Iran Internal Conflict : ईरान में बढ़ी अंदरूनी कलह, राष्ट्रपति और विदेश मंत्री पर सॉफ्ट तख्तापलट के गंभीर आरोप

ईरान में राजनीतिक तनाव के बीच राष्ट्रपति और विदेश मंत्री समेत शीर्ष नेताओं पर कथित "सॉफ्ट तख्तापलट" के आरोप लगाए गए हैं। कट्टरपंथी गुटों की आलोचना के बाद देश की सत्ता और विदेश नीति को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार यह विवाद ईरान के अंदरूनी शक्ति संतुलन और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर असर डाल सकता है।

Iran Internal Conflict

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 19, 2026

Iran Internal Conflict : ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष के बीच अब तेहरान की आंतरिक राजनीति में भी भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के कट्टरपंथी गुटों ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कट्टरपंथियों का आरोप है कि देश के कुछ प्रमुख नेता अमेरिका के साथ गुप्त समझौता कर ‘सॉफ्ट तख्तापलट’ (Soft Coup) की साजिश रच रहे हैं। उनका दावा है कि सरकार अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद बने नए नेतृत्व को किनारे कर सत्ता पर अपना एकाधिकार जमाना चाहती है। यह नाराजगी तब खुलकर सामने आई जब दिवंगत नेता के अंतिम संस्कार के दौरान सरकार विरोधी नारे लगाए गए और मंत्रियों पर पत्थर फेंके गए।

अंतिम संस्कार में दिखा कट्टरपंथियों का आक्रोश

खामेनेई की मृत्यु के बाद उपजी स्थिति ने ईरान में राजनीतिक ध्रुवीकरण को और गहरा कर दिया है। अंतिम यात्रा के दौरान राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को जनता के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। इस दौरान विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर कुछ प्रदर्शनकारियों ने पत्थर फेंके और उन्हें ‘देशद्रोही’ तक करार दिया। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ईरान के एक प्रमुख धार्मिक गायक मोहम्मद अली बख्शी ने राष्ट्रपति को खुलेआम धमकी देते हुए कहा कि यदि सुप्रीम लीडर की शर्तों का पालन नहीं हुआ, तो परिणाम घातक होंगे। कट्टरपंथियों का स्पष्ट मानना है कि सरकार को खामेनेई की शहादत का बदला लेने के बजाय अमेरिका से कूटनीतिक समझौते की राह नहीं चुननी चाहिए थी।

मुज्तबा खामेनेई की चुप्पी और राजनीतिक अस्थिरता

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस विवाद की मुख्य जड़ दिवंगत नेता के पुत्र मुज्तबा खामेनेई की रहस्यमयी चुप्पी है। मुज्तबा के अब तक सार्वजनिक रूप से सामने न आने और कोई स्पष्ट भूमिका न निभाने के कारण सत्ता का पूरा केंद्र राष्ट्रपति पेजेशकियन, विदेश मंत्री अराघची और संसद स्पीकर मोहम्मद बघेर गालिबाफ के हाथों में सिमट गया है। कट्टरपंथी गुटों की इन नेताओं तक पहुँच न होने के कारण वे इसे ‘सत्ता हथियाने की साजिश’ मान रहे हैं। उधर, सांसद महमूद नबावियन जैसे नेता सोशल मीडिया पर जनता को ‘तख्तापलट’ के प्रति आगाह कर रहे हैं, जिससे देश में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल और विकराल हो गया है।

तख्तापलट के आरोपों का सच और भविष्य

कट्टरपंथियों ने सरकार पर संसद को निलंबित करने और सुप्रीम लीडर के निर्देशों की अनदेखी करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। एक्सपर्ट अराश अजीजी का कहना है कि यह आंतरिक टकराव ईरान को दो पाटों के बीच ले आया है—एक ओर बाहरी युद्ध और दूसरी ओर अंदरूनी गृहयुद्ध का खतरा। मुज्तबा खामेनेई की अनुपस्थिति ने एक ऐसा ‘शून्य’ पैदा कर दिया है, जिसे भरने के लिए सरकार और कट्टरपंथी गुटों के बीच खींचतान जारी है। एक तरफ जहाँ ईरान अमेरिका के साथ सैन्य टकराव में उलझा है, वहीं दूसरी तरफ ये आंतरिक घटनाक्रम देश की संप्रभुता और स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। आने वाले दिन ईरान की आंतरिक राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।

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