Wholesale Inflation : जून में थोक महंगाई बढ़कर 9.87 प्रतिशत पहुंची, खाद्य और अन्य जरूरी सामान हुए महंगे

देश में महंगाई को लेकर एक और चिंताजनक संकेत सामने आया है। खुदरा महंगाई के बाद अब जून महीने में थोक महंगाई भी बढ़कर 9.87 प्रतिशत पर पहुंच गई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आखिर किन सामानों के दाम बढ़े और इसका आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा, पढ़िए पूरी खबर।

Wholesale Inflation

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 14, 2026

Wholesale Inflation : ईरान में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इस वैश्विक उथल-पुथल का सीधा असर अब भारतीय बाजारों और घरेलू अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। देश के भीतर महंगाई का स्तर लगातार ऊपर जा रहा है, जिसने सरकार और आम जनता दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जून महीने के आर्थिक आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि खुदरा महंगाई में उछाल के ठीक बाद थोक महंगाई ने भी तेजी से रफ्तार पकड़ी है, जिससे बाजार में चौतरफा दबाव बढ़ गया है।

सरकारी आंकड़े और अर्थशास्त्रियों के अनुमान

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, खाने-पीने की चीजों, खनिज तेल, बेसिक मेटल्स और रासायनिक उत्पादों की कीमतें बढ़ने के कारण भारत में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर मई के 9.68 प्रतिशत से बढ़कर जून में 9.87 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह वृद्धि आर्थिक विश्लेषकों और अर्थशास्त्रियों द्वारा लगाए गए 9.15 प्रतिशत के अनुमान से काफी अधिक है। जून के दौरान सभी श्रेणियों की वस्तुओं के लिए थोक मूल्य सूचकांक पिछले महीने के 109.9 से बढ़कर 110.2 दर्ज किया गया, जो विनिर्माण और उत्पादन लागत में हुई लगातार बढ़ोतरी को स्पष्ट रूप से उजागर करता है।

खुदरा महंगाई दर ने भी बढ़ाई आम जनता की चिंता

थोक महंगाई दर में आई यह बड़ी तेजी ऐसे नाजुक समय पर देखी गई है, जब एक दिन पहले ही खुदरा महंगाई के मोर्चे पर भी निराशाजनक आंकड़े सामने आए थे। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) से मापी जाने वाली देश की खुदरा महंगाई दर मई के 3.93 प्रतिशत से उछलकर जून में 4.38 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है। इसके अतिरिक्त, रसोई के बजट को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाली खाद्य महंगाई दर (CFPI) जून में 5.32 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि पिछले महीने मई में यह आंकड़ा 4.78 प्रतिशत था।

विभिन्न श्रेणियों में महंगाई की मौजूदा स्थिति

यदि थोक महंगाई के मुख्य समूहों का गहराई से विश्लेषण किया जाए, तो सबसे प्राथमिक वस्तुओं (Primary Articles) में महंगाई दर मई के 4.99 प्रतिशत से बढ़कर जून में सीधे 7.0 प्रतिशत पर पहुंच गई। वहीं, इसका सूचकांक भी 113.7 से बढ़कर 116.1 हो गया। इसी क्रम में, खाद्य वस्तुओं (Food Articles) की श्रेणी में महंगाई दर मई के 3.6 प्रतिशत से बढ़कर जून में 5.49 प्रतिशत हो गई। इसके अलावा, गैर-खाद्य वस्तुओं (Non-Food Articles) के मामले में भी काफी दबाव देखा गया और इनकी महंगाई दर 9.49 प्रतिशत से बढ़कर सीधे 11.07 प्रतिशत दर्ज की गई।

ईंधन और बिजली क्षेत्र में कीमतों का रुझान

जून के दौरान ईंधन और बिजली (Fuel and Power) क्षेत्र में महंगाई दर 27.41 प्रतिशत के उच्च स्तर पर बनी रही, हालांकि यह मई के 30.33 प्रतिशत से थोड़ी कम हुई है। इस समूह में खनिज तेलों (Mineral Oils) की महंगाई जून में 46.48 प्रतिशत रही, जो मई में 49.82 प्रतिशत के करीब थी। कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में राहत मिली और यह दर 61.51 प्रतिशत से गिरकर 34.75 प्रतिशत पर आ गई, जबकि बिजली के दामों में 0.76 प्रतिशत की गिरावट के साथ डिफ्लेशन की स्थिति बनी रही। मंत्रालय के अनुसार, इस पूरे उछाल का मुख्य कारण खनिज तेल और धातुएं रहीं।

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