Jab khuli Kitaab Review: आजकल ऐसी फिल्में कम ही बनती हैं जो परिवार के महत्व को गहराई से समझाती हों। जब खुली किताब ऐसी ही एक फिल्म है जो आपको अपने परिवार के करीब लाती है। कहानी है गोपाल और अनुसुया की, जिनके नाती-पोते हैं। गोपाल अचानक कोर्ट में तलाक की अर्जी देता है, जबकि उसकी पत्नी अनुसुया दो साल से कोमा में है। सवाल उठता है कि जब पत्नी कोमा में है तो तलाक क्यों? यही रहस्य फिल्म की आत्मा है और इसे जानने के लिए दर्शकों को फिल्म देखनी होगी।
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फिल्म का प्रभाव
यह फिल्म आपको भावनात्मक रूप से जोड़ती है। पंकज कपूर और डिंपल कपाड़िया की अदाकारी फिल्म को खास बनाती है। यह फिल्म बताती है कि परिवार हर झगड़े और हर राज से ऊपर होता है। छोटी-छोटी बातों पर रिश्तों को तोड़ना गलत है। फिल्म कहीं भी खिंची हुई नहीं लगती और हर सीन कहानी को आगे बढ़ाता है।
अभिनय की ताकत
पंकज कपूर अपनी अदाकारी से एक बार फिर साबित करते हैं कि वे कमाल के कलाकार हैं। उनकी बॉडी लैंग्वेज और हावभाव किरदार को जीवंत बना देते हैं। डिंपल कपाड़िया का अभिनय भी शानदार है और यह दिखाता है कि उन्हें बड़े रोल्स में और ज्यादा देखा जाना चाहिए। दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री दर्शकों को बांधे रखती है। अपारशक्ति खुराना वकील के किरदार में जमे हैं, जबकि मानसी पारेख, समीर सोनी और नौशीद सायरसी ने भी बेहतरीन काम किया है।
लेखन और निर्देशन
फिल्म के लेखक और निर्देशक सौरभ शुक्ला हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि वे न केवल अच्छे अभिनेता हैं बल्कि शानदार लेखक और निर्देशक भी हैं। फिल्म की राइटिंग गहरी है और दर्शकों को परिवार की अहमियत महसूस कराती है। लोकेशन और किरदारों का इस्तेमाल भी बेहतरीन तरीके से किया गया है।
पारिवारिक महत्व का संदेश
फिल्म का सबसे बड़ा संदेश यही है कि परिवार सबसे जरूरी है। रिश्तों में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं लेकिन उन्हें तोड़ना समाधान नहीं है। यह फिल्म दर्शकों को सिखाती है कि परिवार को हर हाल में साथ रखना चाहिए।
जब खुली किताब एक फील-गुड फिल्म है जिसे आप अपने परिवार के साथ देख सकते हैं। यह फिल्म आपको हंसाती है, रुलाती है और सोचने पर मजबूर करती है। अप्लॉज एंटरटेनमेंट ने इसे बनाया है और एक बार फिर साबित किया है कि वे अच्छे कंटेंट पर ही भरोसा करते हैं।
रेटिंग : 3 स्टार्स
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