Iran-US War: मिसाइलों के भीषण खेल में खाली हो रहे अमेरिका के रक्षा भंडार, ईरान के पलटवार से रक्षा प्रणालियों पर बढ़ा दबाव

ईरान और अमेरिका के बीच जारी 'मिसाइल वॉर' में एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सैकड़ों ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने के चक्कर में अमेरिका और इजरायल के कीमती इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार तेजी से खत्म हो रहा है। क्या यह रसद की कमी युद्ध का रुख बदल देगी?

Iran-US War

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 3, 2026

Iran-US War:  ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने अब एक नई चिंता को जन्म दिया है—हथियारों की संभावित कमी। पिछले चार दिनों में अमेरिकी सेना ने ईरान की सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने का दावा किया है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह लड़ाई अगर लंबी चली तो अमेरिका और उसके सहयोगियों के सामने इंटरसेप्टर मिसाइलों की उपलब्धता बड़ी चुनौती बन सकती है। लगातार हो रहे हमलों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या अमेरिकी रक्षा कवच लंबे समय तक इस दबाव को झेल पाएगा।

ईरान का विशाल मिसाइल भंडार बना चुनौती

इजराइल के हालिया आकलन के अनुसार ईरान के पास करीब 2,500 बैलिस्टिक मिसाइलों का बड़ा जखीरा मौजूद है। यह संख्या अमेरिका और इजराइल के संयुक्त इंटरसेप्टर स्टॉक से अधिक बताई जा रही है। Stimson Center की विशेषज्ञ केली ग्रिको ने चेतावनी दी है कि यदि हमले इसी गति से जारी रहे, तो इंटरसेप्टर मिसाइलें ईरान के मिसाइल भंडार से पहले समाप्त हो सकती हैं। यह स्थिति रणनीतिक रूप से अमेरिका के लिए चिंताजनक मानी जा रही है।

महंगी और सीमित इंटरसेप्टर प्रणालियां

ईरानी मिसाइलों को रोकने के लिए जिन इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल किया जा रहा है, वे अत्यधिक महंगी और सीमित संख्या में उपलब्ध हैं। समस्या यह है कि युद्ध के दौरान इनका उपयोग तेज गति से हो रहा है, जबकि उत्पादन क्षमता इतनी तेज नहीं है कि तुरंत कमी पूरी की जा सके। इसके अलावा यूरोप और इंडो-पैसिफिक क्षेत्रों में भी इन रक्षा प्रणालियों की मांग बनी हुई है, जिससे आपूर्ति और जटिल हो गई है।

लंबा युद्ध बढ़ा सकता है दबाव

पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump और कई रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष चार से छह सप्ताह तक खिंच सकता है। Atlantic Council के विश्लेषक जो कोस्टा के अनुसार, यदि युद्ध लंबा चलता है तो अमेरिका के रणनीतिक भंडार पर भारी दबाव पड़ेगा। इन हथियारों की आवश्यकता भविष्य में चीन और रूस जैसी महाशक्तियों से संभावित टकराव के लिए भी पड़ सकती है, इसलिए भंडार का संतुलन बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है।

समय-सीमा और जवाबी रणनीति

अमेरिकी रक्षा प्रमुख पीट हेगसेथ ने संकेत दिया है कि युद्ध दो से छह सप्ताह तक जारी रह सकता है। फिलहाल अमेरिका और इजराइल की रणनीति ईरान के मिसाइल लॉन्च ठिकानों को ढूंढकर नष्ट करने पर केंद्रित है। विश्लेषकों का मानना है कि इस संघर्ष का परिणाम काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान की लॉन्चिंग क्षमता पहले खत्म होती है या अमेरिका का रक्षा कवच पहले कमजोर पड़ता है।

क्षेत्रीय देशों की भूमिका और बढ़ता तनाव

हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात के एयर डिफेंस सिस्टम ने 9 बैलिस्टिक मिसाइलों और 148 ड्रोन को मार गिराने में सफलता हासिल की। हालांकि ड्रोन हमलों को रोकने में मौजूदा प्रणालियां अपेक्षाकृत प्रभावी साबित हो रही हैं, लेकिन लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकना कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण और महंगा है। हर इंटरसेप्शन की आर्थिक लागत भी काफी अधिक है, जो लंबे समय में रणनीतिक दबाव बढ़ा सकती है।

वैश्विक संतुलन पर संभावित असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका का मिसाइल भंडार तेजी से घटता है, तो यह चीन और रूस के लिए रणनीतिक अवसर बन सकता है। जब अमेरिका की सैन्य शक्ति का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व में व्यस्त रहेगा, तब वैश्विक शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि अमेरिकी प्रशासन अब ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को जल्द से जल्द निष्क्रिय करने की दिशा में आक्रामक रणनीति पर काम कर रहा है, ताकि दीर्घकालिक सुरक्षा संतुलन कायम रखा जा सके।

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