J&K Electricity Bill: जम्मू-कश्मीर में 6.83% महंगी हुई बिजली, विपक्ष ने किया प्रदर्शन का ऐलान

जम्मू-कश्मीर में बिजली टैरिफ में औसतन 6.83 फीसदी बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है, जो 1 सितंबर 2026 से लागू होगी। फैसले के बाद विपक्षी दलों ने उमर अब्दुल्ला सरकार को घेरते हुए प्रदर्शन का ऐलान किया है। बीजेपी ने 31 अगस्त को सचिवालय घेराव की चेतावनी दी है।

J&K Electricity Bill

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 24, 2026

J&K Electricity Bill:  जम्मू-कश्मीर के बिजली उपभोक्ताओं को आने वाले दिनों में बढ़े हुए बिल का सामना करना पड़ सकता है। चीनी और प्याज जैसी जरूरी वस्तुओं की कीमतों के बीच बिजली दरों में वृद्धि ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। संयुक्त बिजली नियामक आयोग (JERC) ने केंद्र शासित प्रदेश में बिजली की दरों में औसतन 6.83 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। नई दरें 1 सितंबर 2026 से लागू होंगी।

KPDCL और JPDCL के उपभोक्ताओं पर पड़ेगा असर

नए टैरिफ का असर जम्मू-कश्मीर के दोनों प्रमुख बिजली वितरण निगमों के उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। इनमें कश्मीर पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KPDCL) और जम्मू पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (JPDCL) शामिल हैं। यानी घाटी से लेकर जम्मू क्षेत्र तक घरेलू और अन्य श्रेणी के बिजली उपभोक्ताओं को नई दरों के अनुसार भुगतान करना होगा।

त्योहारों से पहले बढ़ी बिजली की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

बिजली दरों में यह वृद्धि ऐसे समय हुई है, जब त्योहारों का मौसम नजदीक है और सर्दियों की तैयारी भी शुरू होने वाली है। जम्मू-कश्मीर में सर्दियों के दौरान बिजली की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को आशंका है कि बढ़ी हुई दरों का सीधा असर उनके मासिक बजट पर पड़ेगा। खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च चिंता का विषय बन सकता है।

नई दरों को लेकर घरेलू उपभोक्ताओं के लिए स्लैब तय

नई व्यवस्था के तहत घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग खपत स्लैब के हिसाब से दरें निर्धारित की गई हैं। 0 से 200 यूनिट तक बिजली की कीमत 2.45 रुपये प्रति यूनिट, जबकि 201 से 400 यूनिट तक 4.20 रुपये प्रति यूनिट रखी गई है। वहीं, 400 यूनिट से अधिक खपत पर 4.60 रुपये प्रति यूनिट की दर लागू होगी। वास्तविक बिल पर अन्य शुल्क और लागू प्रावधानों का भी असर हो सकता है।

राजस्व घाटा कम करने के लिए लिया गया फैसला

JERC के अनुसार, बिजली वितरण कंपनियों के राजस्व घाटे को कम करने के उद्देश्य से टैरिफ में संशोधन किया गया है। आयोग ने KPDCL और JPDCL की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। आयोग के मुताबिक, यदि सरकार की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी को गणना में शामिल नहीं किया जाता, तो बिजली दरों में वृद्धि करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच सकती थी।

सरकार के पुराने वादे को लेकर विपक्ष हमलावर

बिजली दरों में बढ़ोतरी के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति भी गरमा गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने विधानसभा चुनाव के दौरान अपने घोषणा पत्र में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों और आम उपभोक्ताओं को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया था। विपक्ष अब इसी वादे को लेकर सरकार पर निशाना साध रहा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि राहत देने के बजाय उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।

PDP ने विरोध प्रदर्शन का किया ऐलान

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) ने बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि जनता पहले से महंगाई और बढ़ते घरेलू खर्च से परेशान है, ऐसे में बिजली महंगी करना आम परिवारों की मुश्किलें बढ़ाएगा। श्रीनगर में प्रदर्शन के जरिए पार्टी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रही है।

सर्दियों से पहले बढ़ी बिजली की लागत बनी बड़ा मुद्दा

जम्मू-कश्मीर में सर्दियों के दौरान हीटिंग उपकरणों और अन्य बिजली आधारित साधनों का इस्तेमाल बढ़ने के कारण खपत बढ़ सकती है। ऐसे में सितंबर से लागू होने वाली नई दरों को लेकर उपभोक्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है। सरकार और नियामक आयोग के फैसले के बीच अब विपक्ष का आंदोलन किस तरह आगे बढ़ता है और जनता पर इसका राजनीतिक असर कितना पड़ता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

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