Israel Pakistan Target: इजरायल का अगला निशाना पाकिस्तान? परमाणु शक्ति और ग्रेटर इजरायल के बीच छिड़ी जंग

मिडिल ईस्ट में ईरान के खिलाफ जारी 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के बीच एक नई थ्योरी ने दुनिया को डरा दिया है। क्या इजरायल अपनी 'ग्रेटर इजरायल' की सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए पाकिस्तान की परमाणु शक्ति को चुनौती देगा? तुर्की, सऊदी और पाकिस्तान के 'इस्लामिक नाटो' गठन के बीच क्या होगा अगला बड़ा धमाका?

Israel Pakistan Target

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 15, 2026

Israel Pakistan Target:  मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध ने अब दक्षिण एशिया की नींद उड़ा दी है। इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों के साथ-साथ लेबनान और गाजा में मची तबाही ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों और सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच यह डर गहराता जा रहा है कि ईरान के बाद इजरायल का अगला निशाना पाकिस्तान हो सकता है। सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल की आक्रामक नीति केवल अपने पड़ोसियों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह उन सभी देशों को खतरे के रूप में देखता है जो उसकी सैन्य संप्रभुता को चुनौती दे सकते हैं।

विशेषज्ञों की चेतावनी: अजीब मगर संभव है यह खतरा

दक्षिण एशिया के मामलों के प्रसिद्ध शोधकर्ता अल्ताफ परवेज ने अपने हालिया लेख में इस मुद्दे पर गंभीर विश्लेषण प्रस्तुत किया है। उन्होंने तर्क दिया है कि हालांकि पाकिस्तान पर इजरायली हमले की बात पहली बार सुनने में काल्पनिक लग सकती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति में इसे पूरी तरह खारिज करना मूर्खता होगी। संयुक्त राष्ट्र (UN) और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) जैसी वैश्विक संस्थाओं की वर्तमान विफलता ने आक्रामक देशों को खुली छूट दे दी है। इसके साथ ही, इजरायल और भारत के बीच बढ़ते सैन्य व कूटनीतिक संबंधों ने पाकिस्तान की सुरक्षा चिंताओं को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का डर और क्षेत्रीय समीकरण

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से अपनी आशंकाएं साझा की हैं। उनके अनुसार, यदि ईरान में इजरायल का प्रभाव बढ़ता है, तो पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति उसे असुरक्षित बना देगी। आसिफ का मानना है कि इजरायल सीधे हमले के बजाय भारत और अफगानिस्तान के माध्यम से ‘प्रॉक्सि वॉर’ या रणनीतिक घेराबंदी का सहारा ले सकता है। पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौती उसकी ईरान के साथ लगती लंबी सीमा है। यदि ईरान अस्थिर होता है, तो इजरायल के लिए पाकिस्तान की दहलीज तक पहुँचना आसान हो जाएगा, जो पूरे दक्षिण एशिया के शक्ति संतुलन को बिगाड़ सकता है।

परमाणु क्षमता: इजरायल की आंखों की किरकिरी

असली विवाद की जड़ पाकिस्तान की परमाणु क्षमता है। पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र मुस्लिम-बहुल देश है जिसके पास परमाणु हथियार हैं, और यही तथ्य इजरायल को सबसे ज्यादा खटकता है। इजरायल की नीति हमेशा से यह रही है कि किसी भी इस्लामी राष्ट्र के पास ऐसी विनाशकारी तकनीक न हो जो उसके अस्तित्व के लिए खतरा बन सके। इजरायल को डर है कि यदि पाकिस्तान की परमाणु तकनीक अन्य मुस्लिम देशों तक पहुँचती है, तो उसका ‘ग्रेटर इजरायल’ का सपना और क्षेत्रीय दबदबा हमेशा के लिए खत्म हो सकता है। यह परमाणु वर्चस्व की लड़ाई ही है जो दोनों देशों के बीच 3,000 किलोमीटर की दूरी होने के बावजूद तनाव को कम नहीं होने देती।

ग्रेटर इजरायल का सपना और सामरिक चुनौतियां

इजरायल के रणनीतिकार अक्सर ‘ग्रेटर इजरायल’ की अवधारणा पर चर्चा करते हैं, जिसमें वह किसी भी मजबूत मुस्लिम सेना को अपने विरोध में खड़ा नहीं देखना चाहता। पाकिस्तान की सैन्य शक्ति और उसकी परमाणु मिसाइलें इस सपने के रास्ते में एक बड़ा अवरोध हैं। हालांकि पाकिस्तान और इजरायल सीधे पड़ोसी नहीं हैं, लेकिन आधुनिक युद्ध के दौर में दूरी मायने नहीं रखती। साइबर हमलों, ड्रोन तकनीक और कूटनीतिक अलगाव के जरिए इजरायल पाकिस्तान को कमजोर करने की कोशिश कर सकता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान अपनी सुरक्षा के लिए चीन और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर क्या रणनीति अपनाता है।

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