Iran-US Conflict: ईरान का अमेरिका पर पलटवार, पांच देशों में सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले शुरू

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने मध्य पूर्व में नई चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। पांच देशों तक फैले इस संघर्ष ने वैश्विक सुरक्षा, तेल बाजार और कूटनीतिक संबंधों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Iran-US Conflict

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 18, 2026

Iran-US Conflict: पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव शुक्रवार को एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। अमेरिका द्वारा ईरान के रिहायशी इलाकों और नागरिक बुनियादी ढांचों पर लगातार की जा रही बमबारी के जवाब में, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। ईरान की सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ‘ऑपरेशन नस्र 2’ के तहत कतर, कुवैत, जॉर्डन, ओमान और सीरिया में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया है। इस हमले में मिसाइलों और ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध का खतरा गहरा गया है।

रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर हमले का ईरानी दावा

ईरानी सरकारी मीडिया (IRIB) की रिपोर्ट के अनुसार, इस जवाबी कार्रवाई में अमेरिका को भारी रणनीतिक नुकसान पहुँचाया गया है। ईरान का दावा है कि कतर के अल-उदीद एयर बेस पर हुए हमले में अमेरिका का लॉन्ग-रेंज रडार सिस्टम और कई हवाई ईंधन भरने वाले विमान नष्ट हो गए हैं। इसके अलावा, ईरान ने कुवैत में अमेरिकी ‘हाइमार्स’ (HIMARS) लॉन्चर को नष्ट करने, जॉर्डन में अमेरिकी लड़ाकू विमानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने और ओमान में महत्वपूर्ण एयर कंट्रोल रडार को तबाह करने का दावा किया है। सबसे चौंकाने वाला दावा सीरिया के अल-तंफ क्षेत्र से आया है, जहाँ ईरान ने अमेरिकी कमांड सेंटर को मटियामेट करने और कुछ अमेरिकी सैनिकों को बंदी बनाने की बात कही है।

अमेरिका ने खारिज किए ईरानी दावे

ईरान द्वारा किए जा रहे इन दावों को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अमेरिकी सेना ने सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्ट किया है कि सीरिया या अन्य किसी भी स्थान पर अमेरिकी सैनिकों को बंधक नहीं बनाया गया है और न ही किसी सैनिक की जान गई है। CENTCOM ने ईरान के इन दावों को केवल दुष्प्रचार और झूठा करार दिया है। हालांकि, क्षेत्र में मौजूदा तनाव अपनी चरम सीमा पर है और दोनों देश एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए हैं, जिससे वैश्विक सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

नागरिकों पर हमलों के बाद बढ़ा टकराव

इस व्यापक संघर्ष की जड़ अमेरिका द्वारा ईरान के होर्मोजगान प्रांत में की गई बमबारी में निहित है। पिछले कई दिनों से अमेरिका ने कोहौरेस्तान और गिरिवह के दो रणनीतिक पुलों, बंदर अब्बास रेलवे जंक्शन और तपे अल्लाह अकबर जैसे घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया था। ईरान का कहना है कि नागरिक ठिकानों पर अमेरिका का हमला अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है, जिसका बदला लेना उनके लिए अनिवार्य हो गया था। इसी कड़ी में ईरान ने अब अमेरिकी सेना के विरुद्ध सीधा मोर्चा खोल दिया है।

युद्ध के साये में वैश्विक कूटनीति

वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि पश्चिम एशिया में कूटनीति की संभावनाएं अब लगभग समाप्त हो चुकी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह सैन्य टकराव न केवल क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बनेगा, बल्कि इससे तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा प्रतिकूल असर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए है। दुनिया भर के देश शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि दोनों राष्ट्र इस समय पीछे हटने के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं, जिससे भविष्य में बड़ी तबाही की आशंका बनी हुई है।

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