Strait of Hormuz: ‘केवल दुश्मनों के लिए बंद है रास्ता’, होर्मुज की नाकेबंदी पर ईरान का दुनिया को दोटूक जवाब

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Strait of Hormuz

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 15, 2026

Strait of Hormuz:  मध्य पूर्व में युद्ध की ज्वाला शांत होने के बजाय और अधिक भड़कती जा रही है। इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर किए जा रहे निरंतर हमलों ने वैश्विक तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है। इन हमलों के जवाब में ईरान भी अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन कर रहा है और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दे रहा है। इस युद्ध के बीच सबसे बड़ी चिंता ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) को लेकर बनी हुई है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। इस रणनीतिक जलमार्ग की स्थिति को लेकर दुनिया भर की निगाहें ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

विदेश मंत्री अराघची का स्पष्टीकरण: ‘स्ट्रेट पूरी तरह बंद नहीं है’

होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी को लेकर फैली खबरों के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने एक बड़ा और स्पष्ट बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण जलमार्ग सभी देशों के लिए बंद नहीं किया गया है। अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरान का उद्देश्य वैश्विक व्यापार को रोकना नहीं है, बल्कि अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उनके अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट में जारी प्रतिबंध केवल उन देशों के लिए हैं जो ईरान की संप्रभुता के खिलाफ काम कर रहे हैं। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में मची खलबली को कुछ हद तक शांत करने की कोशिश की है, लेकिन चिंताएं अभी भी बरकरार हैं।

दुश्मनों के जहाजों और तेल टैंकरों पर ईरान की कड़ी नजर

होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के आवागमन पर बोलते हुए अराघची ने कहा कि यह मार्ग केवल हमारे दुश्मनों और हम पर हमला करने वालों के लिए बंद किया गया है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि इजरायल और अमेरिका से जुड़े जहाजों और तेल टैंकरों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मंत्री ने दावा किया कि जो जहाज उनके सहयोगियों पर हमला करने में शामिल हैं, उन्हें ईरान अपनी सीमाओं के पास बर्दाश्त नहीं करेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अन्य देशों के वाणिज्यिक जहाजों के लिए आवागमन की कोई सीमा तय नहीं की गई है और उनके लिए यह मार्ग पहले की तरह खुला हुआ है।

समुद्री मार्ग में फंसे जहाज और ‘सुरक्षा चिंताएं’

ईरानी मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कई भारतीय जहाजों समेत सैकड़ों व्यापारिक जहाज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच फंसे हुए हैं। इस संकरे समुद्री मार्ग में जहाजों के जमावड़े पर अराघची ने कहा कि कई जहाज ईरान की नाकेबंदी के कारण नहीं, बल्कि अपनी खुद की “सुरक्षा चिंताओं” की वजह से आगे नहीं बढ़ रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि युद्ध के माहौल में कई कंपनियां जोखिम नहीं उठाना चाहतीं, जिसका ईरान से सीधा लेना-देना नहीं है। उनके अनुसार, अभी भी कई टैंकर और जहाज इस मार्ग का उपयोग कर रहे हैं, जो यह साबित करता है कि मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध नहीं है।

रूस और चीन के साथ रणनीतिक साझेदारी पर बड़ा खुलासा

इंटरव्यू के दौरान अराघची ने रूस और चीन के साथ ईरान के संबंधों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने रूस और चीन को ईरान का “रणनीतिक साझेदार” बताया। सैन्य और खुफिया सहायता के सवाल पर उन्होंने स्वीकार किया कि ईरान का इन दोनों महाशक्तियों के साथ पुराना और घनिष्ठ सहयोग रहा है, जो वर्तमान युद्ध की स्थिति में भी जारी है। इसमें सैन्य तकनीक और खुफिया जानकारी साझा करना भी शामिल है। अराघची के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि ईरान इस युद्ध में अकेला नहीं है और उसे वैश्विक स्तर पर बड़े खिलाड़ियों का साथ मिल रहा है, जो अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती है।