IPAC case latest update: सुप्रीम कोर्ट में ED का आरोप, DGP पर जांच में बाधा डालने का दावा

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल सरकार और DGP ने जांच में हस्तक्षेप किया। एजेंसी का दावा है कि पुलिस अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के हित में काम करते हुए सबूतों से छेड़छाड़ की और जांच प्रक्रिया में बाधा डाली।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

फ़रवरी 20, 2026

IPAC case latest update: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एजेंसी का कहना है कि राज्य पुलिस ने संवैधानिक मर्यादाओं की अनदेखी करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निजी हितों के लिए काम किया और वैध जांच में रुकावट डाली।

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I-PAC मामले से जुड़ा विवाद

IPAC case latest update
सुप्रीम कोर्ट में ED का आरोप

ED ने अदालत को बताया कि यह मामला चुनावी रणनीति बनाने वाली संस्था I-PAC से संबंधित है। जब एजेंसी I-PAC के दफ्तर और उससे जुड़े लोगों के ठिकानों पर कानूनी छापेमारी कर रही थी, तब पश्चिम बंगाल पुलिस ने जानबूझकर हस्तक्षेप किया। आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में कुछ डिजिटल उपकरण और दस्तावेज वहां से हटाए गए, जो जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण थे।

‘मर्यादा और कानून का उल्लंघन’

ED ने दावा किया कि पुलिस अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार काम किया। एजेंसी का कहना है कि DGP जैसे संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी से निष्पक्षता की उम्मीद होती है, लेकिन इस मामले में उन्होंने मर्यादा और कानून दोनों का उल्लंघन किया। ममता सरकार का यह तर्क कि उपकरण सुरक्षा कारणों से हटाए गए थे, ED ने गलत बताया। एजेंसी के अनुसार यह सीधे-सीधे सबूतों से छेड़छाड़ का मामला है, जिससे जांच को नुकसान पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट से मांग

इस पूरे विवाद को लेकर ED ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए जाएं। एजेंसी का कहना है कि अगर राज्य पुलिस ही जांच में बाधा बनेगी, तो निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।

अदालत में सुनवाई जारी

ED ने यह भी बताया कि इससे पहले यह मामला सुप्रीम कोर्ट और कलकत्ता हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां एजेंसी ने पश्चिम बंगाल सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए थे। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई जारी रखी है और अगली तारीख पर इसपर बहस होगी।

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