Iran UAE War : सीजफायर के बाद भी नहीं रुके हमले, यूएई ने ईरान में क्या तबाही मचाई?

मिडिल ईस्ट में सीजफायर के बाद भी नहीं थमी जंग, यूएई ने अमेरिका और इजरायल की खुफिया मदद से ईरान के भीतर घुसकर भीषण तबाही मचाई है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा, आखिर ईरान के किन महाविनाशकारी ठिकानों को यूएई ने पूरी तरह कर दिया जमींदोज?

Iran UAE War

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 30, 2026

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Iran UAE War : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का प्रभाव अब पूरे खाड़ी क्षेत्र में दिखाई देने लगा है। हालिया रिपोर्टों से संकेत मिले हैं कि इस संघर्ष में कई क्षेत्रीय देशों की भूमिका पहले की तुलना में अधिक सक्रिय हो सकती है। इसी क्रम में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है, जिसने मध्य पूर्व की राजनीतिक और सैन्य स्थिति को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

रिपोर्ट में यूएई के कथित सैन्य अभियानों का दावा

अमेरिकी समाचार पत्र वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अप्रैल में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा के कुछ दिनों बाद यूएई ने ईरान के भीतर कई जवाबी हवाई हमले किए थे। रिपोर्ट के अनुसार, ये अभियान सीमित नहीं थे, बल्कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाकर अंजाम दिए गए। यदि ये दावे सही साबित होते हैं, तो यह संकेत होगा कि यूएई की भागीदारी केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने प्रत्यक्ष सैन्य भूमिका भी निभाई।

ईरान के महत्वपूर्ण ठिकानों को बनाया गया निशाना

रिपोर्ट में कहा गया है कि कथित हमलों के दौरान ईरान की कई अहम आर्थिक और सामरिक परिसंपत्तियों को निशाना बनाया गया। इनमें फारस की खाड़ी में स्थित लावन द्वीप की रिफाइनरी, होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट केशम और अबू मूसा द्वीप, बंदर अब्बास का प्रमुख बंदरगाह शहर और असलुयेह का विशाल पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स शामिल बताए गए हैं। ये सभी स्थान ईरान की ऊर्जा और समुद्री गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

ऊर्जा केंद्रों पर हमलों ने बढ़ाई वैश्विक चिंता

विशेष रूप से असलुयेह ऊर्जा केंद्र पर हुए कथित हमलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता पैदा कर दी। यह क्षेत्र ईरान के ऊर्जा निर्यात का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, इन घटनाओं के बाद कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर चिंता व्यक्त की। ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के कारण वैश्विक बाजारों में भी अस्थिरता देखने को मिली।

अमेरिका ने क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिश की

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऊर्जा अवसंरचना पर हमलों के बाद अमेरिका ने स्थिति को और अधिक गंभीर होने से रोकने के लिए सक्रिय प्रयास किए। बताया गया कि वाशिंगटन ने अपने सहयोगियों पर दबाव डाला कि ईरान की ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाने वाली कार्रवाइयों को सीमित किया जाए। अमेरिकी प्रशासन को आशंका थी कि यदि ऐसे हमले जारी रहे तो पूरे मध्य पूर्व में व्यापक सैन्य टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है।

संयुक्त अभियान में सहयोग का दावा

मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में दावा किया गया कि यूएई ने ईरान के खिलाफ चलाए गए एक बड़े सैन्य अभियान में अमेरिका और इजरायल के साथ समन्वय किया। कहा गया कि युद्धविराम की घोषणा के बाद भी कई सप्ताह तक विभिन्न स्तरों पर सैन्य गतिविधियां जारी रहीं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन रिपोर्ट ने क्षेत्रीय राजनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

ईरान के खिलाफ सख्त रुख के संकेत

इन घटनाओं के संदर्भ में यूएई की भूमिका को खाड़ी देशों की पारंपरिक रणनीति से अलग माना जा रहा है। जहां कई क्षेत्रीय देश अपने ऊपर संभावित हमलों से बचाव पर केंद्रित रहे, वहीं यूएई को एक ऐसे देश के रूप में देखा जा रहा है जिसने ईरान के प्रति अधिक कठोर और सक्रिय रुख अपनाया। विश्लेषकों का मानना है कि यह संदेश देने की कोशिश हो सकती है कि क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का जवाब केवल रक्षात्मक उपायों से नहीं, बल्कि प्रतिरोधात्मक रणनीति से भी दिया जा सकता है।

मध्य पूर्व की राजनीति में बढ़ सकती है नई हलचल

यदि रिपोर्ट में किए गए दावे भविष्य में प्रमाणित होते हैं, तो इससे मध्य पूर्व की शक्ति संतुलन राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। यूएई, अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच संबंधों की दिशा आने वाले समय में क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा बाजार और कूटनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। फिलहाल इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें बनी हुई हैं।

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