
Sharad Purnima 2026: हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का खास महत्व माना जाता है। इस दिन चंद्रमा की पूजा करने और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद पाने के लिए विशेष पूजा-पाठ किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी चांदनी को अमृत के समान माना जाता है। इसी वजह से इस रात खुले आसमान के नीचे खीर रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि चांदनी में रखी खीर को अगले दिन प्रसाद के रूप में खाने से सुख-समृद्धि आती है।
शरद पूर्णिमा 2026 पर क्यों रखी जाती है चांदनी में खीर?
शरद पूर्णिमा के दिन कई घरों में रात को दूध, चावल और चीनी से खीर बनाई जाती है। इसके बाद खीर को ऐसी जगह रखा जाता है, जहां चंद्रमा की रोशनी सीधे पड़ सके। धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की चांदनी में औषधीय गुण होते हैं और इस रोशनी में रखी खीर का सेवन करना शुभ माना जाता है। हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं और इनके वैज्ञानिक प्रमाण अलग विषय हैं।

इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों को धन, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इसी कारण कई लोग रात में जागकर पूजा-पाठ करते हैं और अगले दिन खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
शरद पूर्णिमा की रात खीर कितने बजे रखें?
अगर आप भी शरद पूर्णिमा पर खीर को चांदनी में रखने की तैयारी कर रहे हैं, तो समय का ध्यान रखना जरूरी है। परंपरा के अनुसार, चंद्रमा निकलने के बाद खीर को खुले आसमान के नीचे रखा जा सकता है। कई जगह रात 8 बजे के बाद खीर रखने की सलाह दी जाती है। कुछ लोग रात 8:30 बजे से 11:30 बजे या रात 10 बजे से 12 बजे के बीच भी खीर रखते हैं।
हालांकि, खीर रखने का कोई एक तय समय सभी जगहों पर लागू नहीं होता। चंद्रोदय का समय शहर और स्थान के हिसाब से बदल सकता है। इसलिए अपने क्षेत्र में चंद्रमा निकलने का सही समय देखकर खीर रखें। रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को शरद पूर्णिमा मनाने से पहले स्थानीय पंचांग से तिथि और चंद्रोदय के समय की पुष्टि भी कर लें।
शरद पूर्णिमा की खीर सुबह कितने बजे उठानी चाहिए?
शरद पूर्णिमा की रात चांदनी में रखी खीर को अगले दिन सुबह उठा लिया जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, सूर्योदय से पहले यानी ब्रह्म मुहूर्त में खीर उठाना शुभ माना जाता है। आम तौर पर लोग सुबह 4 से 5 बजे के बीच खीर उठा लेते हैं। अगर इस समय ऐसा करना संभव न हो, तो सुबह स्नान और पूजा-पाठ के बाद भी खीर को वहां से हटाया जा सकता है।


कुछ लोग सुबह 5 से 8 बजे के बीच खीर उठाते हैं। लेकिन खीर को बहुत देर तक खुले में छोड़ना ठीक नहीं है। मौसम गर्म या उमस भरा होने पर दूध से बनी खीर जल्दी खराब हो सकती है। इसलिए धार्मिक परंपरा निभाने के साथ-साथ उसकी साफ-सफाई और सुरक्षा का भी ध्यान रखें।
शरद पूर्णिमा की खीर खाने का सही तरीका क्या है?
परंपरा के अनुसार, सुबह स्नान करने के बाद पूजा-पाठ किया जाता है और फिर खीर का भगवान को भोग लगाया जाता है। आप अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण और मां लक्ष्मी को खीर अर्पित कर सकते हैं। इसके बाद परिवार के सदस्यों के साथ इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
खीर को प्रसाद के रूप में खाने से पहले यह जरूर देख लें कि वह ठीक हालत में है या नहीं। अगर खीर से अजीब गंध आ रही हो, उसका रंग या बनावट बदल गई हो या उसमें गंदगी गिर गई हो, तो उसे खाने से बचें।
शरद पूर्णिमा पर खीर रखते समय इन बातों का रखें ध्यान
खीर को रातभर खुले आसमान के नीचे रखने से उसमें धूल-मिट्टी, कीड़े या अन्य गंदगी गिर सकती है। ऐसे में खीर को साफ और सुरक्षित बर्तन में रखें। उसे जालीदार ढक्कन या साफ, हल्के मलमल के कपड़े से ढक सकते हैं, ताकि गंदगी और कीड़े अंदर न जाएं।
सबसे जरूरी बात यह है कि दूध से बनी खीर को लंबे समय तक सामान्य तापमान पर छोड़ना सुरक्षित नहीं माना जाता। अगर खीर रातभर बाहर रखी गई है, तो उसे खाने से पहले उसकी सुरक्षा पर ध्यान दें। जरूरत पड़ने पर खीर को ठंडा रखने का इंतजाम करें। इस तरह आप शरद पूर्णिमा की परंपरा निभाने के साथ परिवार की सेहत का भी ख्याल रख सकते हैं।











