Jairam Ramesh: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने हाल ही में संपन्न हुए संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस सत्र के परिणामों को लोकतंत्र, संविधान और संघीय ढांचे की महान विजय करार दिया। रमेश के अनुसार, यह सत्र सत्ता पक्ष की ‘बुलडोजर राजनीति’ और ‘परिसीमन के दांव-पेच’ की हार का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का असली एजेंडा महिला सशक्तिकरण नहीं, बल्कि परिसीमन के माध्यम से राजनीतिक समीकरणों को साधना था, जिसे विपक्ष ने सफलतापूर्वक उजागर कर दिया है।
महिला आरक्षण विधेयक के कार्यान्वयन पर उठाए गंभीर सवाल
जयराम रमेश ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम की अधिसूचना (Notification of Women’s Reservation Act) को लेकर सरकार की टाइमिंग पर सवाल खड़े किए। उन्होंने याद दिलाया कि यह विधेयक 22 सितंबर 2023 को ही सर्वसम्मति से पारित हो गया था, लेकिन इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब 16 अप्रैल की रात को अचानक इसकी अधिसूचना जारी करना सरकार की मंशा पर संदेह पैदा करता है। उन्होंने केंद्र से पूछा कि आखिर ऐसी क्या आपातकालीन स्थिति या जल्दबाजी (Urgency and Intent) थी कि इसे इस तरह अचानक लागू किया गया, जबकि पिछले कई महीनों से सरकार इस पर मौन साधे हुए थी।
संवैधानिक विधेयक की अस्पष्टता
सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए रमेश ने कहा कि लोकसभा की सदस्य संख्या और संवैधानिक संशोधन (Constitutional Amendment and Seat Distribution) को लेकर विधेयक में भारी अस्पष्टता है। वर्तमान में सीटों की संख्या 543 है, लेकिन नए विधेयक में यह साफ नहीं है कि परिसीमन के बाद राज्यों की आनुपातिक हिस्सेदारी कैसे बढ़ेगी। उन्होंने गृह मंत्री के बयानों और लिखित बिल के बीच के विरोधाभास को रेखांकित करते हुए कहा कि जब तक बिल में स्पष्ट उल्लेख नहीं होता, तब तक सरकार की नीयत और पारदर्शिता (Government’s Credibility and Transparency) पर भरोसा करना नामुमकिन है।
सामाजिक न्याय और डेटा की मांग
कांग्रेस नेता ने जाति आधारित गणना और सामाजिक सर्वेक्षण (Caste Census and Social Justice) के मुद्दे पर केंद्र को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जाति जनगणना कराने से भाग रही है और इसे लेकर कोई ठोस रोडमैप पेश नहीं कर रही है। रमेश ने असम और जम्मू-कश्मीर के परिसीमन मॉडल (Delimitation model of Assam and J&K) का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां जिस तरह से बदलाव किए गए, उससे लोकतांत्रिक मूल्यों को ठेस पहुंची है। उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकार का इरादा साफ है, तो वह पिछड़े वर्गों के सटीक आंकड़े जुटाने में देरी क्यों कर रही है।
महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी
प्रधानमंत्री के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए जयराम रमेश ने दो टूक कहा कि देश की महिलाएं और उनकी राजनीतिक चेतना (Women’s Political Awareness and Empowerment) को कमतर नहीं आंकना चाहिए। उन्होंने गर्व से कहा कि आज स्थानीय निकायों में जो 15 लाख महिला प्रतिनिधि हैं, वह कांग्रेस की दूरगामी नीतियों का फल है। रमेश ने मांग की कि 2029 से महिला आरक्षण (Implementation of Reservation by 2029) को प्रभावी बनाया जाए और इसमें ओबीसी (OBC) व आदिवासी महिलाओं के लिए उप-कोटा सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि भाजपा के लिए यह मुद्दा अधिकारों से ज्यादा राजनीतिक संरक्षण और सत्ता में बने रहने (Political Patronage and Power) का एक जरिया मात्र है।









