Jaipur CJP Controversy: राजस्थान के जयपुर में शुक्रवार, 21 अगस्त को सरकारी स्कूल की ओर जा रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की टीम के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया। टीम में CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका समेत कई कार्यकर्ता शामिल थे। पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि ग्रामीणों ने योजनाबद्ध तरीके से उनकी टीम को निशाना बनाया और हमला किया। हालांकि, अब इस पूरे मामले में ग्रामीणों का पक्ष भी सामने आया है। ग्रामीणों ने CJP के आरोपों को खारिज करते हुए घटना को लेकर अलग दावा किया है। उनका कहना है कि टीम के कुछ सदस्यों के पास हथियार थे और उन्होंने गांव में कथित तौर पर आपत्तिजनक और देश विरोधी नारे लगाए।
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ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
ग्रामीणों का दावा है कि CJP के कार्यकर्ता जब गांव पहुंचे तो शुरुआत में स्थानीय लोगों ने उनसे बातचीत की और समझाकर वापस भेज दिया। उनका कहना है कि इसके बाद कुछ समय बाद करीब 50 से 60 लोग दोबारा वहां पहुंचे, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं। एक ग्रामीण के मुताबिक, CJP से जुड़े लोगों की गाड़ियों में कथित तौर पर हथियार मौजूद थे। ग्रामीणों ने उन्हें दोबारा रोकने की कोशिश की, जिसके बाद कथित तौर पर महिलाओं की ओर से अभद्र व्यवहार किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि विवाद बढ़ने के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति बन गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
गाड़ियों के शीशे तोड़ने को लेकर भी अलग दावा
घटना को लेकर एक बड़ा दावा गाड़ियों के शीशे टूटने को लेकर किया जा रहा है। जहां CJP की ओर से ग्रामीणों पर हमला करने और तोड़फोड़ का आरोप लगाया गया, वहीं ग्रामीणों का दावा है कि CJP कार्यकर्ताओं ने खुद अपनी गाड़ियों के शीशे तोड़े। ग्रामीण लाल चंद शर्मा ने आरोप लगाया कि CJP के लोगों ने उन्हें फंसाने के लिए खुद ही लाठियां चलाईं और नुकसान पहुंचाया। उन्होंने पार्टी के पुराने प्रदर्शनों का हवाला देते हुए भी कई आरोप लगाए। हालांकि, गाड़ियों के शीशे किसने तोड़े और पूरे विवाद की शुरुआत कैसे हुई, इसे लेकर अभी अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
स्कूल सुधार के मुद्दे पर भी विवाद
ग्रामीणों और CJP के बीच विवाद की एक वजह सरकारी स्कूल को लेकर पार्टी की गतिविधियां भी बताई जा रही हैं। CJP की टीम का दावा है कि वह स्कूल की स्थिति सुधारने और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए गांव पहुंची थी। वहीं एक ग्रामीण ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि CJP का उद्देश्य स्कूल सुधारना नहीं, बल्कि गांव में अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करना है। ग्रामीण का कहना है कि स्कूल के लिए पहले ही सरकारी फंड जारी हो चुका है और जल्द ही विकास कार्य जमीन पर दिखाई देने लगेंगे। इसलिए उनके मुताबिक, बाहरी राजनीतिक संगठन को गांव में आकर इस मुद्दे में हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है।
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ग्रामीणों ने CJP पर लगाए राजनीतिक आरोप
ग्रामीणों ने CJP को लेकर कई गंभीर आरोप भी लगाए। उनका कहना है कि वे पार्टी की गतिविधियों को राजनीतिक विस्तार की कोशिश के तौर पर देखते हैं। एक ग्रामीण ने दावा किया कि CJP को बाहरी स्तर से फंडिंग मिलती है और पार्टी के लोग गांव में राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने के उद्देश्य से पहुंचे थे। ग्रामीणों ने साफ कहा कि वे ऐसी गतिविधियों का विरोध करेंगे। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम में CJP और ग्रामीणों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। हमला किसने शुरू किया, गाड़ियों के शीशे किसने तोड़े और हथियारों व नारों से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।










