Teacher’s Day: स्क्रीन टाइम और ड्रग्स पर PM मोदी की चिंता, शिक्षकों को दी बड़ी जिम्मेदारी

शिक्षक दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं से खास संवाद किया। पीएम मोदी ने बच्चों की प्रतिभा पहचानने, स्क्रीन टाइम, ड्रग्स और पब्लिक स्पीकिंग जैसे मुद्दों पर शिक्षकों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को किताबों और सिलेबस से आगे बढ़कर बच्चों की जिंदगी में झांकना होगा और उनका बचपन बचाना होगा।

Teacher’s Day

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

सितम्बर 5, 2026

Teacher’s Day: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को शिक्षक दिवस के मौके पर देश के शिक्षकों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस समाज में शिक्षकों के अहम योगदान को सम्मान देने का अवसर है। साथ ही यह दिन महान शिक्षाविद और देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि देने का भी अवसर है। पीएम मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं के साथ हुई अपनी बातचीत की झलकियां भी सोशल मीडिया पर साझा की।

National Teachers Award विजेताओं से पीएम मोदी की खास बातचीत

बताते चले कि, पीएम मोदी ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों को 7, लोक कल्याण मार्ग बुलाया गया था। इस दौरान प्रधानमंत्री ने अलग-अलग राज्यों से आए शिक्षकों से शिक्षा, बच्चों की प्रतिभा और बदलती चुनौतियों को लेकर बातचीत की। संवाद के दौरान कई ऐसे हल्के-फुल्के पल भी आए, जब प्रधानमंत्री और शिक्षक हंसी-मजाक करते नजर आए।

पीएम मोदी से शिक्षिका की बातचीत

एक महिला शिक्षिका ने प्रधानमंत्री को बताया कि वह बच्चों को नए और रचनात्मक तरीके से इंटरव्यू लेना सिखाती हैं। इस पर पीएम मोदी ने मजाकिया अंदाज में पूछा कि क्या बच्चे घर जाकर अपने मम्मी-पापा का भी इंटरव्यू लेते हैं? शिक्षिका के हां कहने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चे माता-पिता से यह भी पूछते होंगे कि खाना क्यों बनाया, क्या बनाया, फैसला किसने लिया और कितना बजट खर्च हुआ। इस पर शिक्षिका ने मुस्कुराते हुए कहा कि उनके स्कूल के सभी बच्चे रिपोर्टर बनना चाहते हैं।

PM मोदी ने मांगे पब्लिक स्पीकिंग के टिप्स

एक अन्य शिक्षिका ने बताया कि वह बच्चों को केमिस्ट्री के साथ पर्यावरण शिक्षा भी पढ़ाती हैं। इसके अलावा वह बच्चों को आत्मविश्वास के साथ पब्लिक स्पीकिंग के लिए तैयार करती हैं और उन्हें राज्य, राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने में मदद कर चुकी हैं। इस पर पीएम मोदी ने उनसे पूछा कि अगर वह उनके विद्यार्थी होते और अच्छा वक्ता बनना चाहते, तो उन्हें क्या करना चाहिए?

शिक्षिका ने जवाब दिया कि इसके लिए आत्मविश्वास जरूरी है। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व की ओर इशारा करते हुए कहा कि उनका ‘ऑरा’ देखकर उन्हें थोड़ा संदेह हो गया। इस पर दोनों हंस पड़े। पीएम मोदी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर पब्लिक स्पीकर बनने के लिए ऑरा जरूरी है, तो लोग भाषण सुनने के बजाय ऑरा ही देखते रहेंगे। शिक्षिका ने कहा कि लोग उन्हें देखते ही रहेंगे।

बच्चों के टैलेंट की पहचान पर PM मोदी ने शिक्षकों से की अपील

प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों से कहा कि जरूरी नहीं कि हर बच्चा पढ़ाई में समान रूप से अच्छा हो। उन्होंने कहा कि परमात्मा ने हर व्यक्ति को कोई न कोई विशेष ताकत और क्षमता दी है। ऐसे में शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों के अंदर छिपी प्रतिभा को पहचानें और उसे आगे बढ़ने का अवसर दें।एक शिक्षिका ने बताया कि उनकी कोशिश यही रहती है कि कक्षा में मौजूद हर बच्चे की अलग खूबी, प्रतिभा और चुनौती को समझा जाए। उनके मुताबिक हर बच्चा अलग है और शिक्षक के तौर पर उनकी भूमिका इन अलग-अलग क्षमताओं की पहचान करना है।

शिक्षा और बेटियों की सेहत पर भी हुई चर्चा

बातचीत के दौरान एक महिला शिक्षिका ने बताया कि उनका शोध ब्रेस्ट कैंसर पर रहा है। उन्होंने कहा कि आज भी कई महिलाएं इस विषय पर बात करने से झिझकती हैं। ऐसे में प्राथमिक स्तर पर स्क्रीनिंग और जागरूकता के जरिए महिलाओं को शुरुआती संकेत पहचानने और समय पर डॉक्टर से सलाह लेने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।इस पर पीएम मोदी ने काशी में चलाए जा रहे ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता अभियान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अब महिलाएं आगे आकर जांच करा रही हैं और हाल ही में एक दिन में बड़ी संख्या में लोगों की जांच का रिकॉर्ड भी दर्ज किया गया है।

स्क्रीन टाइम को लेकर PM मोदी की शिक्षकों से बड़ी अपील

प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम को भी एक बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि अगर बच्चों की रुचि खेलकूद और मैदान में खेलने की तरफ बढ़ाई जाए, तो वे धीरे-धीरे स्क्रीन एडिक्शन से बाहर आ सकते हैं। बच्चों को क्रिएटिव गतिविधियों से जोड़ना और उन्हें नियमित आदत का हिस्सा बनाना जरूरी है।ड्रग्स की समस्या पर पीएम मोदी ने शिक्षकों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चों को पता भी नहीं चलता कि उनके आसपास क्या हो रहा है। इसलिए शिक्षकों को बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों पर नजर रखनी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा सिर्फ किताबों और सिलेबस तक सीमित नहीं होनी चाहिए। शिक्षकों को बच्चों की जिंदगी में झांकना होगा और उनके बचपन को बचाए रखना होगा। उनके मुताबिक बच्चों के बचपन को बनाए रखने में शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।