Jagannath Rath Yatra 2026: कब है जगन्नाथ रथ यात्रा? देखें तारीख, मुहूर्त और रीति-रिवाज

जगन्नाथ रथ यात्रा भारत का एक प्रमुख और पवित्र त्योहार है, जिसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को रथों में विराजमान कर श्रद्धालु जगन्नाथ मंदिर से गुंडीचा मंदिर (मौसी के घर) तक लेकर जाते हैं।

Jagannath Rath Yatra 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 6, 2026

Jagannath Rath Yatra 2026: जगन्नाथ रथ यात्रा हिंदू धर्म के प्रमुख और अत्यंत भव्य त्योहारों में से एक है। इसे रथ यात्रा या श्री गुंडीचा यात्रा के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व विशेष रूप से ओडिशा के पुरी शहर में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह उत्सव भगवान विष्णु के अवतार भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को समर्पित होता है। देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी लाखों श्रद्धालु इस पवित्र आयोजन में भाग लेते हैं।

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जगन्नाथ रथ यात्रा की तिथि

हिंदू पंचांग के अनुसार, जगन्नाथ रथ यात्रा आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकाली जाती है। वर्ष 2026 में यह पर्व 16 जुलाई 2026 (गुरुवार) को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि 15 जुलाई 2026 को सुबह 11:50 बजे शुरू होकर 16 जुलाई 2026 को सुबह 8:52 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर रथ यात्रा 16 जुलाई को ही आयोजित की जाएगी।

जगन्नाथ रथ यात्रा का महत्व

जगन्नाथ रथ यात्रा का धार्मिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टि से विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस पवित्र यात्रा में शामिल होने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। स्कंद पुराण में भी उल्लेख मिलता है कि जो भक्त रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ का नाम जपते हुए यात्रा में शामिल होते हैं, वे जन्म-जन्मांतर के बंधनों से मुक्त हो जाते हैं।

इसके अलावा यह पर्व समाज में एकता, भाईचारे और समानता का संदेश देता है। लाखों श्रद्धालु एक साथ मिलकर इस भव्य उत्सव को मनाते हैं, जिससे सामाजिक समरसता बढ़ती है।

जगन्नाथ रथ यात्रा की प्रमुख परंपराएं

छेरा पन्हरा रस्म

रथ यात्रा शुरू होने से पहले एक विशेष परंपरा निभाई जाती है जिसे छेरा पन्हरा कहा जाता है। इस रस्म में ओडिशा के राजा स्वयं सोने की झाड़ू से रथ की सफाई करते हैं। यह परंपरा यह संदेश देती है कि सभी भक्त भगवान के सामने समान हैं।

तीन दिव्य रथों का निर्माण

इस यात्रा में तीन अलग-अलग रथ बनाए जाते हैं:

भगवान जगन्नाथ का रथ – नंदीघोष (16 पहिए, लाल रंग)
भगवान बलभद्र का रथ – तालध्वज (14 पहिए, हरा-लाल रंग)
देवी सुभद्रा का रथ – दर्पदलन (12 पहिए, लाल-काला रंग)

इन रथों को भक्तजन रस्सियों से खींचकर जगन्नाथ मंदिर से गुंडीचा मंदिर तक ले जाते हैं।

नौ दिनों का भव्य उत्सव

जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि यह लगभग नौ दिनों तक चलने वाला धार्मिक उत्सव है। भगवान जगन्नाथ गुंडीचा मंदिर में कुछ दिनों तक विश्राम करते हैं, जिसके बाद ‘बहुदा यात्रा’ के माध्यम से वापस अपने मुख्य मंदिर लौटते हैं। इस दौरान भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और मेले का भव्य आयोजन किया जाता है।

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