Rupee All-Time Low: डॉलर के मुकाबले रुपया ऑल-टाइम लो पर, गोल्डमैन सैक्स का डरावना अनुमान, ₹95 तक गिरेगा भारतीय रुपया!

ग्लोबल मार्केट में डॉलर की मजबूती और विदेशी फंडों की निकासी ने भारतीय रुपये को आईसीयू में पहुंचा दिया है। गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि रुपया जल्द ही 95 के स्तर तक गिर सकता है। इस गिरावट से पेट्रोल-डीजल और इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों की कीमतें आसमान छूने वाली हैं। क्या भारत तैयार है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 18, 2026

Rupee All-Time Low: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बुधवार का दिन मुद्रा बाजार (Forex Market) के मोर्चे पर काफी चुनौतीपूर्ण रहा। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के दोहरे दबाव के चलते भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर (All-time Low) पर जा गिरा। बुधवार को विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 18 पैसे की बड़ी गिरावट के साथ 92.58 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुआ। विदेशी पूंजी की लगातार निकासी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की बढ़ती मजबूती ने घरेलू मुद्रा की कमर तोड़ दी है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले दिनों में आम आदमी की जेब पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

मिडिल ईस्ट संकट और कच्चे तेल का कीमतों पर असर

फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक, पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक बाजार में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कच्चे तेल के आयात पर भारी निर्भरता रखता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों ने भारतीय बाजार के सेंटिमेंट को कमजोर कर दिया है। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज में स्थानीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 92.42 पर खुली थी, लेकिन दिन चढ़ने के साथ दबाव बढ़ता गया और यह 92.46-92.47 की सीमा को पार करते हुए अंततः 92.58 के खतरनाक स्तर पर जा पहुँची। इससे पहले मंगलवार को भी रुपया 92.40 के निचले स्तर पर बंद हुआ था।

आरबीआई की रणनीति और विशेषज्ञों की राय

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने पीटीआई को बताया कि रुपया इस नए निचले स्तर पर इसलिए पहुँचा क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 92.50 के मनोवैज्ञानिक स्तर को टूटने दिया। आमतौर पर आरबीआई रुपये की अत्यधिक गिरावट को रोकने के लिए हस्तक्षेप करता है, लेकिन केंद्रीय बैंकों की आगामी महत्वपूर्ण बैठकों से पहले बाजार की चाल ने संकेत दिया है कि दबाव बहुत अधिक है। निवेशकों में इस बात को लेकर डर है कि यदि डॉलर की मजबूती इसी तरह जारी रही, तो भारत का आयात बिल काफी बढ़ जाएगा, जिससे व्यापार घाटे पर बुरा असर पड़ेगा।

गोल्डमैन सैक्स का अनुमान: ₹95 तक जा सकता है स्तर

विश्व प्रसिद्ध अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स ने रुपये के भविष्य को लेकर चिंताजनक अनुमान जताया है। फर्म की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा साल के अंत तक रुपया गिरकर 95 के स्तर तक पहुँच सकता है। इसके साथ ही गोल्डमैन सैक्स ने भारत के विकास दर (Growth Forecast) के अनुमान को भी 7% से घटाकर 6.5% कर दिया है। महंगाई के मोर्चे पर भी राहत की उम्मीद कम है, क्योंकि फर्म ने मुद्रास्फीति के अनुमान को 30 बेसिस पॉइंट्स बढ़ा दिया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चालू खाता घाटा (CAD) जीडीपी का 1.2% तक बढ़ सकता है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा रेड सिग्नल है।

एनर्जी संकट और भविष्य की आर्थिक चुनौतियां

गोल्डमैन सैक्स के मुख्य अर्थशास्त्री शांतनु सेनगुप्ता ने विश्लेषण करते हुए कहा कि भारत सरकार वर्तमान में ऊर्जा संकट से अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए राजकोषीय नीतियों का सहारा ले रही है। हालांकि आरबीआई को तत्काल ब्याज दरों में बदलाव जैसा कोई बड़ा कदम उठाने की जरूरत नहीं है, लेकिन वह बाजार में लिक्विडिटी (तरलता) बनाए रखने के लिए सहायता प्रदान कर सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अप्रैल से शुरू होने वाले अगले वित्त वर्ष में बॉन्ड की सप्लाई बढ़ने का खतरा है। यह सब इस बात पर निर्भर करेगा कि मिडिल ईस्ट का संघर्ष कितने समय तक खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतें किस स्तर पर स्थिर होती हैं।

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