Indore Water Tragedy: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार पड़ने की घटना अब पूरी तरह न्यायिक दायरे में आ चुकी है। इस गंभीर मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में लगातार जनहित याचिकाएं दायर की जा रही हैं। अदालत ने इसे जनस्वास्थ्य से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय मानते हुए सरकार और नगर निगम के रवैये पर सख्त टिप्पणी की है।
Indore Water Tragedy: हाई कोर्ट में पेश हुई स्टेटस रिपोर्ट
इस मामले में शुक्रवार को राज्य सरकार और नगर निगम की ओर से स्टेटस रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश की गई। हालांकि, रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों को लेकर याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि वह केवल औपचारिक रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं होगी और पूरे घटनाक्रम की गहराई से समीक्षा करेगी।
Indore Water Tragedy: 31 दिसंबर को दायर हुईं पहली दो जनहित याचिकाएं
इस प्रकरण में 31 दिसंबर को हाई कोर्ट में दो अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं। पहली याचिका हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इनाणी द्वारा लगाई गई, जबकि दूसरी याचिका पूर्व पार्षद महेश गर्ग और कांग्रेस प्रवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी की ओर से दायर की गई थी। दूसरी याचिका की पैरवी अधिवक्ता मनीष यादव ने की।
कोर्ट ने दिए थे अंतरिम आदेश
31 दिसंबर को हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने नगर निगम को अंतरिम निर्देश जारी किए थे। अदालत ने आदेश दिया था कि सभी प्रभावित नागरिकों का मुफ्त इलाज कराया जाए और भागीरथपुरा समेत प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जाए। कोर्ट ने साफ किया था कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
तीसरी जनहित याचिका पर भी सख्त रुख
कोर्ट में इस मामले से जुड़ी एक तीसरी जनहित याचिका भी दायर की गई है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को नोटिस जारी किए हैं। अदालत ने तीनों याचिकाओं को एक साथ सुनने का फैसला किया है।
6 जनवरी को होगी अहम सुनवाई
हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि तीनों जनहित याचिकाओं पर अगली संयुक्त सुनवाई 6 जनवरी को की जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि उस दिन पेश की जाने वाली स्टेटस रिपोर्ट में मौतों, गंभीर मरीजों, आईसीयू में भर्ती लोगों और अस्पताल में इलाजरत मरीजों की पूरी और सही जानकारी होनी चाहिए।
मुआवजा बढ़ाने और सही आंकड़ों की मांग
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता मनीष यादव ने कोर्ट के समक्ष यह मांग रखी कि मृतकों के परिजनों को दी जाने वाली मुआवजा राशि बढ़ाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम की रिपोर्ट में केवल चार मौतों का जिक्र है, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक बताई जा रही है। इसलिए एक विस्तृत और तथ्यात्मक रिपोर्ट दाखिल की जानी चाहिए।
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इनाणी ने कहा कि इस पूरे मामले में सबसे अहम मांग यह है कि इंदौर के हर नागरिक को साफ और सुरक्षित पेयजल मिले। उन्होंने यह भी कहा कि भागीरथपुरा की घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सजा होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी गंभीर और जानलेवा लापरवाही दोबारा न हो। कोर्ट अब इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और 6 जनवरी की सुनवाई को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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