Crude Oil Price : 40 डॉलर तक पहुंचेगा कच्चा तेल? ईरान युद्ध खत्म होने पर बदल सकता है पूरा बाजार

ईरान विवाद के बीच कच्चे तेल की कीमतों पर दुनिया की नजर है। अभी भू-राजनीतिक जोखिम सप्लाई को महंगा बना रहे हैं, लेकिन संघर्ष खत्म होने पर तस्वीर तेजी से बदल सकती है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने तेल के 40-50 डॉलर तक गिरने की संभावना जताई है। आखिर इतनी बड़ी गिरावट क्यों संभव है?

Crude Oil Price

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

सितम्बर 5, 2026

Crude Oil Price : दुनिया भर की निगाहें इस समय ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे भू-राजनीतिक तनाव पर टिकी हुई हैं। इस गंभीर संकट ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मचा दी है, जिसके चलते कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य हमलों और तनाव ने ऊर्जा कीमतों को बेहद ऊंचे स्तर पर पहुंचा दिया है। वर्तमान में ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 91 डॉलर के आसपास बना हुआ है।
जुलाई के बाद से तेल की यह कीमतें अपने सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी हैं, जिससे पूरी दुनिया में महंगाई को लेकर गहरी चिंताएं बढ़ने लगी हैं। इस बीच अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के एक बड़े दावे ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है, जिसमें उन्होंने संघर्ष समाप्त होने पर तेल कीमतों में भारी गिरावट की संभावना जताई है।

अतिरिक्त आपूर्ति से तेल कीमतों में आ सकती है भारी गिरावट

कच्चे तेल का वर्तमान बाजार भले ही काफी टाइट नजर आ रहा हो, लेकिन अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट भविष्य में एक बिल्कुल अलग परिदृश्य देख रहे हैं। स्टीव बैनन को दिए गए अपने एक साक्षात्कार में उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि ईरान संघर्ष के पूरी तरह समाप्त होने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की भारी ओवरसप्लाई देखने को मिलेगी।
आने वाले समय में बहुत सारा नया तेल उत्पादन लाइन में आने वाला है, जो बाजार की तस्वीर बदल देगा। बेसेंट का अनुमान है कि इस अतिरिक्त आपूर्ति के चलते कच्चे तेल की कीमतें गिरकर 40 से 50 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में आ सकती हैं। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया है कि यह सैन्य संघर्ष कब तक खत्म होगा, क्योंकि अमेरिकी संसद की सशस्त्र सेवा समिति के एक रिपब्लिकन सांसद ने वर्तमान सैन्य स्थिति को अभी भी ‘ठहरा हुआ’ करार दिया है।

महंगाई और वैश्विक ब्याज दरों पर तेल कीमतों का सीधा असर

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा और गहरा असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई पर पड़ता है। बेसेंट के अनुसार, ब्याज दरों का कच्चे तेल की कीमतों के साथ इतना गहरा और मजबूत संबंध पहले कभी नहीं देखा गया था। मौजूदा समय में 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड साल 2023 के बाद अपने सबसे सर्वोच्च स्तर पर जा पहुंची है। उनका यह मानना है कि जब ईरान विवाद थमेगा और तेल की कीमतें नीचे आएंगी, तो दुनिया भर में हेडलाइन महंगाई में भारी कमी दर्ज की जाएगी। इसके परिणामस्वरूप, वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में भी कटौती किए जाने की पूरी संभावना बन जाएगी, जिससे आम जनता और कारोबारियों को बड़ी राहत मिल सकेगी।

नॉर्वे के सॉवरेन वेल्थ फंड के फैसले पर अमेरिकी ट्रेजरी का रुख

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में इन दिनों अमेरिकी ऋण को लेकर भी चर्चाएं काफी तेज हैं। इस बीच नॉर्वे के सॉवरेन वेल्थ फंड ने अपनी ट्रेजरी होल्डिंग्स में 75 अरब डॉलर तक की भारी कटौती करने का एक प्रस्ताव पेश किया है। हालांकि, अमेरिकी ट्रेजरी प्रमुख स्कॉट बेसेंट ने इस कदम की अहमियत को ज्यादा तवज्जो नहीं दी है। उनका कहना है कि नॉर्वे का यह फंड केवल अन्य अमेरिकी परिसंपत्तियों से अपना मुनाफा या यील्ड बढ़ाना चाहता है।
बेसेंट का मानना है कि यदि वे फैनी मॅई, फ्रेडी मैक या गिन्नी मॅई जैसी होम लेंडिंग कंपनियों के पेपर्स खरीदना चाहते हैं, तो वे इसके सबसे बड़े समर्थक हैं, क्योंकि ये सरकारी चार्टर्ड कंपनियां आमतौर पर अमेरिकी ट्रेजरी से अधिक प्रीमियम प्रदान करती हैं। नॉर्वे की यह खबर ऐसे संवेदनशील समय में आई है जब अमेरिकी फेडरल कर्ज का कुल आंकड़ा 40 ट्रिलियन डॉलर के ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर को पार कर चुका है।