Indore Contaminated Water: इंदौर जल त्रासदी, कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन, 21 हिरासत में, इस्तीफे की मांग

क्या देश का सबसे स्वच्छ शहर अब 'जहरीला' पानी पिला रहा है? इंदौर के भागीरथपुरा में 15 लोगों की संदिग्ध मौत के बाद सियासत सुलग उठी है। यूथ कांग्रेस ने जब जंजीर और घंटी लेकर नगर निगम घेरा, तो पुलिस ने बल प्रयोग कर 21 लोगों को उठाया। आखिर इस त्रासदी का असली जिम्मेदार कौन है? जानिए अंदर की कहानी।

Indore Contaminated Water

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 3, 2026

Indore Contaminated Water: मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से फैली बीमारी और मौतों ने अब एक बड़े राजनीतिक संग्राम का रूप ले लिया है। शुक्रवार, 2 जनवरी 2026 को इस त्रासदी के विरोध में युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने नगर निगम मुख्यालय के बाहर उग्र प्रदर्शन किया। स्थिति को अनियंत्रित होते देख पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए 21 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया, जिनमें तीन महिला कार्यकर्ता भी शामिल हैं। शहर के लोगों में प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है, क्योंकि एक तरफ डायरिया से मौतें हो रही हैं और दूसरी तरफ सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

Indore Contaminated Water:  भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप

युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का सीधा आरोप है कि भागीरथपुरा में जो मौतें हुई हैं, वे प्राकृतिक नहीं बल्कि ‘प्रशासनिक हत्याएं’ हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नगर निगम और जल विभाग की घोर लापरवाही के कारण पेयजल लाइनों में सीवरेज का पानी मिल गया। कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि इस त्रासदी के पीछे सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के शासन में व्याप्त भ्रष्टाचार जिम्मेदार है। उनका तर्क है कि यदि समय रहते स्थानीय निवासियों की शिकायतों पर ध्यान दिया गया होता, तो कई मासूमों और बुजुर्गों की जान बचाई जा सकती थी।

Indore Contaminated Water: मुआवजे की मांग और दिग्गज नेताओं के इस्तीफे पर अड़ी कांग्रेस

नगर निगम के मुख्य द्वार पर नारेबाजी करते हुए कांग्रेस नेताओं ने अपनी मांगों का एक ज्ञापन सौंपा। उनकी प्रमुख मांग है कि इस त्रासदी में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही, कार्यकर्ताओं ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव के तत्काल इस्तीफे की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि जब तक जिम्मेदार बड़े अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।

विरोध प्रदर्शन में छिड़ा नया विवाद

प्रदर्शन के दौरान एक दिलचस्प और प्रतीकात्मक नजारा देखने को मिला। युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता अपने साथ एक बड़ी घंटी लेकर आए थे, जिसे बजाकर वे कुंभकर्णी नींद में सोए प्रशासन को जगाने का प्रयास कर रहे थे। इसी बीच, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झूमाझपटी हुई और एक पुलिसकर्मी ने वह घंटी छीन ली। पुलिस द्वारा घंटी को जब्त कर थाने ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह वायरल हो गया है। दरअसल, यह ‘घंटी’ विरोध प्रदर्शन का जरिया इसलिए बनी क्योंकि हाल ही में कैलाश विजयवर्गीय द्वारा एक पत्रकार को दिए गए ‘घंटा’ शब्द वाले बयान पर पहले से ही सियासी बवाल मचा हुआ है।

मौतों के आंकड़ों पर उलझा प्रशासनिक तंत्र

इंदौर में हुई मौतों की वास्तविक संख्या को लेकर भारी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने आधिकारिक तौर पर 10 मरीजों की मौत की बात स्वीकार की है। इसके विपरीत, राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जो रिपोर्ट पेश की है, उसमें केवल 4 बुजुर्गों की मृत्यु का उल्लेख है। वहीं, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है; स्थानीय नागरिकों का दावा है कि एक 6 महीने के मासूम बच्चे सहित अब तक 15 लोग दम तोड़ चुके हैं। आंकड़ों का यह विरोधाभास प्रशासन की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

इंदौर-1 विधानसभा क्षेत्र में बढ़ा राजनीतिक तनाव

भागीरथपुरा इलाका कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के निर्वाचन क्षेत्र ‘इंदौर-1’ के अंतर्गत आता है, जिसके कारण यह मुद्दा और भी संवेदनशील हो गया है। पुलिस उपायुक्त राजेश व्यास के अनुसार, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियातन गिरफ्तारियां की गई हैं। शहर में तनाव व्याप्त है और स्वास्थ्य विभाग की टीमें अब जाकर इलाके में घर-घर सर्वे कर रही हैं। इंदौर की जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि ‘स्वच्छता में नंबर 1’ शहर के नागरिक दूषित पानी पीकर मरने को मजबूर क्यों हैं?

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