Indore Water Tragedy: इंदौर जल संकट पर कार्रवाई तेज, अफसरों पर नोटिस, हाईकोर्ट और NHRC ने मांगी रिपोर्ट

इंदौर के सबसे 'स्वच्छ' चेहरे के पीछे क्या कोई खौफनाक लापरवाही छिपी है? दूषित पानी से 15 मौतों के दावे और हाई कोर्ट में सरकार के हलफनामे ने हड़कंप मचा दिया है। राहुल गांधी ने इसे 'हत्या' करार दिया है। आखिर प्रशासन किसे बचाने की कोशिश कर रहा है? जानिए इस विवाद का पूरा सच!

Indore Water Tragedy

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 2, 2026

Indore Water Tragedy: इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों के मामले ने प्रशासन को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव और एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके साथ ही एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया को तत्काल प्रभाव से इंदौर से हटा दिया गया है। यह कदम मामले की गंभीरता को देखते हुए उठाया गया है।

Indore Water Tragedy: जल वितरण से जुड़े अधिकारी से प्रभार वापस

प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई करते हुए इंचार्ज सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर बबलू शर्मा से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार भी वापस ले लिया गया है। माना जा रहा है कि पाइपलाइन लीकेज और पानी में सीवेज मिलने के मामलों में लापरवाही को लेकर यह फैसला लिया गया है। नगर निगम की कार्यप्रणाली पर अब सीधे सवाल खड़े हो रहे हैं।

Indore Water Tragedy: नगर निगम में खाली पद भरने के निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर निगम में मौजूद सभी जरूरी खाली पदों को जल्द भरने के निर्देश दिए हैं। सरकार का मानना है कि तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर स्टाफ की कमी भी इस तरह की घटनाओं का एक कारण हो सकती है। इस निर्देश को व्यवस्था सुधार की दिशा में अहम माना जा रहा है।

हाईकोर्ट में सरकार की स्टेटस रिपोर्ट

मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर में दूषित पानी से मौत के मामले में अपनी स्टेटस रिपोर्ट शुक्रवार को हाईकोर्ट में पेश की। रिपोर्ट में सरकार ने केवल 4 मौतों की पुष्टि की है। यह आंकड़ा तब सामने आया, जब अस्पतालों और मृतकों के परिजनों के जरिए 15 मौतों की जानकारी पहले ही सार्वजनिक हो चुकी थी।

पीड़ितों में बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक शामिल

जानकारी के अनुसार, जिन लोगों की मौत हुई, उनमें 5 महीने के मासूम बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं। सभी को उल्टी-दस्त, पेट दर्द और कुछ मामलों में बुखार की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस अंतर ने सरकार के आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट में बैक्टीरिया की पुष्टि

महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में पानी में सीवेज और खतरनाक बैक्टीरिया की मौजूदगी की पुष्टि हो चुकी है। इसके बाद कलेक्टर शिवम वर्मा और सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने स्वीकार किया कि पानी दूषित था, हालांकि विस्तृत रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि कल्चर रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।

मंत्री और सांसद ने भी मानी पाइपलाइन लीकेज की बात

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और सांसद शंकर लालवानी पहले ही पाइपलाइन लीकेज और पानी में सीवेज मिलने की बात स्वीकार कर चुके हैं। मंत्री विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र भागीरथपुरा में स्थिति सबसे गंभीर है, जहां 16 बच्चों समेत 201 लोग अब भी अस्पतालों में भर्ती हैं।

हाईकोर्ट और NHRC की सख्ती

हाईकोर्ट ने इस मामले में दायर जनहित याचिका पर अगली सुनवाई की तारीख 6 जनवरी तय की है। वहीं, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

राजनीतिक विरोध और तीखी प्रतिक्रियाएं

इस मामले को लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का विरोध अब इंदौर के साथ-साथ भोपाल, जबलपुर, रतलाम और नर्मदापुरम तक फैल गया है। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इसे मुख्यमंत्री मोहन यादव के लिए “परीक्षा की घड़ी” बताया है। वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि साफ पानी कोई एहसान नहीं बल्कि नागरिकों का जीवन का अधिकार है, जिसकी जिम्मेदारी सरकार पर है।

Read More: Paush Purnima 2026: कब है पौष पूर्णिमा? एक क्लिक में जानें स्नान दान का शुभ मुहूर्त