। इसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने सभी नियमित क्लासेस को ऑनलाइन मोड में स्थानांतरित कर दिया है और सेंट्रल लाइब्रेरी को भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इसी बीच कैंपस में विवादित नारे लिखे जाने की घटना भी सामने आई है, हालांकि प्रदर्शनकारी छात्रों ने इस मामले से पूरी तरह दूरी बनाते हुए किसी भी तरह के जुड़ाव से इनकार किया है।

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हॉस्टल बंद और मेडिकल इमरजेंसी से रोकने का आरोप

कैंपस में मौजूद छात्र-छात्राओं ने सुरक्षाकर्मियों और प्रशासन पर गंभीर और असंवेदनशील व्यवहार के आरोप लगाए हैं। छात्र अरमान मलिक और अन्य छात्राओं ने शिकायत की कि उनके पास वैध आईडी कार्ड होने के बावजूद उन्हें उनके ही हॉस्टल में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। अस्वस्थ छात्रों का आरोप है कि उन्हें यूनिवर्सिटी परिसर के भीतर स्थित हेल्थ केयर सेंटर तक भी जाने से रोका जा रहा है। छात्रों का कहना है कि सुरक्षा गार्ड उनके साथ आतंकियों जैसा व्यवहार कर रहे हैं और आपत्तिजनक शब्दों व टिपणियों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

छात्र संघ क्यों है जरूरी?

छात्रों का कहना है कि हॉस्टल न मिलना, बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं का अभाव और प्रशासनिक मनमानी जैसी समस्याओं का मूल कारण छात्र संघ का न होना है। यदि यूनिवर्सिटी में एक लोकतांत्रिक छात्र संघ मौजूद होता, तो छात्रों की जमीनी समस्याओं और अधिकारों की आवाज को प्रशासन के समक्ष मजबूती से उठाया जा सकता था।

हालांकि प्रशासन ने छात्र संघ का संविधान तैयार करने के लिए एक कमेटी का गठन किया है, लेकिन छात्र केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं हैं और चुनाव की सटीक तिथि घोषित होने तक अपना आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं।

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