लर्निंग गैप भरने की पहल: परिषदीय और कस्तूरबा विद्यालयों में शुरू होगा विशेष शिक्षण कार्यक्रम

 लखनऊ अब परिषदीय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में कोई भी बच्चा पढ़ाई में पीछे नहीं छूटेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (एनसीएफएसई) के अनुरूप प्रदेश सरकार जुलाई से विशेष ‘कैच-अप शिक्षण’ अभियान शुरू करने जा रही है। इससे विद्यार्थियों के सीखने के अंतर (लर्निंग गैप) को भरना है जो नियमित कक्षाओं के बावजूद अपेक्षित अधिगम स्तर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। सभी डायट प्राचार्यों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को अपर मुख्य सचिव बेसिक और माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत जुलाई में सभी

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Published On :

जून 13, 2026

 लखनऊ
अब परिषदीय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में कोई भी बच्चा पढ़ाई में पीछे नहीं छूटेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (एनसीएफएसई) के अनुरूप प्रदेश सरकार जुलाई से विशेष ‘कैच-अप शिक्षण’ अभियान शुरू करने जा रही है। इससे विद्यार्थियों के सीखने के अंतर (लर्निंग गैप) को भरना है जो नियमित कक्षाओं के बावजूद अपेक्षित अधिगम स्तर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

सभी डायट प्राचार्यों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को अपर मुख्य सचिव बेसिक और माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत जुलाई में सभी विद्यालयों में 15 दिवसीय पुनरावृत्ति शिक्षण अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद अगस्त से जनवरी 2027 तक प्रतिदिन 20 से 30 मिनट का अतिरिक्त कैच-अप शिक्षण कराया जाएगा।

कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों का फॉर्मेटिव असेसमेंट कराया जाएगा। इसके आधार पर उनकी जरूरतों के अनुसार समूह बनाए जाएंगे और अलग-अलग शिक्षण योजनाएं तैयार की जाएंगी। नई अवधारणाओं को विद्यार्थियों को दैनिक जीवन और स्थानीय अनुभवों से जोड़कर पढ़ाया जाएगा ताकि सीखना आसान और स्थायी बन सके।

विद्यालयों में बिग बुक, वार्तालाप कार्ड, पोस्टर, पुस्तकालय की किताबें, गणित किट और स्थानीय स्तर पर तैयार शिक्षण सामग्री का उपयोग बढ़ाया जाएगा। भाषा शिक्षण में पहले दो अक्षरों वाले शब्द, फिर छोटे वाक्य और उसके बाद अनुच्छेद पढ़ाने की रणनीति अपनाई जाएगी। गणित को खेल आधारित बनाया जाएगा।

किसी बच्चे को नहीं कहा जाएगा कमजोर
कैच-अप शिक्षण में पहले शिक्षक उदाहरण देंगे, फिर विद्यार्थियों के साथ अभ्यास करेंगे और अंत में बच्चे स्वयं कार्य करेंगे। पीयर लर्निंग, पेयर लर्निंग और कोआपरेटिव लर्निंग जैसी विधियों का भी प्रयोग होगा। भाषा खेल, कहानी, चित्र आधारित गतिविधियां, रोल प्ले, स्किट और प्रतियोगिताओं के माध्यम से पढ़ाई को रोचक बनाया जाएगा।

किसी भी विद्यार्थी को कमजोर या पीछे होने का एहसास नहीं कराया जाएगा। अतिरिक्त कक्षाओं को सकारात्मक शैक्षिक सहयोग के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। कार्य पुस्तिकाओं और नोटबुक की नियमित जांच होगी तथा गलतियों को दंड नहीं बल्कि सीखने का अवसर माना जाएगा।