Iran Protests: ईरान इस वक्त हिंसा और विरोध प्रदर्शनों की मार झेल रहा है। बिगड़ती अर्थव्यवस्था और लगातार बढ़ती महंगाई ने लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में लोग सर्वोच्च नेता आयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाले इस्लामी शासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इन प्रदर्शनों में सुरक्षा बलों के साथ हुई झड़पों में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है।
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विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत

बता दें कि ईरान में विरोध प्रदर्शन की शुरुआत 27 दिसंबर 2025 से शुरू हुई थी। सबसे पहले राजधानी तेहरान में दुकानदारों ने बढ़ती मंहगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ हड़ताल शुरू की। धीरे-धीरे यह आंदोलन देश के अन्य हिस्सों में फैल गया। लोगों का कहना है कि जब तक धार्मिक नेताओं का वर्चस्व खत्म नहीं होगा, तब तक मातृभूमि स्वतंत्र नहीं हो सकती। इसी कारण प्रदर्शनकारियों ने ‘मुल्लाओं को ईरान छोड़ना होगा’ जैसे नारे लगाए।
सरकार का एक्शन
सरकार इन प्रदर्शनों को रोकने के लिए लगातार सख्त कदम उठा रही है। राजधानी तेहरान में विरोध कुछ कम हुआ है, लेकिन अन्य इलाकों में लोग अब भी भारी विरोध जता रहे हैं। समाचार एजेंसी के मुताबिक, सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने पश्चिमी तेहरान के मलार्ड जिले में सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप में 30 लोगों को गिरफ्तार किया है।
हिंसा और मौतें
रिपोर्ट के मुताबिक, 31 दिसंबर को दो और 1 जनवरी को पांच लोगों की मौत हुई। ये घटनाएं उन चार शहरों में हुईं, जहां मुख्य रूप से लूर जातीय समूह के लोग रहते हैं। इस दौरान कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें लोग सरकार विरोधी नारे लगाते और सड़कों पर आगजनी करते दिखाई दे रहे हैं। तेहरान से लगभग 300 किलोमीटर दूर लोरेस्टान प्रांत के अजना शहर में भीषण हिंसा भड़क गई। यहां से सामने आए वीडियो में गोलियों की आवाजें और जलती हुई वस्तुएं साफ देखी जा सकती हैं।
विरोध का मुख्य कारण

ईरान में लगातार बढ़ती महंगाई और आर्थिक संकट ने लोगों का जीवन कठिन बना दिया है। रोजमर्रा की जरूरतों की चीजें महंगी होती जा रही हैं और रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं। यही कारण है कि लोग अब शासन के खिलाफ खुलकर आवाज उठा रहे हैं।
हालात पर नियंत्रण की कोशिश
सरकार लगातार गिरफ्तारियां कर रही है और सुरक्षा बलों को तैनात कर रही है। हालांकि, विरोध प्रदर्शनों का असर अभी पूरे देश में नहीं फैला है। लेकिन जिन इलाकों में लोग सड़कों पर उतरे हैं, वहां हालात बेकाबू होते जा रहे हैं।










