Abbas Araghchi News : ईरान सरकार में मची भारी कलह, क्या विदेश मंत्री अब्बास अराची की होगी छुट्टी?

ईरान की सत्ता में छिड़ा यह गृहयुद्ध तेहरान को हिला रहा है। राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने विदेश मंत्री अब्बास अराची को बर्खास्त करने के संकेत दिए हैं। आरोप है कि अराची राष्ट्रपति को अंधेरे में रखकर सीधे IRGC कमांडर से आदेश ले रहे हैं। क्या यह विवाद ईरान को एक नए नेतृत्व संकट की ओर ले जाएगा?

Abbas Araghchi News

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 1, 2026

Abbas Araghchi News : मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव और अमेरिका के साथ बढ़ती रंजिश के बीच ईरान की आंतरिक राजनीति से एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। तेहरान के सत्ता गलियारों में मचे इस घमासान ने दुनिया भर के कूटनीतिज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। दावों के मुताबिक, ईरान की सरकार के भीतर एक बड़ी फूट पड़ चुकी है, जिसके केंद्र में देश के विदेश मंत्री अब्बास अराची हैं। यह विवाद न केवल प्रशासनिक है, बल्कि इसमें सैन्य और राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई भी साफ नजर आ रही है।

राष्ट्रपति और संसद अध्यक्ष ने मिलाया हाथ: अराची की बढ़ी मुश्किलें

ब्रिटिश मीडिया आउटलेट ‘ईरान इंटरनेशनल’ की एक विस्तृत रिपोर्ट ने ईरानी राजनीति में भूचाल ला दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और संसद अध्यक्ष (स्पीकर) मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने हाथ मिला लिया है। इन दोनों दिग्गजों ने कथित तौर पर विदेश मंत्री अब्बास अराची को उनके पद से हटाने की तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि, ईरानी सरकार ने अभी तक इन खबरों पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है, लेकिन सत्ता के शीर्ष पर जारी यह खींचतान अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन चुकी है।

विदेश मंत्रालय पर सेना का ‘कब्जा’ और जवाबदेही का सवाल

अब्बास अराची पर लगे आरोप बेहद गंभीर और संदेहास्पद हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने विदेश मंत्रालय को राष्ट्रपति कार्यालय के प्रति जवाबदेह बनाने के बजाय उसे पूरी तरह से स्वतंत्र इकाई के रूप में चलाना शुरू कर दिया है। सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर जताई जा रही है कि विदेश मंत्री निर्वाचित सरकार की नीतियों के बजाय ईरान की ताकतवर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के निर्देशों का पालन कर रहे हैं। रिपोर्टों की मानें तो अराची का झुकाव सरकार की तुलना में सेना की ओर अधिक है, जो तेहरान के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

बिना जानकारी के कूटनीतिक फैसले लेने का गंभीर आरोप

राष्ट्रपति पेजेशकियान अराची की कार्यशैली से बेहद खफा बताए जा रहे हैं। उनका मानना है कि महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं और डिप्लोमेटिक वार्ताओं के दौरान अराची ने कैबिनेट के रुख को नजरअंदाज किया और सैन्य कमांडरों का साथ दिया। सूत्रों का कहना है कि विदेश मंत्री को IRGC कमांडर अहमद वाहिदी का करीबी सहयोगी माना जा रहा है। दावा यहाँ तक है कि वे राष्ट्रपति को अंधेरे में रखकर सैन्य रणनीतियों को विदेश नीति का हिस्सा बना रहे हैं। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि राष्ट्रपति ने कथित तौर पर चेतावनी दी है कि यदि अराची ने अपनी कार्यप्रणाली नहीं बदली, तो उन्हें कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।

नियुक्तियों के अधिकार पर छिड़ी जंग और संसद में विरोध

विवाद का एक और पहलू प्रशासनिक अधिकारों का हनन है। रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति पेजेशकियान से जंग में मारे गए अधिकारियों की जगह नई नियुक्तियां करने का अधिकार भी छीन लिया गया है, जो सीधे तौर पर विदेश मंत्रालय के हस्तक्षेप की ओर इशारा करता है। वहीं, संसद में विरोध की आग तब और भड़की जब स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने बातचीत करने वाली टीम के प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया। गालिबाफ को परमाणु ऊर्जा संबंधी मुद्दों पर चर्चा करने के कारण फटकार लगाई गई थी, जिसके बाद उन्होंने हटने का फैसला किया।

इस्लामाबाद दौरा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक विफलता

अंदरूनी कलह के बीच विदेश मंत्री अराची की हालिया पाकिस्तान यात्रा भी विवादों में घिर गई है। स्पीकर के हटने के बाद अराची खुद अकेले इस्लामाबाद गए और वहां एक नया कूटनीतिक प्रस्ताव पेश किया। हालांकि, उनके इस प्रयास को करारा झटका लगा जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने उस प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज कर दिया। इस विफलता ने ईरान सरकार के भीतर इस धारणा को और मजबूत कर दिया है कि अराची की स्वतंत्र कार्यशैली देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसान पहुँचा रही है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या राष्ट्रपति पेजेशकियान वाकई अपने विदेश मंत्री को बर्खास्त करने का साहस जुटा पाएंगे।

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