Karnataka Assembly Protest: विधानसभा घेराव की कोशिश पर पुलिस का एक्शन, सीटी रवि समेत कई नेता हिरासत में

कर्नाटक में बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर BJP का बड़ा प्रदर्शन, विधानसभा घेराव की कोशिश के बीच सीटी रवि समेत कई नेता हिरासत में लिए गए। पुलिस की कार्रवाई के बाद सियासत गरमा गई है। आखिर BJP का यह प्रदर्शन क्यों हुआ और क्या है वाल्मीकि निगम घोटाले का पूरा मामला?

विधानसभा घेराव की कोशिश पर पुलिस का एक्शन

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अगस्त 24, 2026

Karnataka Assembly Protest: कर्नाटक में बी. नागेंद्र को कैबिनेट से हटाने की मांग को लेकर बीजेपी और जेडीएस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विपक्षी दलों ने विधानसभा का घेराव करने के लिए बेंगलुरु में मार्च निकाला। हालांकि, प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने के कारण पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बीजेपी के वरिष्ठ नेता सी.टी. रवि समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को प्रिवेंटिव कस्टडी में ले लिया।

प्रदर्शन में कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र सहित बीजेपी और जेडीएस के कई नेता और समर्थक शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर दबाव बनाने की कोशिश की और बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग उठाई।

कश्मीरी पंडितों को आतंकियों ने भेजी धमकी, पत्र में नाम लिखकर कहा- ‘हर हरकत

हिरासत में लिए जाने से पहले सीटी रवि का आरोप

पुलिस हिरासत में लिए जाने से पहले सी.टी. रवि ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री रहे बी. नागेंद्र पर महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के फंड में कथित अनियमितताओं और धन की हेराफेरी से जुड़े गंभीर आरोप हैं।

रवि ने कहा कि इस मामले में नागेंद्र की भूमिका को लेकर पहले भी जांच और गिरफ्तारी की कार्रवाई हो चुकी है। बीजेपी का कहना है कि ऐसे गंभीर आरोपों के बावजूद उन्हें दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

विधानसभा में भी विपक्ष का हंगामा

बीजेपी लगातार बी. नागेंद्र को कैबिनेट से हटाने की मांग कर रही है। पार्टी का आरोप है कि कथित 89 करोड़ रुपये के वाल्मीकि निगम घोटाले में उनकी भूमिका को लेकर गंभीर सवाल हैं। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष विधानसभा की कार्यवाही को लेकर भी सरकार पर दबाव बना रहा है।

विपक्ष के नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया कि कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में हुए कथित वित्तीय घोटाले के चलते नागेंद्र को मंत्री पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। बीजेपी कार्यकर्ताओं की ओर से पिछले कई दिनों से इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।

फ्रीडम पार्क से विधान सौधा तक मार्च

बीजेपी ने प्रदर्शन के तहत बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क से मार्च निकाला। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विधान सौधा की ओर बढ़ते हुए विधानसभा का घेराव करने की कोशिश की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी।

प्रदर्शन के दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कई नेताओं और समर्थकों को हिरासत में लिया। बीजेपी ने इसे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के अधिकार पर कार्रवाई बताया, जबकि पुलिस की ओर से अनुमति नहीं होने को कार्रवाई की वजह बताया गया।

क्या है वाल्मीकि निगम घोटाला?

महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़ा मामला मई-जून 2024 में सामने आया था। उस समय निगम के अकाउंट सुपरिटेंडेंट पी. चंद्रशेखरन ने आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने कथित तौर पर एक सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसमें निगम के भीतर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था।

जांच के दौरान यूनियन बैंक में निगम के खाते से करीब 89 करोड़ रुपये कथित तौर पर अवैध तरीके से अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई। बाद की जांच में कुल मिलाकर लगभग 187 करोड़ रुपये के फंड में कथित हेरफेर की जानकारी सामने आई।

नागेंद्र फिर कैबिनेट में शामिल

घोटाले को लेकर विवाद बढ़ने और केंद्रीय एजेंसियों की जांच के बीच बी. नागेंद्र ने 6 जून 2024 को सिद्धारमैया सरकार से इस्तीफा दे दिया था। उस समय वह अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री थे।

हालांकि, 3 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के कैबिनेट विस्तार के दौरान बी. नागेंद्र की दोबारा मंत्रिमंडल में एंट्री हुई। उन्हें योजना और सांख्यिकी विभाग की जिम्मेदारी दी गई। उनके दोबारा मंत्री बनने के बाद बीजेपी ने इस पुराने मामले को लेकर सरकार पर हमला तेज कर दिया है और अब उनका इस्तीफा मांग रही है।

फिलहाल यह मुद्दा कर्नाटक की सियासत में एक बार फिर गरमा गया है और आने वाले दिनों में सरकार तथा विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने के आसार हैं।

उत्तर प्रदेश में 17 IAS अधिकारियों का तबादला, संगीता सिंह को मुरादाबाद