Iran-US War 2026 : तेहरान और वाशिंगटन के बीच युद्ध की सुगबुगाहट ने मध्य पूर्व (Middle East) को विनाश के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। अमेरिकी धमकियों और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बीच ईरान ने अपनी रणनीतिक घेराबंदी पूरी कर ली है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने ईरान पर संभावित सैन्य हमले की रूपरेखा तैयार कर ली है, जिसे ट्रंप की हरी झंडी मिलते ही अंजाम दिया जा सकता है। इसके पलटवार में तेहरान ने एक ऐसी आक्रामक योजना बनाई है, जिसका लक्ष्य युद्ध की शुरुआत में ही अमेरिका को इतना बड़ा झटका देना है कि पूरे क्षेत्र में ‘भगदड़’ की स्थिति पैदा हो जाए और अमेरिकी सैन्य तंत्र पंगु हो जाए।
गवर्नरों की शक्तियों में इजाफा और आंतरिक सुरक्षा का कड़ा पहरा
ईरान ने संभावित युद्ध को देखते हुए अपने आंतरिक प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। तेहरान ने देश के सभी गवर्नरों के अधिकारों और शक्तियों में अभूतपूर्व वृद्धि कर दी है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य यह है कि युद्ध की स्थिति में आपूर्ति श्रृंखला बाधित न हो। गवर्नर अपने विवेक से संसाधनों और रसद पर निर्णय ले सकेंगे, ताकि देश में अराजकता या ‘त्राहिमाम’ की स्थिति न बने। ईरान का मानना है कि इस विकेंद्रीकृत व्यवस्था के जरिए वे अमेरिका को एक लंबी और थका देने वाली जंग में उलझाए रख सकेंगे।
होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी और ऊर्जा संकट का खतरा
ईरान की युद्ध योजना का सबसे घातक हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करना है। ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग के भीतर मिसाइलों और समुद्री बारूद का भारी जखीरा तैनात कर दिया है। तेहरान की योजना है कि हमला होते ही इस मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया जाए। यदि ऐसा होता है, तो एशिया और मिडिल ईस्ट सहित पूरी दुनिया में ऊर्जा का भीषण संकट खड़ा हो जाएगा, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है। ईरान इसे अपने सबसे बड़े ‘इकोनॉमिक वेपन’ के तौर पर देख रहा है।
अमेरिकी सैनिकों की ‘हिटलिस्ट’ और भारी हताहतों का लक्ष्य
ईरान ने मनोवैज्ञानिक और जमीनी युद्ध के लिए लगभग 40,000 अमेरिकी सैनिकों को अपनी हिटलिस्ट में रखा है। तेहरान का लक्ष्य इन सैनिकों को निशाना बनाकर अमेरिका के मनोबल को तोड़ना है। ईरानी सैन्य रणनीतिकारों का अनुमान है कि इस संभावित युद्ध में अमेरिकी हताहतों की संख्या अफगानिस्तान युद्ध (7,000) के मुकाबले कई गुना अधिक होगी। उनका मानना है कि अधिक संख्या में ताबूत जब अमेरिका लौटेंगे, तो वाशिंगटन पर युद्ध रोकने का भारी घरेलू दबाव बनेगा।
प्रॉक्सी वार और नेतृत्व की सुरक्षा का नया चक्रव्यूह
ईरान सीधे युद्ध के अलावा अपने ‘प्रॉक्सी नेटवर्क’ का भी इस्तेमाल करेगा। यमन के हूती विद्रोही, लेबनान का हिजबुल्लाह और इराक के कताइब जैसे समूह लाल सागर और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में अमेरिकी हितों को निशाना बनाएंगे। वहीं, नेतृत्व की सुरक्षा के लिए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को एक अज्ञात सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया है। वर्तमान में शासन का संचालन उनका छोटा बेटा देख रहा है, ताकि तख्तापलट या ‘टारगेटेड किलिंग’ की किसी भी कोशिश को नाकाम किया जा सके।
ग्लोबल फायर पावर: कितनी मजबूत है ईरान की सैन्य मशीनरी?
ग्लोबल फायर पावर की रैंकिंग के अनुसार, ईरान सैन्य ताकत के मामले में दुनिया में 16वें स्थान पर है। ईरान के पास 6 लाख 10 हजार सक्रिय जवान और 3 लाख रिजर्व सैनिक हैं। इसके अलावा, 1.5 लाख जवानों वाली शक्तिशाली ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ सीधे सत्ता की रक्षा के लिए समर्पित है। वायु और नौसेना के मोर्चे पर ईरान के पास 188 लड़ाकू विमान, 1500 से अधिक मल्टीपल लॉन्च रॉकेट प्रोजेक्टर और एक मजबूत पनडुब्बी बेड़ा है, जो खाड़ी के पानी में अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती पेश कर सकता है।
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