हर पात्र बच्चे के लिए बनेगा इंडिविजुअल केयर प्लान, आयुक्त निवेदिता का बड़ा निर्देश

प्रत्येक पात्र बच्चे के लिए तैयार होगा इंडिविजुअल केयर प्लान : आयुक्त सुश्री निवेदिता मिशन वात्सल्य के राज्य स्तरीय आईसीपी प्रशिक्षण कार्यशाला हुई भोपाल  आयुक्त महिला एवं बाल विकास सुश्री निधि निवेदिता ने कहा कि इंडिविजुअल केयर प्लान (आईसीपी) केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे के जीवन, उसकी आवश्यकताओं और भविष्य की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने अधिकारियों एवं संस्थाओं से कहा कि प्रत्येक पात्र बच्चे के लिए आईसीपी तैयार किया जाना अनिवार्य है तथा समय-समय पर उसका मूल्यांकन और अद्यतन भी किया जाना चाहिए, जिससे बच्चों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं प्रभावी बनी

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Published On :

मई 22, 2026

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प्रत्येक पात्र बच्चे के लिए तैयार होगा इंडिविजुअल केयर प्लान : आयुक्त सुश्री निवेदिता

मिशन वात्सल्य के राज्य स्तरीय आईसीपी प्रशिक्षण कार्यशाला हुई

भोपाल 

आयुक्त महिला एवं बाल विकास सुश्री निधि निवेदिता ने कहा कि इंडिविजुअल केयर प्लान (आईसीपी) केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे के जीवन, उसकी आवश्यकताओं और भविष्य की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने अधिकारियों एवं संस्थाओं से कहा कि प्रत्येक पात्र बच्चे के लिए आईसीपी तैयार किया जाना अनिवार्य है तथा समय-समय पर उसका मूल्यांकन और अद्यतन भी किया जाना चाहिए, जिससे बच्चों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं प्रभावी बनी रहें। उन्होंने कहा कि बाल देखरेख संस्थाओं में रह रहे बच्चों के साथ समुदाय में संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए भी आईसीपी अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि हर बच्चे की परिस्थितियां, समस्याएं, क्षमताएं और पुनर्वास की जरूरतें अलग-अलग होती हैं। आयुक्त सुश्री निवेदिता महिला बाल विकास संचालनालय में मिशन वात्सल्य योजना के तहत राज्य स्तरीय इंडिविजुअल केयर प्लान विषय पर आधारित कार्यशाला को संबोधित कर रही थी।

सुश्री निवेदिता ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण आईसीपी के माध्यम से बच्चों की शिक्षा, शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श, कौशल विकास, पारिवारिक पुनर्मिलन, सामाजिक पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के लिए योजनाबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जा सकती है। इससे बच्चों के सर्वोत्तम हित के सिद्धांत को व्यवहारिक रूप से लागू करने में सहायता मिलती है और बच्चों को संस्थागत देखरेख पर निर्भर रहने के बजाय परिवार एवं समुदाय आधारित देखरेख की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आये अधिकारियों, बाल संरक्षण विशेषज्ञों, बाल देखरेख संस्थाओं के अधीक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विभागीय अधिकारियों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण में बच्चों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप देखरेख और पुनर्वास की योजनाओं को बेहतर ढंग से तैयार करने पर विस्तार से चर्चा की गई।

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