West Bengal Education : पश्चिम बंगाल में खुलेंगे 1000 नए विद्या भारती स्कूल, शिक्षा नेटवर्क का होगा बड़ा विस्तार

पश्चिम बंगाल में शिक्षा नेटवर्क के विस्तार को लेकर बड़ी योजना सामने आई है। विद्या भारती से जुड़े स्कूलों की संख्या बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित 1000 नए स्कूलों के जरिए राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों तक शैक्षणिक नेटवर्क पहुंचाने का लक्ष्य बताया जा रहा है। आखिर इस विस्तार का असर कितना बड़ा होगा?

West Bengal Education

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 5, 2026

West Bengal Education :  पश्चिम बंगाल राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में विद्या भारती के शैक्षणिक नेटवर्क को एक बड़े स्तर पर विस्तार देने की बहुत बड़ी तैयारी चल रही है। कोलकाता शहर में आयोजित विद्या भारती के 74वें स्थापना दिवस के खास मौके पर संगठन के स्कूलों के फैलाव को लेकर एक बहुत बड़ा ऐलान किया गया है। इस विशेष कार्यक्रम के दौरान अगले एक साल के भीतर राज्य के अंदर कम से कम 1000 नए विद्या भारती स्कूल खोलने की बात कही गई है। इस व्यापक विस्तार का मुख्य उद्देश्य संगठन की शैक्षिक पहुंच को राज्य के दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचाना है।

पंचायत और जिला स्तर पर पहुंच

इस कार्यक्रम के दौरान पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने विद्या भारती के सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों से यह अपील की कि वे संगठन की उपस्थिति को प्रत्येक जिले, नगर पालिका और पंचायत स्तर तक मजबूत करें। वर्तमान समय में पूरे राज्य के अंदर विद्या भारती के लगभग 313 स्कूल संचालित हो रहे हैं। यदि ये प्रस्तावित एक हजार नए स्कूल खुल जाते हैं, तो पश्चिम बंगाल में संगठन का पूरा शैक्षणिक नेटवर्क पिछले स्तर के मुकाबले बहुत अधिक व्यापक और मजबूत हो जाएगा।

राज्य सचिवालय में बैठक का न्योता

इन नए स्कूलों के विस्तार की आगे की रणनीति और कार्ययोजना तैयार करने के लिए विद्या भारती के प्रमुख पदाधिकारियों को राज्य सचिवालय आने का आधिकारिक न्योता भी दिया गया है। इस प्रस्तावित विस्तार के तहत राज्य के किन-किन क्षेत्रों में नए विद्यालयों की वास्तविक आवश्यकता है और उन्हें किस प्रकार विकसित किया जाएगा, इन सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि पूरे देश में संगठन के 12 हजार से अधिक स्कूल और करीब 10 हजार बाल संस्कार केंद्र चल रहे हैं।

गोरखपुर से हुई थी इस सफर की शुरुआत

विद्या भारती के इस ऐतिहासिक सफर की शुरुआत वर्ष 1952 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर से हुई थी। शुरुआती दौर में इसके तमाम विद्यालय ‘सरस्वती शिशु मंदिर’ के नाम से संचालित किए जाते थे। समय के साथ-साथ इस संगठन का दायरा देश के अन्य राज्यों तक फैला और विभिन्न क्षेत्रों में सरस्वती शिशु मंदिर, सरस्वती विद्या मंदिर तथा अन्य नामों से स्कूल खुलने लगे। इस संगठन को वैचारिक रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ा हुआ माना जाता है।

संस्कृति और सामान्य शिक्षा पर जोर

विद्या भारती से संबद्ध विद्यालयों में गणित, विज्ञान, भाषा और सामाजिक विज्ञान जैसे पारंपरिक विषयों के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, मूल्यों और परंपराओं पर भी विशेष जोर दिया जाता है। अधिकांश विद्यालयों में प्रार्थना सभा, योग और सूर्य नमस्कार जैसी गतिविधियां दैनिक दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा होती हैं। कुछ विशेष स्कूलों में प्राथमिक कक्षाओं के दौरान बच्चों को उनकी मातृभाषा में ही शिक्षा प्रदान करने को विशेष प्राथमिकता दी जाती है।

कम फीस वाले विद्यालयों की भूमिका

इन शिक्षण संस्थानों की एक अन्य प्रमुख विशेषता इनकी अपेक्षाकृत कम फीस होना है। इससे समाज के मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग के परिवारों के बच्चों के लिए पढ़ाई का एक बेहतर और सुलभ विकल्प मिल जाता है। विद्या भारती के ये विद्यालय देश के ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों में भी बड़ी संख्या में संचालित हो रहे हैं। हालांकि, इन विद्यालयों को लेकर सामाजिक और राजनीतिक हलकों में वैचारिक बहसें भी लगातार चलती रहती हैं।

विचारधारा को लेकर उठते रहे हैं सवाल

विद्या भारती के आलोचकों का यह आरोप हमेशा से रहा है कि इन विद्यालयों में सामान्य शिक्षा के नाम पर एक विशेष वैचारिक दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया जाता है। दूसरी तरफ, संगठन से जुड़े लोगों का मानना है कि वे बच्चों में शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार और भारतीय संस्कृति का संचार कर रहे हैं। इसी वैचारिक मतभेद के कारण स्कूलों के इस नए विस्तार को लेकर राजनीतिक स्तर पर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

शिक्षा विभागों को एक करने का प्रस्ताव

इस कार्यक्रम के दौरान पश्चिम बंगाल की पूरी शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक अन्य बड़ा प्रस्ताव भी सामने रखा गया। स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और अल्पसंख्यक शिक्षा से जुड़े चार अलग-अलग विभागों को एक ही प्रशासनिक व्यवस्था के दायरे में लाने की बात कही गई। साथ ही, मदरसा शिक्षा के लिए एक अलग व्यवस्था होने पर भी सवाल खड़े किए गए।

शिक्षा व्यवस्था पर नई राजनीतिक बहस

विद्या भारती द्वारा एक साथ एक हजार नए स्कूल खोले जाने की इस योजना से पश्चिम बंगाल की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था में एक बार फिर से नई बहस छिड़नी तय मानी जा रही है। एक तरफ जहां इसे शिक्षा का दायरा बढ़ाने वाला कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पाठ्यक्रम और विचारधारा को लेकर सवाल उठेंगे।