Indore Water Crisis 2026: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर को देश की सबसे साफ-सुथरी शहरों में गिना जाता है। यहां की सड़कें, जल व्यवस्था और सार्वजनिक स्थल स्वच्छता की मिसाल माने जाते हैं। लेकिन इसी स्वच्छ शहर में दूषित पेयजल लोगों की जान का कारण बन गया। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में गंदा पानी पीने से कई लोगों की मौत हो गई, जिसने प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Indore Water Crisis 2026 : भागीरथपुरा में फैली बीमारी और मौतें
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की सप्लाई के चलते अचानक बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ने लगे। अब तक इस घटना में 17 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 400 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से कई मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है, लेकिन स्थिति ने पूरे शहर में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।
Indore Water Crisis 2026: हाई कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी
इस गंभीर मामले को लेकर इंदौर हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह की घटनाएं इंदौर जैसे प्रतिष्ठित और स्वच्छ शहर की छवि को गहरा नुकसान पहुंचाती हैं। अदालत ने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए प्रशासन से जवाबदेही तय करने की बात कही है।
तीन याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई
भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों और बीमारियों को लेकर हाई कोर्ट में लगभग तीन याचिकाएं दायर की गई थीं। इन सभी याचिकाओं पर मंगलवार को एक साथ सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए साफ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मुख्य सचिव को कोर्ट में पेश होने का आदेश
हाई कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट के सामने पेश होने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि वह सीधे मुख्य सचिव से इस मुद्दे पर जवाब सुनना चाहती है, क्योंकि यह समस्या केवल एक इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शहर के लिए चेतावनी है।
कोर्ट ने बताई व्यापक समस्या
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह केवल स्थानीय स्तर की समस्या नहीं है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो शहर के अन्य हिस्सों में भी ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है। कोर्ट ने प्रशासन से जल आपूर्ति प्रणाली की पूरी जांच करने और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा है।
पहले भी दिए गए थे साफ पानी के निर्देश
गौरतलब है कि 31 दिसंबर 2025 को ही इंदौर हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार और नगर निगम को निर्देश दिए थे कि शहरवासियों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए। इसके बावजूद इस तरह की घटना सामने आना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
प्रशासन पर बढ़ता दबाव
अब हाई कोर्ट की सख्ती के बाद राज्य सरकार और नगर निगम पर जवाबदेही का दबाव बढ़ गया है। आने वाली सुनवाई में यह तय हो सकता है कि दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी और भविष्य में इंदौर जैसे शहर में इस तरह की त्रासदी दोबारा न हो, इसके लिए कौन से कदम उठाए जाएंगे।
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