ITR Refund Status : इनकम टैक्स रिफंड कम क्यों आता है? जानें मुख्य कारण और इसे ठीक करने का आसान तरीका

आईटीआर दाखिल करने के बाद कई करदाताओं को उम्मीद से कम इनकम टैक्स रिफंड मिलता है। इसके पीछे टैक्स देनदारी, गलत जानकारी, टीडीएस में अंतर या अन्य कारण हो सकते हैं। आखिर आपका रिफंड कम क्यों आया और इसे भविष्य में कैसे सुधारा जा सकता है, जानिए पूरी जानकारी।

ITR Refund Status

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 2, 2026

ITR Refund Status :  इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने के बाद हर करदाता को अपने रिफंड का बेसब्री से इंतजार रहता है। आमतौर पर ई-वेरिफिकेशन के 4 से 5 सप्ताह के भीतर विभाग रिफंड जारी कर देता है। हालांकि, कई बार टैक्सपेयर्स इस स्थिति से हैरान रह जाते हैं कि फाइल किए गए रिटर्न की तुलना में उन्हें प्राप्त रिफंड की राशि काफी कम होती है। यह कटौती कोई तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि आयकर विभाग की एक व्यवस्थित प्रक्रिया का परिणाम है। विभाग रिटर्न की प्रोसेसिंग के दौरान आपके द्वारा दी गई जानकारियों का गहन मिलान करता है और इसी प्रक्रिया के बाद अंतिम रिफंड राशि निर्धारित की जाती है।

डेटा मिसमैच: रिफंड घटने का सबसे बड़ा तकनीकी कारण

रिफंड राशि कम होने का मुख्य कारण ‘डेटा मिसमैच’ (Data Mismatch) है। इनकम टैक्स विभाग आपके ITR की तुलना फॉर्म 26AS, AIS (एन्युअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट), TIS (टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी) और TDS रिकॉर्ड से करता है। यदि आपने बैंक ब्याज, शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड से प्राप्त पूंजीगत लाभ (Capital Gains) को अपनी आय में नहीं दर्शाया है, तो विभाग स्वयं ही उस आय को जोड़ देता है। इसके अतिरिक्त, गलत टैक्स कटौती का दावा करना या एडवांस टैक्स का विवरण गलत भरना भी रिफंड को कम कर सकता है। ऐसे किसी भी बदलाव की स्थिति में विभाग धारा 143(1) के अंतर्गत टैक्सपेयर को एक ‘इंटीमेशन नोटिस’ भेजता है, जिसमें स्पष्ट किया जाता है कि रिफंड क्यों घटाया गया है।

पुराना बकाया और पेनल्टी: रिफंड में कटौती के अन्य कारक

रिफंड कम होने का दूसरा प्रमुख कारण ‘पास्ट टैक्स डिमांड’ है। यदि पिछले किसी वित्तीय वर्ष का आपका कोई टैक्स बकाया है, तो आयकर विभाग को यह अधिकार है कि वह चालू वर्ष के रिफंड से उस पुराने बकाये की भरपाई कर ले। हालांकि, ऐसा करने से पहले पोर्टल पर एक नोटिस भेजा जाता है, जिस पर आप अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं। साथ ही, विलंब से रिटर्न भरने पर भी रिफंड प्रभावित होता है। इनकम टैक्स कानून की धारा 234A, 234B और 234C के तहत ब्याज और लेट फीस का प्रावधान है। यदि आप समय सीमा के भीतर रिटर्न नहीं भरते, तो ये पेनल्टी आपके रिफंड की राशि से ही काट ली जाती है।

पूर्ण रिफंड सुनिश्चित करने के लिए अपनाएं ये सावधानियां

यदि आप चाहते हैं कि आपका रिफंड बिना किसी कटौती के प्राप्त हो, तो सावधानी बरतना आवश्यक है। ITR फाइल करने से पहले अपने AIS और फॉर्म 26AS का मिलान जरूर करें और उसमें दर्ज आय को ही अपने रिटर्न में दिखाएं। अपनी कमाई के सभी स्रोतों का पूरी ईमानदारी से विवरण दें और अपनी स्थिति के अनुसार सही ITR फॉर्म का चुनाव करें। इसके अलावा, अपने बैंक अकाउंट को प्री-वैलिडेट करना न भूलें, ताकि पैसा सीधे आपके खाते में जमा हो सके। समय पर ई-वेरिफिकेशन और सही जानकारी न केवल रिफंड को तेज बनाती है, बल्कि अनावश्यक कटौतियों से भी बचाती है।

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