Rupee vs Dollar Today : भारतीय मुद्रा के लिए मंगलवार का दिन बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। मंगलवार सुबह बाजार खुलते ही रुपया 27 पैसे लुढ़क गया, जिसके परिणामस्वरूप एक डॉलर की कीमत 95.63 रुपया (मुद्रा इकाई) के पार निकल गई। अब यह मनोवैज्ञानिक स्तर ‘100’ से महज 4.42 रुपया दूर है। विश्लेषकों का मानना है कि जिस रफ्तार से गिरावट आ रही है, रुपया जल्द ही ‘सेंचुरी’ लगा सकता है। यह गिरावट न केवल मुद्रा बाजार तक सीमित है, बल्कि इसने निवेशकों की धारणा को भी पूरी तरह हिला कर रख दिया है।
शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स और निफ्टी धड़ाम
मुद्रा बाजार के साथ-साथ दलाल स्ट्रीट पर भी मातम का माहौल है। सोमवार को सेंसेक्स में 900 अंकों से अधिक की भारी गिरावट देखी गई थी, और यह नकारात्मक सिलसिला मंगलवार को भी जारी रहा। बाजार खुलने के बाद से ही सेंसेक्स इंडेक्स में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। वैश्विक अनिश्चितता और युद्ध के हालातों ने निवेशकों को बिकवाली के लिए मजबूर कर दिया है। बाजार विशेषज्ञों को डर है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में यह गिरावट और भी भयावह रूप ले सकती है, जिससे छोटे और बड़े दोनों तरह के निवेशकों को भारी चपत लगेगी।
युद्ध का साया: दो महीने में बिखर गई करेंसी
रुपये की इस दुर्गति के पीछे मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध एक प्रमुख कारण है। आंकड़ों पर गौर करें तो 4 मार्च को पहली बार रुपया 92 के पार गया था। महज पांच दिनों के भीतर यह गिरकर 92.30 पर आ गया। यह गिरावट यहीं नहीं रुकी, बल्कि अगले दो महीनों के भीतर इसने 95 का स्तर भी पार कर लिया। हर बीतते हफ्ते के साथ रिकॉर्ड गिरावट के नए कीर्तिमान बन रहे हैं। वर्तमान में रुपया 96 के बेहद करीब पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध की अनिश्चितता ने रुपये पर ऐसा दबाव बनाया है कि रिकवरी के कोई संकेत नजर नहीं आ रहे हैं।
ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल की मार
करेंसी पर बढ़ते दबाव की मुख्य वजह ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य गतिरोध है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरानी जमीन पर किए गए हमलों ने वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। हालांकि, डेढ़ महीने की जंग के बाद फिलहाल सीजफायर है, लेकिन शांति की उम्मीदें धुंधली हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान ने कि “सीजफायर अब लाइफ सपोर्ट पर है”, बाजार में आग लगा दी। इस धमकी भरे लहजे के बाद मंगलवार को रुपये में तेज गिरावट आई। अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन गई हैं।
ऊर्जा संकट और प्रधानमंत्री की देशवासियों से अपील
भारत की लगभग 90 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतें उन क्षेत्रों से पूरी होती हैं, जो वर्तमान में युद्ध की चपेट में हैं। इस कारण देश में ईंधन की आपूर्ति को लेकर आम जनता के बीच घबराहट बढ़ रही है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संभलकर रहने का संदेश दिया है। उन्होंने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और ‘वर्क फ्रॉम होम’ अपनाने की सलाह दी है। साथ ही, उन्होंने खाद्य तेल और सोने की खरीद कम करने की भी अपील की है ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम हो सके। हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय ने आश्वस्त किया है कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है, लेकिन जनता में डर का माहौल बरकरार है।
Read More: अचानक डाउन हुआ Google! भारत में लाखों यूजर्स परेशान, सर्च पर दिखा ‘Server Error’










